जूट से बनेंगे प्लास्टिक, ग्रामीण इलाकों में निकलेंगे भारी रोजगार

Eco friendly plastic made from jute हाल ही में IIT मंडी के दो रिसर्चरों सन्नी जफर और मनोज सिंह ने साथ मिलकर एक ऐसा मैटिरियल तैयार किया है जो नेचर की रक्षा तो करेगा साथ ही इससे बड़ी संख्या में रोजगार के अवसर भी पैदा होंगे। सन्नी जफर आईआईटी मंडी के असिस्टेंट प्रोफेसर हैं और मनोज उनके स्टूडेंट हैं। इन दोनों ने जूट और केनाफ (एक तरह का पौधा) की मदद से बायोडिग्रेडेबल प्लास्टिक तैयार किया है। माइक्रोवेव क्यूरिंग नाम की तकनीक से तैयार इस प्लास्टिक के इस्तेमाल से ग्रीन हाउस गैसों के उत्सर्जन में कमी आएगी। 

Money Bhaskar

Mar 11,2019 05:24:00 PM IST

नई दिल्ली। हाल ही में IIT मंडी के दो रिसर्चरों सन्नी जफर और मनोज सिंह ने साथ मिलकर एक ऐसा मैटिरियल तैयार किया है जो नेचर की रक्षा तो करेगा साथ ही इससे बड़ी संख्या में रोजगार के अवसर भी पैदा होंगे। सन्नी जफर आईआईटी मंडी के असिस्टेंट प्रोफेसर हैं और मनोज उनके स्टूडेंट हैं। इन दोनों ने जूट और केनाफ (एक तरह का पौधा) की मदद से बायोडिग्रेडेबल प्लास्टिक तैयार किया है। माइक्रोवेव क्यूरिंग नाम की तकनीक से तैयार इस प्लास्टिक के इस्तेमाल से ग्रीन हाउस गैसों के उत्सर्जन में कमी आएगी।

इस तकनीक में माइक्रोवेव एनर्जी से चीजों की प्रोसेसिंग की जाती है


इस तकनीक में माइक्रोवेव एनर्जी से चीजों की प्रोसेसिंग की जाती है। इसमें समय कम लगता है और ऊर्जा की खपत भी 70% कम होती है। जफर और मनोज ने जो मैटेरियल तैयार किया है वह अभी चलन में मौजूद फाइबर रीइन्फोर्स प्लास्टिक (एफआरपी) की जगह ले सकते हैं। एफआरपी का इस्तेमाल एरोस्पेस सिस्टम, ऑटोमोटिव, इंडस्ट्रियल और कंज्यूमर प्रोडक्ट में होता है। ये कम वजनी लेकिन मजबूत और टिकाऊ होते हैं। लेकिन इनके प्रोडक्शन की ज्यादा लागत और बायोडिग्रेडेबल न होने के कारण वैज्ञानिक विकल्प की तलाश में लगे हैं। जफर ने बताया, अब तक जो नेचुरल फाइबर मिले थे वे सिंथेटिक फाइबर की तरह मजबूत नहीं होते थे। हमने माइक्रोवेव क्यूरिंग टेक्नोलॉजी अपनाकर इस कमी को काफी हद तक दूर कर दिया है।

भारत के ग्रामीण इलाकों में रोजगार के अवसर भी पैदा करेगा


यह टेक्नोलॉजी सस्ती है और बेहतर प्रोडक्ट तैयार करने के लिए ज्यादा तापमान पर काम करने की सुविधा देती है। इससे जो फाइबर तैयार होता है वह काफी मजबूत भी है। यह भारत के ग्रामीण इलाकों में रोजगार के अवसर भी पैदा करेगा, क्योंकि इसमें ऊर्जा की खपत कम है और यह सस्ती भी है। मनोज के अनुसार भारत में नेचुरल फाइबर आधारित कंपोजिट तैयार करने के लिए जूट और केनाफ के अलावा भी कई अन्य विकल्प मौजूद हैं। अलग-अलग राज्यों में अलग तरह के प्राकृतिक फाइबर इस्तेमाल में लाए जा सकते हैं।

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