सिर्फ 27 की उम्र में यह भारतीय महिला बनने जा रही हैं यूनिकॉर्न स्टार्टअप की पहली सीईओ, कमाई 6845 करोड़ रुपए

साउथ ईस्ट एशिया के फैशन ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म जीलिंगो नई ऊंचाईयों को छू रहा है। सिर्फ 4 सालों में इस स्टार्टअप ने अपना एक नया मुकाम बना लिया है। यह स्टार्टअप 'यूनिकॉर्न' स्टेटस पाने के बेहद करीब है। कंपनी को इस मुकाम पर पहुंचाने के पीछे 27 साल की अंकिति बोस का हाथ है। अंकिति बोस इस स्टार्टअप की को-फाउंडर होने के साथ ही सीईओ भी हैं। आपको बता दें कि अंकिता पहली ऐसी भारतीय महिला सीईओ हैं जिनकी कंपनी को यूनिकॉर्न का स्टेटस मिला है। बता दें कि यूनिकॉर्न एक टर्म होती है जिसे उन स्टार्टअप्स को दिया जाता है जिनकी वैल्यू एक अरब डॉलर के करीब हो जाती है।

Money Bhaskar

Feb 13,2019 11:43:00 AM IST

नई दिल्ली। साउथ ईस्ट एशिया के फैशन ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म जीलिंगो नई ऊंचाईयों को छू रहा है। सिर्फ 4 सालों में इस स्टार्टअप ने अपना एक नया मुकाम बना लिया है। यह स्टार्टअप 'यूनिकॉर्न' स्टेटस पाने के बेहद करीब है। कंपनी को इस मुकाम पर पहुंचाने के पीछे 27 साल की अंकिति बोस का हाथ है। अंकिति बोस इस स्टार्टअप की को-फाउंडर होने के साथ ही सीईओ भी हैं। आपको बता दें कि अंकिता पहली ऐसी भारतीय महिला सीईओ हैं जिनकी कंपनी को यूनिकॉर्न का स्टेटस मिला है। बता दें कि यूनिकॉर्न एक टर्म होती है जिसे उन स्टार्टअप्स को दिया जाता है जिनकी वैल्यू एक अरब डॉलर के करीब हो जाती है।

सिंगापुर में है जीलिंगो का हेड ऑफिस


अंकिति के स्टार्टअप की वैल्यू फिलहाल 970 मिलियन डॉलर है। इस टर्म की शुरुआत 2013 में वेंचर कैपिटल एलिन ली ने की थी। जीलिंगो का हेड ऑफिस सिंगापुर में है जबकि इसकी टेक टीम बेंगलुरु में बैठती है। बेंगलुरु में स्टार्टअप के एक और को-फाउंडर ध्रुव कपूर काम देखते हैं। अंकिति की टीम में कुल 100 लोग हैं। जीलिंगो भारतीय उद्यमी द्वारा चलाई जा रही सफल कंपनियों से एक बन चुकी है। इस स्टार्टअप ने अपनी वैल्यू में से 306 मिलियन डॉलर सिर्फ फंडिग से जुटाए थे।

2014 में की थी बिजनेस की शुरूआत


जीलिंगो भारतीय उद्यमी द्वारा चलाई जा रही सफल कंपनियों से एक बन चुकी है। इस स्टार्टअप ने अपनी वैल्यू में से 306 मिलियन डॉलर सिर्फ फंडिग से जुटाए थे। अंकिति ने बताया कि 2014 में उनकी मुलाकात ध्रुव कपूर से हुई थी। जिसके बाद उन्होंने बिजनेस के बारे में सोचा। शुरुआत के लिए उन्होंने भारत को नहीं चुना क्योंकि यहां पहले से फ्लिपकार्ट, ऐमजॉन जैसे ऑनलाइन मार्केट के बड़े प्लेयर्स मौजूद थे। दोनों ने रिसर्च में पाया कि साउथ ईस्ट एशिया की मार्केट में ऐसा नहीं है। इसके बाद 2015 में जीलिंगो अस्तित्व में आया।

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