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नेताओं ने भुला दिया वह मंदिर, जिसकी तर्ज पर बनी है संसद, घूमने का खर्च मात्र 2 हजार रु

दिल्ली से करीब 400 किमी दूर है यह मंदिर

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सौरभ कुमार वर्मा 

नई दिल्ली. संसद को लोकतंत्र का मंदिर कहा जाता है। देश का हर नेता यहां पहुंचने का सपना देखता है। दिलचस्प है कि लोकतंत्र के इस मंदिर यानी संसद का निर्माण भी एक मंदिर की तर्ज पर ही हुई है। हालांकि देश में बनी तमाम सरकारों ने इस मंदिर की ऐसी अनदेखी की कि आजादी के लगभग 7 दशक बाद भी इस मंदिर तक आम लोगों का पहुंचना काफी मुश्किल बना हुआ है।

 

किसी भी राज्य सरकार ने नहीं ली सुध 

मध्य प्रदेश में शिवराज सिंह के बाद कमलनाथ हिंदुत्व के रथ पर सवार होकर सूबे की सियासत तक पहुंच जाते हैं। लेकिन मध्य प्रदेश के मुरैना जिले में पड़ने वाले हिंदू मंदिर चौसठ योगिनी की कोई सुध लेने वाला नहीं है। यहां तक जाने का कोई साधन नहीं है। अगर आप यहां जाना चाहते हैं, तो आपको किराए पकर टैक्सी का सहारा लेना पड़ेगा। साथ ही सड़क की हालत बद से बद्दतर है। यह वहीं राज्य हैं, जहां के मुख्यमंत्री राज्य की सड़कों को न्यूयार्क की तरह  बनाने का दावा करते थे। 

 

चौसठ योगिनी मंदिर 

इस मंदिर का निर्माण क्षत्रिय राजाओं ने 1323 ई. में कराया था। करीब 200 सीढ़ियों चढ़ने के बाद इस मंदिर तक पहुंचा जा सकता है। यह मंदिर एक वृत्तीय आधार पर निर्मित है और इसमें 64 कमरे हैं। हर कमरे में एक-एक शिवलिंग है। मंदिर के मध्य में एक खुला हुआ मंडप है। इसमें एक विशाल शिवलिंग है। यह मंदर 101 खंभो पर टिका है। इस मंदिर को ऐतिहासिक स्मारक घोषित किया है। 

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कौन हैं चौसठ योगिनी माता 

चौसठ योगिनी माता आदिशक्ति काली का अवतार हैं। घोर नामक दैत्य के साथ युद्ध करते हुए मां काली ने यह अवतार लिए थे। इन देवियों में दस महाविघाएं और सिद्ध विघाओं की भी गणनी की जाती है। ये योगिनी तंत्र और योग विद्या से संबंध रखती हैं। चौसठ योगिन मंदिर को एक जमाने में तांत्रिक यूनिवर्सिटी कहलाता है।

 

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आसापास के टूरिस्ट प्लेस 

मुरैना में कई टूरिस्ट प्लेस हैं। इसमें मितावली स्थित चौसठ योगिनी मंदिर है। इसके पास ही पड़ावली है। इसके अलावा शनिचरा मंदिर भी पास है। वहीं ग्वालियर के फोर्ट का दीदार किया जा सकता है, जहां हाल ही में लुकाछिपी मूवी की शूटिंग हुई है। इसके साथ ही ग्वालियर के जय विलास पैसेस को भी घूम सकते हैं।

 

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शनिचरा 

शनिचरा मंदिर को श्रद्धा के साथ पर्यटन के तौर पर विकसित किया जा रहा है। शनिवार को मंदिर में हजारों की संख्या में श्रृद्धालु पहुंचते हैं। शनीचरी अमावस्या पर यहां विशेष मेले का आयोजन होता है।  

 

पड़ावली

पड़वली मंदिरों का समूह है, जो मुरैना जिले में स्थित है। इन मंदिरों का निर्माण 10वीं शताब्दी मे हुआ था। अपने समकालीन मध्य भारत के इन सभी मंदिरों में इनका स्थान अद्वितीय है। इस मंदिर का सबसे आकर्षक भाग अर्द्ध मंडप में विद्यमान मूर्तियां हैं। इसमें नृत्य करते हुए भगवान शिव और विष्णु का अवतार माने जाना वाल वामन की मूर्तिया देखी जा सकती हैं। 

 

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बटेश्वर 

यह स्थल मुरैना मुख्यालय से लगभग 45 कि0मी0 दूर स्थित होकर समूह मंदिरो के नाम से प्रसि़द्ध है। यह पढावली ग्राम से 2 किमी की दूरी पर स्थित है। यहां पर कई शिवमंदिरों का समूह है, जो जीर्ण शीर्ण अवस्था में है। यह मंदिर प्रतिहार कालीन है।

 

 

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ग्वालियर का किला

ग्वालियर का किला पूरा का पूरा ही बहुत खूबसूरत है। इतना की यहां की चारदीवारी भी मन को मोहित करती है। यहां पहली शताब्दी से लेकर आधुनिक युग तक की कलाकारी देखने को मिलती है। इस किले के अंदर कई महल और मंदिर हैं। इनमें गुजारी महल, करण महल, मानसिंह महल, जहांगीर महल और शाहजहां महल शामिल हैं। स्मारक, विष्णु-शिव मंदिर और बौद्ध मंदिर दर्शनीय हैं। इतिहास के अनुसार, किले का निर्माण 7वीं शताब्दी के मध्य में सूर्यसेन नामक एक सरदार की देखरेख में किया गया था। सूर्यसेन ग्वालियर से करीब 12 किलोमीटर की दूरी पर स्थित सिंहोनिया गांव के रहनेवाले थे। यह किला जिस पहाड़ी पर स्थित है, उसे गोपांचल नाम से जाना जाता है।

इन टूरिस्ट प्लेस घूमने का खर्च 

दिल्ली से सीधे मुरैना जाने से अच्छा होगा कि ग्वालियर जाया जाएं, यहां तक आवागमन के साधन आसानी से मिल जाते हैं। साथ ही रुकने के लिए अच्छे होटल भी मिल जाएंगे। ग्वालियर जाने का एक फायदा यह होता है, कि ग्वालियर का किला और जय विलास पैलेस घूम सकते हैं। दिल्ली से ग्वालियर जाने का सेकेंड स्लीपर किराया 235 रुपए है। ग्वालियर में 500 रुपए प्रतिदिन के हिसाब से होटल आराम से मिल जाते हैं। खाने पर प्रतिदिन 500 रुपए तक आ सकता है। वहीं कैब से मितावली, पड़ावली, बटेश्वर, शनिशचरा मंदिर घूमने का खर्च 2000 रुपए आ जाता है। कैब इसलिए क्योंकि यहां तक आने का कोई साधन नहीं है। तीन लोग दो दिन का टूर बनाते हैं, हर एक का 2000 रुपए खर्च आता है। 

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