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रो-रो सर्विस से आसानी से जा सकते हैं माजुली द्वीप, आधी हुई दूरी

423 किमी. की दूरी घटकर हुई मात्र 12.7 किमी.

Ro Ro vessel service from Jorhat to Majuli
असम के माजुली द्वीप का ज्यादातर हिस्सा ब्रह्मपुत्र नदी से घिरा हुआ है। असम में भाजपा सरकार के आने के बाद वर्ष 2016 में इसे जिले बनाया गया। द्वीप में 144 गांवो बसे हुए हैं, जिनकी आबादी करीब 1.5 लाख है। नदी से घिरा हुआ ये भारत का सबसे बड़ा द्वीप है। माजुली जिले के लोगो के लिए नदी के दूसरे छोर पर स्थिति जोरहाट जाने के लिए 423 किमी. का लंबा रास्ता तय करना पड़ता था, जिससे समय के साथ ही काफी खर्च आता था।

नई दिल्ली. असम के माजुली द्वीप का ज्यादातर हिस्सा ब्रह्मपुत्र नदी से घिरा हुआ है। राज्य में भाजपा की सरकार आने के बाद वर्ष 2016 में इसे जिले बनाया गया। द्वीप में 144 गांवो बसे हुए हैं, जिनकी आबादी करीब 1.5 लाख है। नदी से घिरा हुआ ये भारत का सबसे बड़ा द्वीप है। माजुली जिले के लोगो के लिए नदी के दूसरे छोर पर स्थिति जोरहाट जाने के लिए 423 किमी. का लंबा रास्ता तय करना पड़ता था, जिससे समय के साथ ही काफी खर्च आता था। 

 

दूरी घटकर हुई 12.7 किमी. 

अब माजुली द्वीप से जोरहाट के लिए रो-रो सर्विस शुरू हुई। इससे माजुली से जोरहाट की दूरी मात्र 12.7 किमीं. रह गई। इसे इनलैंड वाटरवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया की ओर से शुरू किया गया। असम के मुख्यमंत्री सर्वानंद सोनेवाल ने इस वेजल सर्विस का उद्धाटन किया है। इसे पहले सफर पर माजुली के कामलाबारी से जोरहाट जिले के नीमघाट के लिए रवाना किया, जो कि गुवाहाटी से 400 किमी. पूर्व में है। ये 46.5 मीटर लंबा और 13.3 मीटर चौड़ा वेजल होगा। 

 

9.46 करोड़ रुपए का आया खर्च 

रो-रो सर्विस को लेकर लोगों में जश्न का माहौल है। इस सर्विस के शुरू होने से माजुली द्वीप के लिए आवागमन बढ़ेगा। साथ ही व्यापार और रोजगार के अवसर बनेंगे। सर्वानंद सोनावाल इस जिले से सांसद हैं। इस सर्विस को शुरु करने के लिए 9.46 करोड़ रुपए का खर्च आया है। 

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