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अगर आप भी हैं नौकरीपेशा तो कर लें चेक, कहीं आपमें भी तो नहीं डिप्रेशन के ये लक्षण

हर पांच में से एक व्यक्ति depression या anxiety disorder का शिकार है

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नई दिल्ली.

आज ऑफिस में काम करने वाले हर इंसान की दिनचर्या बहुत सीमित हो गई है। 9 से 10 घंटे काम करने के बाद इंसान के पास इतना समय और ऊर्जा भी नहीं बचती कि वो अपने परिवार के साथ कुछ पल बिता सके। इतने बिजी शेड्यूल में अपनी मेंटल हेल्थ का ध्यान रखना नामुमकिन सा लगता है। रिपोर्ट्स की मानें तो आज हर पांच में से एक व्यक्ति डिप्रेशन यानी अवसाद या anxiety disorder (चिंता रोग) का शिकार है। खासतौर से 20 से 40 वर्ष की उम्र वाली युवा आबादी मेंटल डिसॉर्डर्स की तेजी से शिकार हो रही है। गैर-संक्रमण वाली बीमारियों से देश को होने वाले आर्थिक नुकसान में मानसिक अस्वस्थता की हिस्सेदारी 20 फीसदी है।

 

समय की कमी के कारण लोग अपने विचारों और भावनाओं को समझ नहीं पाते हैं। बस एक अलग सी खीझ (irritation) महसूस करते हैं, जिसका उनके रिश्तों पर बहुत बुरा असर पड़ता है। Psychologist सविता सिंह से बातचीत के आधार पर हम आपको बताने जा रहे हैं डिप्रेशन के बारे में और यह भी कि कैसे आप खुद को अवसाद से दूर रख सकते हैं।

 

मूड डिसॉर्डर है डिप्रेशन

डिप्रेशन एक तरह की मनोदशा विकृति (mood disorder) है, जिसमें व्यक्ति की मनोदशा में उदासी और मानसिकता में नेगेटिविटी बढ़ जाती है। उदासी कई बार खीझ के रूप में महसूस होती है जब व्यक्ति अपनी भावनाओं को किसी से व्यक्त नहीं कर पाता है। इसे क्षुब्ध अवसाद (agitated depression) कहते हैं।

 

 

डिप्रेशन के लक्षण

अलग-अलग लाेगों में डिप्रशेन के अलग-अलग लक्षण देखे जा सकते हैंलेकिन यह लक्षण कुछ केंद्र बिंदु पर आधारित हैं-

 

मानसिक लक्षण: कई दिनों से उदासीगुस्सा और खीझ महसूस होना। किसी भी काम में ध्यान लगाने में मुश्किल होनापसंदीदा कामों में दिलचस्पी कम होना और मन में खुदकुशी के विचार आना अवसाद के मानसिक लक्षण हैं।

 

शारीरिक लक्षण: नींद और भूख में बढ़ोतरी या कमीऊर्जा की भारी कमी (fatigue) महसूस होना और शरीर के अलग-अलग हिस्सों (ज्यादातर सिर और पीठ में ऊपर की तरफबेवजह दर्द महसूस होना। सेक्शुअल एक्टीविटीज में इंटरेस्ट कम होना। 

 

भावात्मक लक्षण: छोटे बच्चों से लेकर बड़े-बुजुर्ग तक किसी में भी ये लक्षण देखे जा सकते हैं। इसमें व्यक्ति अपने आप को बेकार (worthless), बेचारा (helpless) और आशाहीन (hopeless) महसूस करता है। ये तीन भावनाएं व्यक्ति के पास्टप्रेजेंट और फ्यूचर से जुड़ी होती हैं। यह कहा जा सकता है कि डिप्रेशन में इंसान जीवन से हारा हुआ महसूस करता हैजिसके कारण उसका आत्म विश्वास (confidence) कम हो जाता है।

 

हर उदासी डिप्रेशन नहीं है

ये जरूरी नहीं है कि हर उदास इंसान डिप्रेशन का शिकार हो। उदासी एक सामान्य इमोशन है जिसे हम बुरे अनुभवाें जैसे रोजमर्रा के स्ट्रगल और किसी नुसकान के समय महसूस करते हैं। ये इमोशन परिस्थिति के हिसाब से बदल जाता है। लेकिन डिप्रेशन में ऐसा नहीं हाेता है। इसमें उदासी कई दिनों या हफ्तों तक बनी रहती हैचाहे परिस्थिति अच्छी हो या बुरी।

 

ऐसे बच सकते हैं डिप्रेशन से

डिप्रेशन से बचने के कई रास्ते हैं। इनमें सबसे ज्यादा जरूरी है सतर्क रहना यानी इस बात पर ध्यान देना कि आप कितने समय से उदास हैं और डिप्रेशन के कितने लक्षण आप अपने अंदर देखते हैं। अगर आप दो हफ्तों से लगातार उदासी महसूस कर रहे हैं तो हो सकता है कि यह डिप्रेशन हो। ऐसे में किसी भरोसेमंद दोस्त से अपनी बातें साझा करके आप रिलैक्स महसूस करेंगे। लेकिन अगर समस्या बढ़ती ही जाती है तो आप साइकोलॉजिस्ट की मदद जरूर लें।

 
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