बंगाली रसगुल्ले को अब विदेश में मिली चुनौती, उठाना पड़ सकता है नुकसान

भारतीयों की पसंदीदा मिठाई रसगुल्ला एक बार फिर चर्चा है। इसका वजह रसगुल्ला और काजू कतली में जारी मीठी जंग है। दरअसल पिछले कुछ वर्षों में रसगुल्ला की विदेशों में भारी डिमांड रहती थी। आलम यह था कि भारत से विदेश को निर्यात होने वाली कुल मिठाइयों में से 15 से 20 फीसदी हिस्सेदारी अकेले रसगुल्ला की होती है। हालांकि पिछले कुछ वर्षों में यह ट्रेंड बदला है। अब विदेश में काजू कतली की मांग में बढ़ोत्तरी दर्ज की गई है। रसगुल्ला और काजू दोनों के बीच जारी जंग में वैसे तो भारत का ही फायदा हो रहा है। लेकिन रसगुल्ला बनाने वाली कंपनियों को इसका नुकसान उठाना पड़ सकता है।  

Money Bhasakr

Jan 07,2019 01:07:00 PM IST

नई दिल्ली. भारतीयों की पसंदीदा मिठाई रसगुल्ला एक बार फिर चर्चा है। इसका वजह रसगुल्ला और काजू कतली में जारी मीठी जंग है। दरअसल पिछले कुछ वर्षों में रसगुल्ला की विदेशों में भारी डिमांड रहती थी। आलम यह था कि भारत से विदेश को निर्यात होने वाली कुल मिठाइयों में से 15 से 20 फीसदी हिस्सेदारी अकेले रसगुल्ला की होती है। हालांकि पिछले कुछ वर्षों में यह ट्रेंड बदला है। अब विदेश में काजू कतली की मांग में बढ़ोत्तरी दर्ज की गई है। रसगुल्ला और काजू दोनों के बीच जारी जंग में भारत का ही फायदा हो रहा है।

काूज कतली की बढ़ रही है डिमांड

बता दें कि हर साल भारत से करीब 8,000 करोड़ रुपए की मिठाईयों का निर्यात होता है।फेडरेशन ऑफ स्वीट्स एंड नमकीन मैन्युफैक्चरर्स के निदेशक फिरोज एच. नकवी के मुताबित भारतीय मिठाइयों के निर्यात के बाजार में काजू कतली की मौजूदा भागीदारी हालांकि महज 5 प्रतिशत है। लेकिन इस मिठाई की मांग खासकर उन मुल्कों में दिनों-दिन रफ्तार पकड़ रही है जहां भारतीय मूल के लोग बड़ी तादाद में रहते हैं।

ब्रांडिंग से बढ़ सकती है काजू कतली की डिमांड

नकवी ने कहा कि अगर काजू कतली की अच्छी तरह ब्रांडिंग की जाए, तो आने वाले सालों में इसकी मांग रसगुल्ले को भी पीछे छोड़ सकती है। उन्होंने बताया कि एशिया और खाड़ी देशों के साथ अमेरिका, यूरोप और अफ्रीका में भी भारतीय मिठाइयों की खासी मांग है। उन्होंने बताया, "ब्रिटेन में तो भारतीय मिठाइयों की इतनी मांग है कि एक बड़ी मिठाई कम्पनी ने वहां अपनी उत्पादन इकाई लगा दी है। भारत से निर्यात की जाने वाली अन्य प्रमुख मिठाइयों में गुलाब जामुन और सोन पापड़ी शामिल हैं।अगर दोनों तरफ से सरकारी नीतियों को थोड़ा लचीला बनाया जाये, तो रूस, चीन और जापान को भारतीय मिठाइयों का बड़े पैमाने पर निर्यात किया जा सकता है।

X
COMMENT

Money Bhaskar में आपका स्वागत है |

दिनभर की बड़ी खबरें जानने के लिए Allow करे..

Disclaimer:- Money Bhaskar has taken full care in researching and producing content for the portal. However, views expressed here are that of individual analysts. Money Bhaskar does not take responsibility for any gain or loss made on recommendations of analysts. Please consult your financial advisers before investing.