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सरकार बना रही है घरेलू कामगारों के लिए राष्ट्रीय नीति, उन्हें भी मिलेगी न्यूनतम मजदूरी

यह नीति उन्हें हर प्रकार के शोषण से भी बचाएगी

Govt preparing National Policy for domestic helpers

नई दिल्ली.

केंद्र सरकार घरेलू कामगारों को न्यूनतम मजदूरी दिलाने और उनकी सामाजिक सुरक्षा को सुनिश्चत करने के लिए राष्ट्रीय नीति बनाने जा रही है। श्रम और राेजगार राज्य मंत्री संतोष कुमार गंगवार ने इस बारे में संसद में जानकारी देते हुए कहा कि घरेलू कामगारों को सभी प्रकार के शोषणों से बचाने के लिए घरेलू कामगार नीति बनाने पर विचार कर रही है। इसके साथ ही केंद्र सरकार ने बाल एवं किशोर श्रम अधिनियम, 1986 को भी कानून बनाने के लिए बिल पास किया है, जिसके तहत 14 वर्ष से कम उम्र के बच्चों को किसी भी व्यवसाय में नहीं लगाया जा सकेगा।

 

उन्होंने कहा कि घरेलू कामगारों से संबंधित जाे राष्ट्रीय नीति बनाई जा रही हैं उसके तहत पहले से मौजूदा श्रमिक विधानों में घरेलू श्रमिकों को शामिल किया जाएगा। घरेलू कामगारों को असंगठित कामगार के रूप में पंजीकरण कराने का अधिकार होगा। इस तरह के पंजीकरण से उन्हें अधिकारों एवं लाभों की सुविधा मिल सकेगी।

 

इस नीति के तहत मिलेंगी ये सुविधाएं

 

-घरेलू कामगार अपने स्वयं के एसोसिएशन और श्रमिक संघ बना सकेंगे।

-उन्हें न्यूनतम मजदूरी मिलना सुनिश्चित किया जाएगा।

-उनकी सामाजिक सुरक्षा की सुलभता मिलेगी।

-वे अपने कौशल को बढ़ा सकेंगे।

-दुराचार और शोषण से संरक्षण।

-घरेलू कामगारों की शिकायतों के निवारण के लिए कोर्ट, ट्रिब्यूनल तक जाने की सुविधा।

-निजी प्लेसमेंट एजेंसियों पर नियंत्रण करने के लिए एक तंत्र की स्थापना करना।

 

देश में हैं 39 लाख घरेलू कामगार

संतोष गंगवार ने कहा कि राष्ट्रीय प्रतिदर्श सर्वेक्षण संगठन (एनएसएसओ ) के आंकड़ों के मुताबिक देश में निजी परिवारों में तकरीबन 39 लाख घरेलू कामगार काम करते हैं। इसमें से 26 लाख महिलाएं हैं। इन्हें सभी प्रकार के शोषण से बचाने के लिए इस नीति को तैयार किया जा रहा है।

 

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