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बिना मिट्टी छत पर उगाएं सब्‍जी, 1 लाख के निवेश पर 2 लाख तक इनकम

लागत से दोगुना प्रॉफिट देती है यह खेती, शहरों में तेजी से हो रही पॉपुलर

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नई दिल्ली.  खेतों के घटते आकार और ऑर्गेनिक फूड प्रोडक्ट की बढ़त मांग के चलते अर्बन फार्मिंग में नई और कारगर तकनीकों का चलन बढ़ता जा रहा है। मांग पूरी करने के लिए कारोबारी और शहरी किसान छतों पर, पार्किंग में या फिर कहीं भी उपलब्ध सीमित जगह का इस्तेमाल पैदावार के लिए कर रहे हैं। इन तकनीकों में फिलहाल जो तकनीक सबसे ज्यादा सफल है उसमें मिट्टी का इस्तेमाल ही नहीं होता। मिट्टी न होने से इसे छतों पर छोटी जगह में आसानी से इस्तेमाल किया जा सकता है। ये तकनीक इतनी सफल है कि सही जानकारी, सही सलाह से लगभग 1 लाख रुपए के खर्च से से आप घर बैठे सालाना 2 लाख रुपए तक की सब्जियां उगा सकते हैं।


मिट्टी के बिना अब छतों पर फार्मिंग
इस तकनीक को हाइड्रोपानिक्स कहा जाता है। इस तकनीक की खास बात यह है कि इसमें मिट्टी का इस्तेमाल बिल्कुल भी नहीं होता है। इससे पौधों के लिए जरूरी पोषक तत्वों को पानी के सहारे सीधे पौधों की जड़ों तक पहुंचाया जाता है। 
 
 

क्या है हाइड्रपानिक्स तकनीक
हाइड्रपॉनिक्स तकनीक में सब्जियां बिना मिट्टी की मदद से उगाई जातीं हैं। इससे पौधों के लिए जरूरी पोषक तत्वों को पानी के सहारे सीधे पौधों की जड़ों तक पहुंचाया जाता है। पौधे एक मल्टी लेयर फ्रेम के सहारे टिके पाइप में उगते हैं और इनकी जड़े पाइप के अंदर पोषक तत्वों से भरे पानी में छोड़ दी जाती हैं। मिट्टी न होने की वजह से न छतों पर भार बढ़ता है। वहीं बिल्कुल अलग सिस्टम होने की वजह से छत में कोई बदलाव भी नहीं करने पड़ते
 
 
आगे जानिए कैसे बन सकता है गार्डेन 

कैसे बन सकता है गार्डेन
हाइड्रपानिक्स एक पौधों को उगाने का बिल्कुल नया तरीका है और इसे किसान या कारोबारी अलग अलग तरह से इस्तेमाल में ला सकते हैं।  वहीं इस क्षेत्र में काम कर रही कई कंपनियां भी आपको शौकिया गार्डन से लेकर कमर्शियल फार्म तक स्थापित करने में मदद कर सकती हैं। मनी भास्कर ने इस बारे में हाइड्रपानिक्स कंपनी ‘हमारी कृषि’ से बात की। कंपनी उपज के लिए तैयार फ्रेम और टावर गार्डेन ऑनलाइन बेच रही है।  कंपनी के 2 मीटर ऊंचे टावर में 40 पौधे लगाने की जगह है। कंपनी के मुताबिक करीब 400 पौधे वाले 10 टावर की लागत 1 लाख के करीब है। इस कीमत में टावर, सिस्टम और जरूरी पोषक तत्व शामिल हैं। कंपनी के मुताबिक अगर सिस्टम को सही ढंग से इस्तेमाल किया जाए तो इसके बाद सिर्फ बीज और न्यूट्रिएंट का ही खर्च आता है।   ये 10 टावर आपकी छत के 150 से 200 वर्ग फुट एरिया में आसानी से खड़े हो जाएंगे।   छोटी जगह पर रखे फ्रेम को नेट शेड और बड़े स्तर पर खेती के लिए पॉली हाउस बनाकर ढकने से मौसम से सुरक्षा मिलती है।    
 
आगे जानिए- क्या है निवेश और कमाई का गणित 

क्या है निवेश और कमाई का गणित 

-    कंपनी हमारी कृषि को स्थापित करने वाले अभिषेक शर्मा के मुताबिक ये तकनीक लोगों को रोजगार देने का अच्छा जरिए हो सकती है, क्योंकि परंपरागत कृषि के मुकाबले इसके मार्जिन बेहतर हैं।
-    शर्मा के मुताबिक एक पॉड से साल भर में 5 किलो लेटिस (सलाद पत्ता) की उपज मिल सकी है। ऐसे में 10 टावर यानि 400 पॉड से 2000 किलो सालाना तक उपज मिल सकती है।
-    फिलहाल लेटिस की कीमत भारत में 180 रुपए किलो है, शर्मा के मुताबिक अगर थोक में 100 रुपए किलो भी मिलते हैं तो अच्छी कंडीशन में साल में 2 लाख रुपए की उपज संभव है।
- वहीं उनके मुताबिक आम स्थितियों में आप आसानी से एक साल में अपना निवेश निकाल सकते हैं। अगले साल रिटर्न ज्यादा होगा क्योकिं आपको सिर्फ रखरखाव, बीज और न्यूट्रिएंट का खर्च ही करना है।
-    यानी आप अपनी छत के सिर्फ 150 से 200 वर्ग फुट के इस्तेमाल से एक साल में ही अपना एक लाख का निवेश निकाल कर प्रॉफिट में आ सकते हैं।  
 
आगे जानिए-क्यों ये तकनीक है फायदे का सौदा

क्यों ये तकनीक है फायदे का सौदा
-    इस तकनीक के जरिए नियंत्रित माहौल में खेती होती है, इसलिए अक्सर किसान हाइड्रपानिक्स की वजह से ऐसे सब्जियों का उत्पादन करते हैं जिसकी मार्केट कीमत ज्यादा होती है।
 -    इस तकनीक में पानी, फर्टिलाइजर और कीटनाशक की खपत भी 50 से 80 फीसदी तक घट जाती है।
-    हमारी कृषि में छपे एक आर्टिकल के मुताबिक इस तकनीक से पैदावार 3 से 5 गुना तक बढ़ जाती है।
- इस तकनीक में शुरुआती खर्च ज्यादा होता है। हालांकि बाद में लागत काफी कम होने से प्रॉफिट बढ़ जाता है।
-    नेट शेड या पॉलिहाउस की वजह से मौसम का असर इन फसलों पर काफी कम हो जाता है।
     
 
 
आगे जानिए कैसे इस तकनीक से खड़ा कर सकते हैं कारोबार

 

 

कैसे इस तकनीक से खड़ा कर सकते हैं कारोबार
-    इस तकनीक के जरिए अपनी छत पर खुद के लिए ताजी ऑर्गेनिक सब्जियां उगाई जा सकती हैं।
-    वहीं आप इसे अपने कारोबार में बदल सकते हैं। इस्राइल, दक्षिण अफ्रीका और साउदी अरब जैसे देश जहां जगह या पानी की कमी है, वहां ये तकनीक सफल कारोबार में बदल चुकी है।
-    इन देशों में किसान अपने घरों की छत के साथ साथ मॉल, ऑफिस की छतों पर गार्डन स्थापित कर रहे हैं। वहीं कई लोग आपस में मिल कर अपनी-अपनी छतों पर सब्जिया उगा रहे हैं।
-    वहीं आप इस तकनीक को सीख कर अपनी कंपनी स्थापित कर सकते हैं या फिर किसी स्थापित कंपनी के साथ जुड़ कर दूसरे लोगों को उनके ऑर्गेनिक फार्म या गार्डन स्थापित करने में मदद कर सकते हैं। 
 
आगे जानिए क्या हैं इस कारोबार में ध्यान देने वाली बातें 

 

 

क्या हैं इस कारोबार में ध्यान देने वाली बातें 
किसानों को पॉलिहाउस या नेट शेड पर अतिरिक्त खर्च करना पड़ सकता है। सिस्टम का खर्च वन टाइम है लेकिन शेड के रखरखाव का खर्च लागत बढ़ा सकता है। खेत जितना बड़ा होगा ये खर्च उतना ज्यादा होगा।
वहीं अभिषेक ने साफ कहा कि फसल पर तापमान, कीट जैसी कई बातों का असर पड़ता है। ऐसे में उपज के लिए खेती की बेसिक जानकारी और उस हिसाब से पौधों की देखभाल और बदलाव करने पड़ते रहते हैं।
रिटर्न इस बात से निर्भर होता है कि आप जो उगा रहे हैं उसकी क्वालिटी और मार्केट में उसकी कीमत क्या है। बेहतर कीमत के लिए मार्केटिंग स्किल्स भी चाहिए 
इस काम में खेती से जुड़े अपने जोखिम बने रहते हैं, लेकिन परंपरागत खेती के मुकाबले इसके जोखिम काफी कम हैं और मार्जिन ऊंचा है।

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