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आर्मी को खास शैंपू-साबुन करते हैं सप्लाई करते हैं पुनीत, जवानों को नहीं पड़ती नहाने की जरूरत

क्लेन्स्टा के प्रोडक्ट से बॉर्डर पर तैनात जवानों को खुद को साफ रखने में मदद मिलती है।

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नई दिल्ली. क्लेन्स्टा इंटरनेशनल के फाउंडर पुनीत गुप्ता ने आर्मी के जवानों के लिए ऐसे प्रोडक्ट बनाए हैं जिनके जरिए वह बिना पानी के भी नहा सकें। क्लेन्स्टा के वाटर सेविंग प्रोडक्ट बॉर्डर पर तैनात जवानों को अपने आप को साफ रखने में मदद करते हैं। आईआईटी दिल्ली से शुरू हुए इस कारोबार की शुरुआत 2016 में हुई और अब ये नासा में भी अपने प्रोडक्ट भेजने के लिए पिच कर रहे हैं। क्लेन्स्टा इंटरनेशनल को 5 लाख डॉलर की फंडिंग मिली है।

 

समझी जवानों की परेशानी

भारतीय जवान जमा देने वाली सर्दी में बॉर्डर पर तैनात रहते हैं। ऐसे एरिया में रोज नहाना लगभग असंभव जैसा है। जमा देने वाली जगहों पर अपने बेस कैंप से दूर जवान कई दिनों तक बिना नहाए और सफाई किए रहते हैं। ऐसे मामलों में उन्हें कई बार स्किन प्रॉब्लम ज्यादा होती हैं। यहां पुनीत गुप्ता ने बिजनेस का मौका देखा। वह सबसे मुश्किल एरिया में तैनात जवानों के पास गए और उनकी समस्याओं को समझा। उन्होंने देखा कि ऐसे मुश्किल एरिया में तैनात जवानों के पास पानी नहीं होता और वह नहा भी नहीं पाते। वह जब बेस कैंप वापस लौटते हैं तो खुद को साफ कर पाते हैं।

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IIT दिल्ली में हुई शुरुआत

जवानों की इस परेशानी ने गुप्ता को क्लेन्स्टा इंटरनेशनल शुरू करने की प्रेरणा दी। क्लेन्स्टा इंटरनेशनल की शुरुआत आईआईटी दिल्ली में साल 2016 में हुई। अभी कंपनी का रिसर्च सेंटर वहीं है। वह ऐसे प्रोडक्ट बना रहे हैं, जिनका इस्तेमाल बिना पानी के भी किया जा सकता है। पुनीत गुप्ता का स्टार्टअप क्लेन्स्टा इंटरनेशनल का फोकस ऐसे ही रोजाना की प्रॉब्लम्स के सॉल्युशंस पर है। उन्होंने साल 2017 में सरकार और आर्मी को सप्लाई करना शुरू किया है।

 

आगे पढ़ें - जवानों के लिए बनाए कैसे प्रोडक्ट...

 

 

 

जवानों के लिए बनाए प्रोडक्ट

कंपनी की वेबसाइट के अनुसार, वह कारगिल, सियाचिन और द्रास जैसी जगहों पर तैनात जवानों के लिए प्रोडक्ट बना रही है, जिनके इस्तेमाल से जवान पानी में बगैर नहाए भी अपनी सफाई कर सकें। क्लेन्स्टा इंटरनेशनल वाटरलेस शैंपू और बॉडी बाथ बनाती है। जवानों को शैंपू और बॉडी बाथ लगाकर साफ तौलिये से पोछना होता है। इसमें पानी की जरूरत नहीं पड़ती। यह प्रक्रिया नहाने के बराबर है। क्लेन्स्टा के शैंपू और बॉडी बाथ डस्ट, मैल और स्किन और सर का ऑयल हटाने का भी काम करता है। पुनीत के मुताबिक क्लेन्स्टा के 100 मिलीलीटर शैंपू की बोतल 300 लीटर पानी बचाती है।

 

 

शुरुआत में की डीआरडीओ में नौकरी

पुनीत गुप्ता का जन्म दिल्ली में हुआ है और उनके पास इंजीनियरिंग की डिग्री है। उन्होंने आईआईएम कोलकाता से साल 2011 में एमबीए किया है। एमबीए के बाद यूके से साल 2015 में डिग्री ली और डीआरडीओ और हनीवेल में काम किया। साल 2011 से 2015 के बीच गुप्ता ने पढ़ाई के साथ नौकरी करते रहे। वह अपने प्रोजेक्ट को लेकर अलग-अलग कंपनियों से बात कर रहे थे। उन्हें 5 लाख डॉलर की फंडिंग मिली और उन्होंने आईआईटी में अपने दोस्तों की मदद से क्लेन्स्टा इंटरनेशनल शुरू कर दिया।

 

आगे पढ़ें - नासा को प्रोडक्ट भेजने की तैयारी में..

 

 

नासा से कर रहे हैं प्रोडक्ट को लेकर बातचीत

कंपनी अमेरिका, डच और स्पेन की इडंस्ट्री और नासा से अपने प्रोडक्ट को लेकर बातचीत कर रही है। वेबसाइट के मुताबिक बायोटेक प्रोडक्ट बनाने में अहम चुनौती यही है कि कॉस्मेेटिक प्रोडक्ट को लेकर हर एक देश के अपने नियम हैं, इसलिए प्रोडक्ट के रॉ मैटेरियल का खास ध्यान देना पड़ता है। ये सभी ग्लोबल स्टैंडर्ड के मुताबिक होने चाहिए। अब वह यह प्रोडक्ट कंज्यूमर, हॉस्पिटल और हेल्थकेयर सेक्टर को देखते हुए भी डिजाइन कर रहे हैं।

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