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26 हफ्तों की पेड मैटरनिटी लीव से महिलाओं की नौकरी पर मंडराने लगा खतरा, सर्वे में हुआ खुलासा

नए कानून के तहत महिलाओं को 6 माह के मातृत्व अवकाश पर कंपनी को देनी होती है पूरी सैलरी

Women may lost jobs

नई दिल्ली. सरकार की ओर से कामकाजी महिलाओं के लिए मातृत्व अवकाश के तौर पर 26 हफ्तों की पेड लीव का तोहफा दिया गया था। हालांकि अब इसी तोहफे की वजह से महिलाओं की नौकरी पर खतरा मंडराने लगा है। दरअसल लोकल सर्कल्स के सर्वे में खुलासा हुआ है कि स्टार्टअप और छोटी कंपनियां महिलाओं को नौकरी पर रखने से परहेज करने लगी है। इसकी वजह 26 हफ्तों का मैटरनिटी लीव है। 

7 सप्ताह के खर्चे की भरपाई सरकार करती है

ईटी की खबर के मुताबिक 9,000 स्टार्टअप्स और छोटी कंपनियों के सर्वे से मालूम चला है कि ऐसी महिलाओं को नौकरी पर रखना बिल्कुल कम बजट पर चल रहे स्टार्टअप्स के लिए बड़ा आर्थिक बोझ जैसा होगा, जो छह महीने के पेड लीव के साथ मातृत्व लाभ लेने वाली हैं। सर्वे में 46 प्रतिशत कंपनियों ने बताया कि उनके यहां पिछले 18 महीनों में ज्यादातर पुरुष कर्मियों की ही बहाली हुई है। सरकार की ओर से कहा गया था कि जो कंपनियां 26 सप्ताह का पेड मैटरनिटी लीव देंगी, उनके 7 सप्ताह के खर्चे की भरपाई सरकार करेगी। लेकिन स्टार्टअप्स, छोटी एवं मध्यम आकार की कंपनियों ने इसे पर्याप्त राहत नहीं माना। सर्वे में 65 प्रतिशत कंपनियों ने कहा कि उनके लिए 19 सप्ताह का खर्च भी बहुत ज्यादा है। 

10 या 10 से ज्यादा लोगों वाले संस्थान पर नियम लागू 

2017 में वेतन सहित मातृत्व अवकाश (पेड मैटरनिटी लीव) बढ़ने के बाद देश में नए स्टार्टअप्स और छोटी कंपनियां महिलाओं को जॉब पर रखने से कतराने लगी हैं। नए मैटरनिटी लीव के कानून के चलते महिलाओं को 12 की जगह 26 सप्ताह के पेड मैटरनिटी लीव का प्रावधान लागू हो गया। संगठित क्षेत्र से जुड़ीं 18 लाख महिलाएं नए प्रावधान के दायरे में आ गईं। नया कानून 10 या 10 से ज्यादा लोगों को नौकरियों पर रखने वाले हरेक संस्थान पर लागू है। इसके तहत, पहले दो बच्चों के जन्म पर मां बनी कामकाजी महिला को 26 सप्ताह तक वेतन के साथ छुट्टी दिए जाने का प्रावधान किया गया है। 

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