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बदलाव / कंपनियों में अब मिलेंगी पार्ट टाइम, फ्रीलांस नौकरियां

निवेशकों को रिझाने के लिए सरकार कर सकती है श्रम नियम में बदलाव

Commerce and Industry ministry proposes changes in labor laws
  • वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय का प्रस्ताव
  • इलेक्ट्रॉनिक, केमिकल एवं फ्रूड प्रोसेसिंग क्षेत्र में निवेश की संभावना
  • निवेशकों के लिए तैयार होंगे खास इंसेंटिव पैकेज।

नई दिल्ली.

वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय ने इलेक्ट्रॉनिक, केमिकल और फूड प्रोसेसिंग सेक्टरों में विदेशी निवेशकों को रिझाने के लिए एक इंटेसिव पैकेज का प्रस्ताव दिया है। यह प्रस्ताव डिपार्टमेंट फॉर प्रमोशन ऑफ इंडस्ट्री एंड इंटरनल ट्रेड (DPIIT) की ओर से तैयार किए गए 100-डे एक्शन प्लान का हिस्सा है, जिसके तहत पार्ट-टाइम, शेयर्ड और फ्रीलांस नौकरियों को रोजगार की नई श्रेणी माने जाने का सुझाव दिया गया है। मंत्रालय ने 10-प्वांट एक्शन प्लान तैयार किया है।

 

निवेशकों के लिए तैयार होंगे खास इंसेंटिव पैकेज

इसके प्रस्ताव के तहत भारत सालाना 100 अरब डॉलर प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) पा सकता है, अगर वह वियतनाम जैसे देशों के फाइनेंशियल इंसेटिव की बराबरी कर सके। वियतनाम अपने विदेशी निवेशकों को कर्ठ इंसेटिव देता है, जैसे कॉरपोरेट इनकम टैक्स की सस्ती दरें और चार साल तक टैक्स से छूट। मंत्रालय के प्लान ऑफ एक्शन के तहत सरकार की प्राथमिकता वाले क्षेत्रों में बड़े निवेशकों को आकर्षित करने के लिए कस्टमाइज्ड इंसेटिव पैकेज तैयार किए जाएंगे।

 

श्रम आधारित सेक्टरों में बढ़ेंगे रोजगार

मंत्रालय की ओर से मिली जानकारी के मुताबिक ऐसे इंसेटिव के जरिए इलेक्ट्रॉनिक्स, केमिकल्स और फूड प्रोसेसिंग के क्षेत्र में बड़ा निवेश आने की संभावना है। ये सेक्टर्स श्रम आधारित हैं और इनमें निवेश और रोजगार सृजन की संभावनाएं बहुत ज्यादा हैं। इस 10-प्वाइंट एक्शन प्लान में टैक्स व्यवस्था को बेहतर बनाने, कानूनी बदलाव करके रोजगार सृजन करने की स्ट्रैटजी को शुरू करने प्राकृतिक संसाधनों का बेहतर आवंटन करने, छोटे उद्योगों को सपोर्ट करने, उभरते हुए इंटरप्रेन्योर्स को प्रमोट करने और नई इंडस्ट्रियल पॉलिसी को रिलीज करने जैसे प्वाइंट शामिल हैं।

 

मजदूर कानून में होगा बदलाव

मंत्रालय के मुताबिक श्रम पर निर्भर इंडस्ट्री में से कानूनी अड़चनों को हटाना जरूरी है, क्योंकि मौजूदा मजदूर कानून काफी प्रतिबंधात्मक हैं बौर इनके चलते मजदूरों को औपचारिक तौर पर नियुक्त नहीं किया जा सकता है। इससे व्यापार में तरक्की नहीं हो पाती है। इसके अलावा एक्शन प्लान के तहत नेशनल रिटेल पॉलिसी भी तैयार करने का सुझाव दिया गया है, जिससे 6.5 करोड़ छोटे ट्रेडर्स को फायदा पहुंच सके।

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