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बहुत हुई पत्‍थरबाजी, पैसों के लि‍ए कश्‍मीर की सरकार ने उठाया ये बड़ा कदम

कश्‍मीर को समझ आ गया है कि‍ पत्‍थरबारी से घर नहीं चलने वाला।

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नई दिल्‍ली। कश्‍मीर को समझ आ गया है कि‍ पत्‍थरबारी से घर नहीं चलने वाला। जब भी कश्‍मीर में हिंसा की खबरें वायरल होती हैं वहां पर्यटकों की संख्‍या घट जाती है। इसकी वजह से कश्‍मीर की इकोनॉमी को काफी नुकासान उठाना पड़ता है। बीते वर्ष के पीक सीजन में पत्‍थरबाजी और हिंसा की घटनाओं के चलते होटलों की बुकिंग में 70 फीसदी की गि‍रावट दर्ज की गई थी। इसके चलते ऐसे कश्मीरियों के सामने रोजी रोटी का संकट पैदा हो गया, जो पर्यटन से जुड़े हैं। हिंसा से राज्‍य की इमेज बि‍गड़ती है और उसकी वजह से पर्यटक घटते हैं।  यहां के 1 लाख से ज्‍यादा लोग डायरेक्‍ट या इनडायरेक्‍ट रूप से पर्यटन से जुड़े हुए हैं। आगे पढ़ें क्या लिया बड़ा फैसला 

लि‍या बड़ा फैसला 
कश्‍मीर 30 सालों में पहली बार बहुत बड़ी टूरि‍ज्‍म्‍ा गैदरिंग करने जा रहा है। ट्रैवल इंडस्‍ट्री से जुड़े सभी लोग इसमें शि‍रकत करेंगे। यह आयोजन मार्च में  होना है। इसका मकसद पर्यटकों की गिरती संख्‍या के चलते संघर्ष कर रहे यहां के पर्यटन बि‍जनेस को नया जीवन देना है। यहां पर्यटन से जुड़े हर पहलू पर चर्चा होगी। इसमें सरकारी भागीदारी भी होगी, जो यह देखेगी कि‍ सरकारी स्‍तर पर कि‍स तरह के बदलावों या पहल की जरूरत है।  कॉक्‍स एंड किंग के कॉरपोरेट कम्‍युनिकेश हेड थॉमस ने moneybhaskar को बताया कि‍ इस ईवेंट में पूरा फोकस कशमीर में पर्यटन को पटरी पर लौटाना है। घाटी में पर्यटन को बढ़ावा देने से जुड़े हर पहलू पर चर्चा की जाएगी। आगे पढ़ें चीन से छीना मौका 

 

चीन से छीना मौका 
ट्रैवल एजेंट एसोसिएशन (टीएएआई)ऑफ इंडि‍या का यह वार्षि‍क सम्‍मेलन वैसे तो चीन में होने वाला था मगर कशमीर ने इसकी मेजबानी के लि‍ए जोर लगाया और बाजी मार ली। इसमें ट्रैवल, टूरि‍ज्‍म और टिकटिंग से जुड़े 500 से ज्‍यादा प्रभावशाली प्रतनि‍धि शामि‍ल होंगे। टीएएआई के इस वार्षि‍क सम्‍मेलन में 10 से ज्‍यादा वि‍देशी प्रति‍नि‍धि‍यों के शामि‍ल होने की उम्‍मीद है। वैसे तो कशमीर में यह ईवेंट पहले भी हो चुका है मगर वो सब 1988 से पहले की बात है। यह सम्‍मेलन 27 मार्च से 30 मार्च तक चलेगा।  आगे पढ़ें हिंसा के चलते उठाना पड़ा कि‍तना नुकसान 

 

70 फीसदी होटल खाली 
अप्रैल-जून पर्यटन का पीक सीजन होता है क्‍योंकि इस दौरान स्‍कूलों की छुट्टि‍यां होती हैं और मैदानी इलाकों में रहने वाले लोग बड़े पैमाने पर पहाड़ों का रुख करते हैं। हिंसा की वजह से वर्ष 2017 के पीक सीजन में कशमीर के होटलों की बुकिंग 2016 के मुकाबले 70 से 80 फीसदी कम रही थी। यानी होटलों में केवल 25 फीसदी कमरे ही बुक थे। कश्मीर की इकोनॉमी में पर्यटन की बड़ी हि‍स्‍सेदारी है। यहां के 1 लाख से ज्‍यादा लोग डायरेक्‍ट या इनडायरेक्‍ट रूप से पर्यटन से जुड़े हुए हैं। 

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