बिज़नेस न्यूज़ » Industry » Startupsटैक्स बेनिफिट के लिए Startup India में फ्रॉड, सरकार कैंसल करेगी कंपनियों के एप्लीकेशन

टैक्स बेनिफिट के लिए Startup India में फ्रॉड, सरकार कैंसल करेगी कंपनियों के एप्लीकेशन

कई कंपनियों ने स्टार्टअप इंडिया स्कीम में मिलने वाले टैक्स बेनिफिट का फायदा लेने के लिए अपने एप्लीकेशन में फ्रॉड किया है

1 of

नई दिल्ली। मोदी सरकार की महत्वाकांक्षी स्कीम स्टार्टअप में फ्रॉड होने की आशंका है। कई कंपनियों ने स्टार्टअप इंडिया स्कीम के तहत मिलने वाले टैक्स बेनिफिट का फायदा लेने के लिए अपने एप्लीकेशन में फ्रॉड का सहारा लिया है। जिस पर अब इंटर मिनिस्ट्रियल बोर्ड एक्शन लेते हुए उनके एप्लीकेशन को कैंसल करने जा रहा है। साथ ही जरुरत पड़ने पर आगे भी एक्शन लेने की तैयारी है।

 

क्या है मामला

 

स्टार्टअप इंडिया स्कीम के तहत स्टार्टअप कहलाने और उसके तहत टैक्स बेनिफिट जैसी फायदे लेने के लिए कंपनियां एप्लीकेशन देनी होती है। कंपनी के एप्लीकेशन को एक इंटर मिनिस्ट्रियल बोर्ड रिव्यू करता है। जिसके आधार पर उसे स्टार्टअप का दर्जा और टैक्स बेनिफिट जैसे फायदे मिलते हैं। डीआईपीपी के तहत नवंबर में हुई बोर्ड मीटिंग मे इस बात का खुलासा हुआ है कि कई कंपनियां ऐसी हैं जो स्टार्टअप का दर्जा लेने के लिए पात्र नहीं है, फिर भी उन्हें उसका दर्जा मिल गया है।

 

कंपनियों ने क्या की चालाकी

 

इंटर मिनिस्ट्रियल बोर्ड द्वारा तैयार किए गए मिनट्स जिसकी कॉपी moneybhaskar.com के पास है। उसके अनुसार कई कंपनियों ने अपनी सब्सिडियरी बनाकर एक नई कंपनी को स्टार्टअप के रुप में रजिस्टर्ड कराया था। जिसमें भारतीय कंपनियों के साथ-साथ विदेशी कंपनियां भी शामिल हैं। नियमों के अनुसार इस तरह से बनाई गई सब्सिडियरी कंपनी को स्टार्टअप का दर्जा नहीं मिल सकता है। बोर्ड अब ऐसी कंपनियों के एप्लीकेशन कैंसल करेगा। इस संबंध में कंपनियों से क्लैरिफिकेशन भी मांगी जाएगी।

 

स्टार्टअप दर्जा मिलने से क्या मिलता है फायदा

 

 स्टार्टप इंडिया स्कीम के तहत ऐसी कंपनियां को स्टार्ट अप इंडिया का दर्जा मिलता है, जो इन्नोवेशन, नए प्रोडक्ट डेवलपमेंट और सर्विस के लिए काम करती है। इसके तहत कंपनी का गठन 7 साल से ज्यादा पुराना नहीं होना चाहिए।

 

वहीं बॉयो टेक्नोलॉजी सेक्टर की कंपनियों के लिए यह लिमिट 10 साल है। ऐसी कंपनियों को स्टार्टअप का दर्जा मिल सकता है, बशर्ते की उनका टर्नओवर 25 करोड़ रुपए सालाना से ज्यादा न हो। स्टार्टअप का दर्जा मिलने से कंपनियों को लेबर कानून में छूट से लेकर टैक्स बेनिफिट की सुविधाएं मिल जाती है।

 

हालांकि टैक्स छूट के लिए जरुरी है कि कंपनी का गठन एक अप्रैल 2016 के बाद हुआ हो। उसे यह छूट कुल तीन साल एक अप्रैल 2019 तक ही मिल सकती है।

prev
next
मनी भास्कर पर पढ़िए बिज़नेस से जुड़ी ताज़ा खबरें Business News in Hindi और रखिये अपने आप को अप-टू-डेट
Don't Miss