विज्ञापन
Home » Industry » Service SectorHighest unemployment rate on india

नोटबंदी के बाद बढ़ी बेरोजगारी, टूटा पिछले 45 साल का रिकार्ड, NSSO के डाटा से हुआ खुलासा

शिक्षित महिलाओं की बेरोजगारी दर में भी हुई बेतहाशा बढ़ोत्तरी

1 of

नई दिल्ली. भारत में बेरोजगारी की दर साल 2017-18 में 6.1 प्रतिशत रही, जो साल 1972 के बाद सबसे ज्यादा थी। साल 1971 में बेरोजगारी दर 6 प्रतिशत थी। ऐसे में बेरोजगारी के मामले में देश ने पिछले 45 सालों के रिकार्ड को तोड़ दिया। बिजनेस स्टैंडर्ड की खबर के मुताबिक इसका खुलासा नेशनल सैंपल सर्वे ऑफिस (NSSO) के लीक हुए डाटा से हुआ।  

 

नोटबंदी के बाद बढ़ी बेरोजगारी

ऐसा दावा किया जा रहा है कि नोटबंदी के बाद से बेरोजगारी के हालात बिगड़े हैं। देश में 8 नवंबर 2016 को नोटबंदी हुई थी। इसके बाद बेरोजगारी का सर्वे हुआ, जिसमें जुलाई 2017 से लेकर जून 2018 तक के आंकडे लिए गए थे। रिपोर्ट को दिसंबर में सरकार को सौंप दिया गया था। लेकिन इसे अब तक जारी नहीं किया गया था। इसमें नोटबंदी के बाद रोजगार छिनने के आंकड़े होने का दावा किया जा रहा है। राष्ट्रीय सांख्यिकी आयोग की ओर से इसकी मंजूरी मिलने के बाद भी इसे जारी नहीं किया गया। ऐसे में आयोग के कार्यकारी चेयरपर्सन सहित दो सदस्यों ने इस्तीफा दे दिया। 

 

 

शहरों में सबसे ज्यादा है बेरोजगारी की समस्या 

रिपोर्ट के मुताबिक बेरोजगारी की सबसे गंभीर समस्या शहरों में है। शहरी क्षेत्रों में बेरोजगारी दर 7.8 प्रतिशत है, जबकि ग्रामीण क्षेत्रों में यह 5.3 फीसदी है। इस दौरान ग्रामीण क्षेत्र की शिक्षित महिलाओं की बेरोजगारी दर 17.3 फीसदी रही है। यह अब तक का सबसे बड़ा आंकड़ा है। इससे पहले साल 2011-12 में 15.2 प्रतिशत रही थी।  वहीं, ग्रामीण क्षेत्र के शिक्षित पुरुषों की बेरोजगारी दर का आंकड़ा 10.5 प्रतिशत है। 

 

 

लोकसभा चुनाव में सरकार को उठाना पड़ सकता है नुकसान 

लोकसभा चुनवा से चंद माह पहले बेरोजगारी के आंकडों के जारी होने से सरकार की मुसीबतें बढ़ सकती हैं। इसका सरकार को लोकसभा चुनाव में नुकसान उठाना पड़ सकता है। विपक्ष इस मुद्दे को चुनावों में भरपूर भुनाने की कोशिश करेगा। 

prev
next
मनी भास्कर पर पढ़िए बिज़नेस से जुड़ी ताज़ा खबरें Business News in Hindi और रखिये अपने आप को अप-टू-डेट
विज्ञापन
विज्ञापन