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सोलर पंप से चलेगी आटा चक्की, कोल्ड स्टोरेज को रख सकेंगे कूल

MNRE की खास स्कीम, एक सोलर पंप से कर सकेंगे चार काम

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नई दिल्ली। सोलर पंप से आटा चक्की चलेगी। सोलर पंप से जानवरों के चारा काटने की मशीन चलेगी। सोलर पंप से कोल्ड स्टोरेज को चला सकेंगे। सोलर पंप से वाटर पंप भी चलेंगे। मतलब एक सोलर पंप से चार काम। मिनिस्ट्री ऑफ न्यू एंड रिन्युएबल एनर्जी (MNRE) की तरफ से यह योजना तैयार की गई है। मंत्रालय सोलर पंप के लिए इस साल मार्च में अधिसूचना जारी कर चुका है। किसानों को दिए जाने वाले सोलर पंप के लिए केंद्र सरकार की तरफ से सब्सिडी का प्रावधान किया गया है। बाकी की राशि के लिए आसान किस्तों पर बैंक से लोन दिलवाने की व्यवस्था की गई है। केंद्र एवं राज्य सरकार की तरफ से सोलर पंप लगाने के लिए किसानों को 70 फीसदी तक का अनुदान मिल रहा है। सोलर पंप के माध्यम से उत्पन्न बिजली को किसान ग्रिड के माध्यम से बिक्री भी कर सकेंगे।

सोलर पंप से कैसे चलेगी चक्की
इस काम के लिए MNRE यूनिवर्सल सोलर पंप कंट्रोलर (यूएसपीसी) लाने जा रहा है। इस कंट्रोलर के माध्यम से सोलर पंप से ही चार काम किए जा सकेंगे। मंत्रालय की रिपोर्ट के मुताबिक यूएसपीसी सोलर पंप में इस्तेमाल होने वाले सोलर पैनल, मोटर एवं पंप का दिल और दिमाग है। मंत्रालय के मुताबिक सोलर पंप को लगाने में सरकार और किसानों की काफी लागत आती है, लेकिन वे साल में अधिकतम 150 दिन ही सोलर पंप का इस्तेमाल कर पाते हैं। ऐसे में साल के बाकी दिनों में ये सोलर पंप बेकार पड़े रहेंगे। इसको ध्यान में रखते हुए MNRE सोलर पंप के माध्यम से चक्की से लेकर कोल्ड स्टोरेज तक को चलाने की योजना लेकर आया है।

सॉफ्टवेयर की मदद ले सकेंगे किसान


मंत्रालय की योजना के मुताबिक यूएसपीसी के माध्यम से आसानी से चार चीजों को चलाया जा सकता है। इस काम के लिए सॉफ्टवेयर की मदद ली जाएगी। यूएसपीसी से वाटर पंप, आटा चक्की, चारा काटने वाली मशीन और कोल्ड स्टोरेज जुड़े होंगे। इन्हें चलाने के लिए मैन्यूल कुछ भी नहीं करना होगा। किसान जब जिसे चाहे सॉफ्टवेयर और की-बोर्ड की मदद से उसे चला पाएगा। कंट्रोलर के सामने एलसीडी पैनल लगा होगा और उस पर सबकुछ डिस्प्ले होता रहेगा। किसान को यह पता रहेगा कि अभी कौन सी मशीन चल रही है। उसे देखकर वह अगला फैसला आसानी से ले पाएगा।

क्या होगा फायदा


मंत्रालय का मानना है कि इससे किसानों की आय को दोगुना करने में मदद मिलेगी। अगर सोलर पंप का खर्च एक लाख रुपए तक का है तो किसानों को अपनी तरफ से कम से कम 30 हजार रुपए लगाने पड़ते हैं। जबकि सोलर पंप का इस्तेमाल 150 दिन से अधिक नहीं करते हैं। अगर इस कंट्रोल की मदद से वे उसी खर्च में आटा चक्की और कोल्ड स्टोरेज चला सकेंगे तो उनकी आमदनी बढ़ जाएगी। लागत नहीं होने से उन्हें अच्छी कमाई होगी। MNRE की तरफ से इस कंट्रोलर के लिए ड्राफ्ट जारी किया गया है। स्टेकहोल्डर्स से राय मांगी गई है। किसान आटा चक्की और कोल्ड स्टोरेज चलाने का काम उस समय कर सकते हैं जब सिंचाई का काम नहीं चल रहा हो। अब तक की स्कीम के मुताबिक सोलर पंप लगाने वाले किसान सोलर बिजली को बेच सकते थे। लेकिन वे ऐसा तभी कर सकते हैं जब वे सोलर पैनल ग्रिड से जुड़े होंगे। इस काम के लिए उन्हें बिजली वितरण कंपनी (डिस्कॉम) पर निर्भर रहना होगा। लेकिन सोलर पंप के कंट्रोलर की मदद से आटा चक्की और कोल्ड स्टोरेज को रन करने के लिए उन्हें किसी पर निर्भर नहीं रहना होगा।

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