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Home » Economy » PolicySaradha scam Supreme Court withdraws interim protection for Rajeev Kumar

Saradha scam / ममता के करीबी अफसर राजीव कुमार पर है 20,000 करोड़ रु. के घोटाले के सबूत मिटाने का आरोप, अब हो सकते हैं गिरफ्तार

सारदा चिटफंड और रोज वैली घाेटालों में आरोपियों के कथित तौर पर टीएमसी से लिंक पाए गए हैं

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नई दिल्ली. ममता बनर्जी के करीबी अफसर और कोलकाता के पूर्व कमिश्नर राजीव कुमार की गिरफ्तारी पर लगी अंतरिम रोक सुप्रीम कोर्ट ने हटा ली है। लेकिन अग्रिम जमानत के लिए कोर्ट जाने के लिए सात दिन का समय दिया है। दरअसल सीबीआई ने शारदा चिट फंड घोटाले में सबूतों को छिपाने के मामले में उन्हें गिरफ्तार कर पूछताछ करने की इजाजत मांगी है। शारदा चिटफंड और रोज वैले घोटाले पर केन्द्र की मोदी और पश्चिम बंगाल की ममता सरकार आमने-सामने है। बता दें कि यह घोटाला करीब 20,000 करोड़ की है। इस घोटाले में ममता की पार्टी तृणमुल के कई बड़े नेताओं के शामिल होने की खबर है। गौरतलब है कि फरवरी में शारदा चिटफंड घोटाले की जांच को लेकर सीबीआई कोलकाता में पुलिस कमिश्नर राजीव कुमार से पूछताछ के लिए पहुंची थी लेकिन पुलिस ने यहां न सिर्फ सीबीआई को रोक दिया बल्कि सीबीआई के पांच अफसरों को भी हिरासत में लेकर थाने ले गई थी। इसके बाद सीबीआई के खिलाफ ममता बनर्जी धरने पर बैठ गई थीं।

आइए जानते हैं पूरा मामला :

करीब 20 हजार करोड़ के हैं दोनों घोटाले

इस विवाद की पृष्‍ठभूमि में दो बड़े घोटाले हैं। पहला है सारदा स्कैम जिसमें करीब 2500 करोड़ रुपए के हेरफेर का आरोप है। वहीं, दूसरा घोटाला रोज वैली स्कैम का है। इसमें करीब 17,000 करोड़ रुपए से ज्यादा के गबन का आरोप है। जांच से जुड़े अधिकारियों के मुताबिक, दोनों ही मामलों में आरोपियों के कथित तौर पर सत्ताधारी टीएमसी से लिंक पाए गए हैं। इन दोनों ही चिटफंड घोटालों की जांच सीबीआई कर रही है। इस मामले में बीती 11 जनवरी को सीबीआई ने पूर्व वित्त मंत्री पी. चिदंबरम की पत्नी नलिनी चिदंबरम के खिलाफ आरोप पत्र दाखिल किया। 

कैसे हुआ घोटाला 

बताया जाता है कि इन चिटफंड कंपनियों ने निवेशकों को आकर्षक ब्याज का लालच दिया। मैच्योरिटी के बाद जब जमाकर्ता अपना रिटर्न लेने पहुंचे तो कंपनियों ने पैसे देने से मना कर दिया। आखिरकार इन कंपनियों ने अपनी दुकानों और दफ्तरों को बंद कर दिया। बता दें कि सुप्रीम कोर्ट ने 2014 में इन मामलों को जांच के लिए सीबीआई को सौंप दिया था। 

जानिए शारदा चिटफंड और रोज वैली घोटाले के बारे में…

शारदा चिटफंड घोटाला पश्चिम बंगाल का एक बड़ा आर्थिक घोटाला है। इसमें कई बड़े नेताओं के नाम जुड़े हैं। साल 2014 में सुप्रीम कोर्ट ने सीबीआई को आदेश दिए थे कि इस मामले की जांच करे। जिस पर सुप्रीम कोर्ट ने पश्चिम बंगाल, ओडिशा और असम पुलिस जांच में सहयोग करने का आदेश दिया था।

 

 

 

 

रोज वैली घोटाला 

शारदा चिटफंड की तरह ही रोज वैली घोटाले पर भी काफी वक्त से हड़कंप मचा हुआ है। इसमें कई बड़े नेताओं का नाम भी शामिल होने की बात सामने आ चुकी है। दरअसल, रोज वैली चिटफंड घोटाले में रोज वैली ग्रुप ने लोगों 2 अलग-अलग स्कीम का लालच दिया और करीब 1 लाख निवेशकों को करोड़ों का चूना लगा दिया था। इसमें आशीर्वाद और होलिडे मेंबरशिप स्कीम के नाम पर ग्रुप ने लोगों को ज्यादा रिटर्न देने का वादा किया। ग्रुप एमडी शिवमय दत्ता इस घोटाले के मास्टरमाइंड बताए जाते हैं। जिसके बाद लोगों ने भी इनकी बातों में आकर इसमें निवेश कर दिया। 

 

तीन स्‍कीमों में उलझे निवेशक

जांच रिपोर्ट के मुताबिक, सारदा ग्रुप की चार कंपनियों का इस्तेमाल तीन स्कीमों के जरिए पैसा इधर-उधर करने में किया गया। ये तीन स्कीम थीं- फिक्स्ड डिपॉजिट, रिकरिंग डिपॉजिट और मंथली इनकम डिपॉजिट। इन स्कीम के जरिए भोले भाले जमाकर्ताओं को लुभाने की कोशिश हुई और उनसे वादा किया गया कि बदले में जो इनसेंटिव मिलेगा वो प्रॉपर्टी या फॉरेन टूर के रूप में होगा। रिपोर्ट के मुताबिक, 2008 से 2012 की ग्रुप की समरी रिपोर्ट से खुलासा हुआ है कि ग्रुप की चार कंपनियों ने अपनी पॉलिसियां जारी करके 2459 करोड़ रुपए को ठिकाने लगाया गया है।

तीन स्‍कीमों में उलझे निवेशक

जांच रिपोर्ट के मुताबिक, सारदा ग्रुप की चार कंपनियों का इस्तेमाल तीन स्कीमों के जरिए पैसा इधर-उधर करने में किया गया। ये तीन स्कीम थीं- फिक्स्ड डिपॉजिट, रिकरिंग डिपॉजिट और मंथली इनकम डिपॉजिट। इन स्कीम के जरिए भोले भाले जमाकर्ताओं को लुभाने की कोशिश हुई और उनसे वादा किया गया कि बदले में जो इनसेंटिव मिलेगा वो प्रॉपर्टी या फॉरेन टूर के रूप में होगा। रिपोर्ट के मुताबिक, 2008 से 2012 की ग्रुप की समरी रिपोर्ट से खुलासा हुआ है कि ग्रुप की चार कंपनियों ने अपनी पॉलिसियां जारी करके 2459 करोड़ रुपए को ठिकाने लगाया गया है।

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