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किसानों के बाद मजदूरों को तोहफे की तैयारी, प्रतिमाह मिलेंगे न्यूनतम 11,250 रुपए

लोकसभा चुनाव से पहले हो सकता है ऐलान

Minimum wages for labours

Minimum wages for labours: नई दिल्ली. केंद्र सरकार किसानों के बाद अब मजदूरों पर मेहरबान है। लेबर मिनिस्ट्री की एक कमिटी ने श्रमिकों के लिए राष्ट्रीय स्तर पर न्यूनतम मजदूरी 375 रुपये प्रतिदिन करने और इसके साथ ही शहरों में श्रमिकों को अतिरिक्त हाउस रेंट अलाउंस देने की सिफारिश की है।

नई दिल्ली. केंद्र सरकार किसानों के बाद अब मजदूरों को बड़ा तोहफा दे सकती है। लेबर मिनिस्ट्री की एक कमिटी ने श्रमिकों के लिए राष्ट्रीय स्तर पर न्यूनतम मजदूरी प्रतिमाह 9750 रुपए देने की सिफारिश की है। इसके अलावा शहरी मजदूरों के लिए 55 रुपए रोजना के हिसाब से हाउस रेंट अलाउंस देने का सुझाव दिया है, जो एक माह के 1650 रुपए होते है। ऐसे में मजदूरों को एक माह में न्यूनतम 11250 रुपए देने होंगे। सरकार लेबर मिनिस्ट्री की कमिटी की सिफारिशों पर लोकसभा चुनाव से पहले अंतिम फैसला ले सकती है। 

 

375 रुपए रोजना मजदूरी का किया समर्थन 

मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक लेबर मिनिस्ट्री ने मजदूरों को रोजना 375 रुपए देने की सिफारिश की है। बता दें कि मौजूदा समय में एग्रीकल्चर सेक्टर में अनस्किल्ड लेबर के लिए राष्ट्रीय स्तर पर न्यूनतम मजदूरी 321 रुपए और अन्य सेक्टर में अनस्किल्ड लेबर के लिए 371 रुपए प्रतिदिन है। लेबर मिनिस्टर संतोष गंगवार के मुताबिक सरकार श्रमिकों के हितों को सर्वोच्च प्राथमिकता देती है। सरकार चाहती है कि श्रमिकों को इतनी मजदूरी मिले जिससे वे पोषक भोजन ले सकें।

 

2017 में हुआ समिति का गठन 

लेबर मिनिस्ट्री ने राष्ट्रीय न्यूनतम मजदूरी तय की समीक्षा करने और उसे तय करने का तरीका सुझाने के लिए वीवी गिरि राष्ट्रीय श्रम संस्थान के फैलो अनूप सतपथी की अध्यक्षता में जनवरी 2017 को एक एक्सपर्ट कमिटी का गठन किया था। कमिटी ने अपनी रिपोर्ट सौंप दी। सुप्रीम कोर्ट के आदेश और भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद की ओर से दिए गए पोषक भोजन के मानकों को आधार बनाते हुए यह रिपोर्ट तैयार की गई है। 

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