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Aviation / Jet Airways को बचाने के लिए आगे आए बैंककर्मी, पीएम मोदी को लिखा खत

कर्मचारियों के भविष्य के लिए सरकार से एयरलाइन के अधिग्रहण का आग्रह

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नई दिल्ली। जेट एयरवेज के 20,000 कर्मचारियों की मदद के लिए बैंककर्मियों का संगठन आगे आया है। इसने सरकार से एयरलाइन का अधिग्रहण करने का आग्रह किया है, ताकि जेट के कर्मचारियों का भविष्य सुरक्षित रहे। लेकिन साथ ही यह भी कहा है कि बैंकों पर इस संकटग्रस्त एयरलाइन को कर्ज देने के लिए दबाव नहीं डाला जाना चाहिए।

नीलामी सफल न होने पर सरकार से अधिग्रहण की मांग

ऑल इंडिया बैंक एम्पलाइज एसोसिएशन ने इस सिलसिले में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखा है। इसमें कहा गया है कि बैंकों ने एयरलाइन का इन्वेस्टर तलाशने के लिए नीलामी शुरू की है। अगर नीलामी सफल नहीं होती है तो सरकार को इसका अधिग्रहण करना चाहिए ताकि 20,000 कर्मचारियों की नौकरी सुरक्षित रहे। एसोसिएशन का कहना है कि एयरलाइन को उबारने के लिए हर व्यक्ति बैंकों की तरफ देख रहा है। लेकिन नरेश गोयल अब भी इसके प्रमोटर हैं। उनके पास एयरलाइन की 51% हिस्सेदारी है। इसलिए कंपनी चलाना या बेचना उनका सिरदर्द है। बैंकों पर और कर्ज देने के लिए दबाव नहीं बनाया जाना चाहिए। जेट के मैनेजमेंट ने बुधवार को ऑपरेशन अस्थायी तौर पर बंद करने की घोषणा की थी। इससे पहले मंगलवार को बैंकों ने इसे 400 करोड़ रुपए का इमरजेंसी फंड देने से मना कर दिया था। जेट पर बैंकों का पहले से 8,500 करोड़ रुपए का कर्ज है।

उड़ानें बंद होने के बाद बैंकों को जेट की नीलामी की चिंता


जेट की उड़ानें बंद होने के बाद अब बैंकों को नीलामी की चिंता सताने लगी है। उन्हें डर है कि नीलामी में ज्यादा बोली न मिले। इसलिए वे जेट के एसेट को सुरक्षित रखने की कोशिश में हैं। वे इसके 16 विमान दूसरी एयरलाइंस को किराए पर देना चाहते हैं। इससे इनका मेंटिनेंस होता रहेगा और आमदनी भी होगी। इसके अलावा वे जेट के एयरपोर्ट स्लॉट सुरक्षित रखने के लिए भी अथॉरिटी से बात कर रहे हैं। जेट के अपने 10 बड़े विमानों में एयर इंडिया और दूसरी एयरलाइंस ने रुचि दिखाई है। बैंकिंग सूत्रों ने बताया कि इनके प्रस्तावों पर विचार किया जा रहा है। एयर इंडिया के सीएमडी अश्वनी लोहानी ने दो दिन पहले एसबीआई चेयरमैन रजनीश कुमार को 5 बड़े विमान लीज पर लेने के बारे में लिखा था। एयर इंडिया इन्हें लंदन, दुबई और सिंगापुर रूट पर चलाना चाहती है। जेट के बंद होने के बाद भारतीय एयरलाइंस में सिर्फ एयर इंडिया लंबी दूरी के अंतरराष्ट्रीय रूट्स पर सर्विस दे रही है। इसलिए वह इन जगहों के लिए उड़ानों की संख्या बढ़ाना चाहती है।

बैंकों की सफाई- जेट मैनेजमेंट की देरी से स्थिति बिगड़ी


बैंकिंग सूत्रों का कहना है कि जेट की मौजूदा हालत के लिए बैंकों को जिम्मेदार नहीं ठहराना चाहिए। बैंक अधिकारी नौ महीने से जेट के मैनेजमेंट के साथ बातचीत कर रहे थे और उनसे ठोस प्लान मांग रहे थे। दुर्भाग्यवश प्रमोटर नरेश गोयल और मैनेजमेंट ने फैसला लेने में काफी देरी की जिससे यह स्थिति बनी। गोयल ने 25 मार्च को चेयरमैन और बोर्ड से तो इस्तीफा दे दिया, लेकिन हिस्सेदारी बेचने के समझौते पर अप्रैल के दूसरे हफ्ते में हस्ताक्षर किए। तब तक ज्यादातर उड़ानें बंद हो चुकी थीं। गोयल के इस्तीफा देने के बाद भी बोर्ड का ढांचा नहीं बदला है। माना जा रहा था कि जेट के कर्ज को इक्विटी में बदलने से नए प्रमोटर रुचि दिखाएंगे। पूर्व एसबीआई चेयरमैन एके पुरवार को नया चेयरमैन बनाना भी तय हुआ था। सूत्रों का कहना है कि तकनीकी कारणों से अभी तक उनकी नियुक्ति नहीं हो सकी है। इसलिए बैंकों को पुरानी मैनेजमेंट टीम के साथ ही काम करना पड़ रहा है।

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