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ये बिजनेसमैन देश में लाएगा 5G इंटरनेट, 1 सेकंड में डाउनलोड होंगी 30 मूवी

3G के बाद रिलायंस जियो, एयरटेल ने इंडिया 4G सर्विस शुरू कर दी है। लेकिन, हो सकता है कुछ सालों में आप 5G इंटरनेट यूज कर रहे हों। 5G इतना फास्ट होगा कि केवल एक सेकंड में आप 30 मूवीज डाउनलोड कर सकते हैं।

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नई दिल्ली. 3G के बाद रिलायंस जियो, एयरटेल ने इंडिया 4G सर्विस शुरू कर दी है। लेकिन, हो सकता है कुछ सालों में आप 5G इंटरनेट यूज कर रहे हों। 5G इतना फास्ट होगा कि केवल एक सेकंड में आप 30 मूवीज डाउनलोड कर सकते हैं। इसके लिए सबसे पहले एयरटेल के चेयरमैन सुनील कुमार मित्तल ने स्ट्रैटजी बनानी शुरू कर दी है। मनीभास्कर आपको बता रहा है कि 5G इंटरनेट किस तरीके का होगा...
 
डेवलप हो रहे हैं इक्विपमेंट
 
भारत की दिग्गज टेलिकॉम कंपनी एयरटेल ने 5G इंटरनेट के लिए फ्रेमवर्क बनाना शुरू कर दिया है। एयरटेल के चेयरमैन सुनील भारती मित्तल ने 5G सर्विस के लिए दुनिया की सबसे बड़ी दूरसंचार सेवा प्रदाता कंपनी चाइना मोबाइल के साथ कॉन्ट्रेक्ट किया है। इसके अंतर्गत दोनों कंपनियां साथ मिलकर 5G के इक्विपमेंट डेवलप करेंगी।
 
एक सेकंड में डाउनलोड होंगी 30 मूवीज
 
यूनिवर्सिटी ऑफ सरे (Surrey, England) के वैज्ञानिकों ने नई 5G इंटरनेट तकनीक की टेस्टिंग की है। रिसर्च टीम के अनुसार नई तकनीक मौजूदा 4G से 65000 गुना ज्यादा तेज होगी। टेस्टिंग के दौरान 5G  पर 125 गीगाबाइट्स प्रति सेकंड की स्पीड हासिल कर ली है। इस स्पीड से 30 मूवीज सिर्फ एक सेकंड में डाउनलोड की जा सकेंगी। इस तकनीक को यूनिवर्सिटी ऑफ सरे के 5G इनोवेशन सेंटर (5GIC) ने बनाया है।
 
कब शुरू हुआ 5G
 
5G टेक्नोलॉजी की शुरुआत साल 2010 में हुई। इसे मोबाइल नेटवर्क की फिफ्थ जेनरेशन कहा जाता है। यह 'वायरलेस बर्ल्ड वाइड वेब' (मोबाइल इंटरनेट) को ध्यान में रखकर बनाया गया है। इस तकनीक में बड़े पैमाने पर डेटा एक्सचेंज किया जा सकता है।
 
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तस्वीरों का इस्तेमाल केवल प्रस्तुतिकरण के लिए किया गया है।
 
 
कितनी होगी स्पीड
 
5G इंटरनेट में 1 जीबीपीएस से अधिक स्पीड होगी। हालांकि अभी तक इसकी अधिकतम स्पीड डिफाइन नहीं की गई है, क्योंकि अभी यह कान्सेप्ट के दौर में है। इस पर काम चल रहा है। इस तकनीक की सबसे बड़ी खूबी रियल टाइम में बड़े से बड़े डेटा का आदान-प्रदान करना है। यह तकनीक संवर्धित वास्तविकता (अगर्मेंटेड रियलिटी) के क्षेत्र में नया रास्ता खोलेगी, यानि इसके माध्यम से फोन कॉल पर आप बात करेंगे, तो लगेगा जैसे आमने-सामने बात कर रहे हैं।
 
कब तक आ सकता है इंडिया में
 
अनुमान के मुताबिक 5जी तकनीक साल 2020 के बाद भारत में शुरु हो सकती है। फिलहाल लंदन में साल 2020 तक 5जी तकनीक लगाने की तैयारी चल रही है।
 
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क्या है 4G टेक्नोलॉजी
 
4G तकनीक की शुरुआत साल 2000 के एंड में हुई। इसे मोबाइल तकनीक की फोर्थ जेनरेशन कहा जाता है। इस तकनीक के माध्यम से 100 एमवीपीएस से लेकर 1 जीबीपीएस तक की स्पीड से डेटा का डाउनलोड-अपलोड किया जा सकता है। यह ग्लोबल रोमिंग को सपोर्ट करता है। यह तकनीक 3G के मुकाबले सस्ती है। साथ ही इसमें सिक्युरिटी फीचर्स भी ज्यादा है। इस तकनीक की कुछ खामियां भी हैं। यह 3जी के मुकाबले कहीं अधिक बैटरी की खर्च करता है। 4जी तकनीक से लैस मोबाइल फोन में अलग तरह के हार्डवेयर होते हैं, इसलिए 3जी फोन के मुकाबले 4जी के फोन महंगे होते हैं। फिलहाल 4जी तकनीक दुनिया के कम देशों में ही उपलब्ध है, जिनमें ज्यादातर डेवलप कंट्रीज ही शामिल हैं। 4जी तकनीक की सबसे बड़ी खूबी यह है कि इसमें खराब से खराब नेटवर्क में भी कम से कम 54एमबीपीएस की रफ्तार मिल सकती है।
 
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3G टेक्नोलॉजी
 
3G टेक्नोलॉजी की शुरुआत 2001 में जापान में हुई। इस टेक्नोलॉजी के जरिए टेक्स्ट, तस्वीर और वीडियो के अलावा मोबाइल टेलीविजन और वीडियो कांफ्रेसिंग या वीडियो कॉल किया जा सकता है। 3जी तकनीक में डेटा के आने-जाने की रफ्तार 40 लाख बिट्स प्रति सेकेंड तक होती है। 3जी टेक्नोलॉजी का जोर मुख्य रूप से डेटा ट्रांसफर पर है। 2जी के मुकाबले 3जी की एक अहम खासियत यह है कि यह आंकड़ों के आदान-प्रदान के लिए अधिक सुरक्षित (इनक्रिप्टेड) है। 3जी तकनीक की अधिकतम डाउनलोड स्पीड 21 एमबीपीएस और अपलोड स्पीड 5.7 एमवीपीएस होती है।
 
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2G
 
2G टेक्नोलॉजी की शुरुआत 1991 में फिनलैंड में हुई। यह ग्लोबल सिस्टम फॉर मोबाइल कम्युनिकेशन पर आधारित टेक्नोलॉजी है जिसे शॉर्ट रूप में जीएसएम टेक्नोलॉजी कहा जाता है। इस टेक्नोलॉजी में पहली बार डिजिटल सिग्नल का प्रयोग किया गया। इस तकनीक से माध्यम से फोन कॉल के अलावा पिक्चर मैसेज, टेक्स मैसेज और मल्टीमीडिया मैसेज भेजना आसान हुआ। इसके इस्तेमाल करने से फोन की बैटरी कम खर्च होती है। इस टेक्नोलॉजी पर डेटा के आने-जाने की रफ्तार 50,000 बिट्स प्रति सेकेंड तक हो सकती है। 2जी तकनीक से डाउनलोड और अपलोड की अधिकतम स्पीड 236 केबीपीएस (किलो बाइट प्रति सेकंड) होती है। इसके एडवांस वर्जन को 2.5जी और 2.7जी नाम दिया गया था, जिसमें डेटा के आदान-प्रदान की रफ्तार और भी बढ़ गई थी।
 
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1G
 
1G दुनिया में वायरलेस टेलीफोन की पहली टेक्नोलॉजी है। यह तकनीक पहली बार 1980 में सामने आई और 1992-93 तक इसका इस्तेमाल किया जाता रहा। इसमें डेटा आने-जाने की रफ्तार 2.4 केबीपीएस थी। इस तकनीक की बड़ी खामी इसमें रोमिंग का ना होना था। पहली बार अमेरिका में 1जी मोबाइल सिस्टम ने इस तकनीक का प्रयोग किया था। इसमें मोबाइल फोन पर आवाज की क्वालिटी काफी खराब थी, साथ ही यह बैटरी की भी बहुत अधिक खपत करता था। इस तकनीक पर चलने वाले मोबाइल हैंडसेट बेहद भारी थे। यह एनालॉग सिग्नल पर आधारित टेक्नोलॉजी थी।
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