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बात करने के इन 5 तरीकों को ठीक करके बीमारियां रख सकते हैं दूर

सर गंगा राम अस्पताल के डॉ. राजीव मेहता की प्रोफेशनल के लिए खास सलाह

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नई दिल्ली. बीमारियों को दूर रखने में न सिर्फ दवा की जरूरत होती है, बल्कि बातों का भी असर होता है। दिल्ली के सर गंगा राम हॉस्पिटल के डिपार्टमेंट ऑफ साइकेट्री के वाइस चेयरपर्सन डॉ. राजीव मेहता ने बताया कि हम घर, स्कूल और ऑफिस में किस तरह से बातचीत करते है, इसका प्रभाव हमारे जीवन और बीमारियों पर होता है। जैसे जिस घर में रोक-टोक होती, कमी निकाली जाती है, नीचा दिखाया जाता है, गाली गलौज होती है, वहां मानसिक और शारीरिक बीमारियां ज्यादा मिलती हैं। 

 

बच्चों में बढ़ रही हैं मानसिक बीमारियां

उन्होंने बताया कि कैसे अपने बातचीत के तरीकों को ठीक करके आप घर और ऑफिस का माहौल ठीक रख सकते है, साथ ही कई तरह की बीमारियां दूर रख सकते हैं। इस मामले में पहले डॉ. एन. एन बिग ने एक रिसर्च की थी, जिसमें बताया था कि बातचीक के तरीकों से बीमारियां पैदा होती हैं। डॉ. राजीव के मुताबिक आज के माहौल में मानसिक बीमारियां ज्यादा हो रही हैं। इन बीमारियों से ग्रस्त होने वाले लोगों में बच्चों की संख्या काफी ज्यादा है। ऐसे में डॉ. राजीव ने बातचीत के सही तरीकों के बारे में मनी भास्कर से चर्चा की, जो इस प्रकार है

 

  • नजरअंदाज करना

छोटी बातों को नजरअंदाज करने से रिश्ते बने रहते हैं। जैसे बच्चा स्कूल बैग में कोई बुक ले जाना भूल गया ऐसे में उसे स्कूल में डांट पड़ी। अगर आप वापस आकर उसे घर में डाटेंगे, तो हो सकता है बच्चा गुस्सा हो जाएं। ऐसे में कभी-कभी चीजों को नजरअंदाज कर देना चाहिए। जैसे आपके किसी दोस्त, पड़ोसी, रिश्तेदार ने कुछ गलत कह भी दिया तो कई बार उसे नजरअंदाज कर देना चाहिए।

 

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फैक्ट्स बताना
अक्सर लोग किसी चीज को करने से दूसरों को राेकते हैं, लेकिन वाजिब कारण नहीं बता पाते। जैसे माता-पिता अक्सर अपने बच्चों को कहतेहैं कि पास से टीवी मत देखो, लेकिन यह नहीं बोलते कि आंखें खराब हो जाएंगी। या फिर खाना खत्म करो नहीं तो अन्न बर्बाद होगा। ऐसे तमाम उदाहरण है जहां लोग एक-दूसरे को कारण बताए बिना अपनी बात मानने को कहते हैं। ऐसा करने की बजाए लोगों को फैक्ट्स बताने चाहिए। जैसे गाड़ी तेज चलाने से एक्सीडेंट हो सकता है। अगर आप अपने दोस्तों, परिवार वालों या ऑफिस के सहकर्मियों से इस तरह बात करेंगे तो आप उन्हें कुछ जानकारी भी देंगे। इसके बाद सामने वाले को सोचना है कि वो आपकी बात सुनता है कि नहीं।

 

चीजों को टाल देना
डॉ. राजीव के मुताबिक किसी मुद्दे को टाल देना कई बार बेहतर होता है। जैसे अगर बेटे ने साइकिल की जिद की है, तो सीधे उसे मना करें, बल्कि यह कहें कि हां साइकिल आपके लिए जरूरी तो है। लेकिन अभी थोड़ी पैसे की दिक्कत चल रही है। ऐसा करके आपने साइकिल के लिए मना तो नहीं किया, लेकिन उसे टाल दिया। ठीक ऐसे ही जैसे दो कर्मचारी आपस में किसी मुद्दे पर बहस कर रहे है। ऐसे में अगर उन्होंने बॉस से पूछा कि दोनों में से कौन सही है, तो बॉस काे सीधे किसी का नाम लेने की बजाय कहना चाहिए कि सही तो दोनों हैं। चलो मैं सोचकर थोड़ी देर में बताया हूं। इस टाइम में दोनों का गुस्सा शांत हो जाएगा।

 

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  • रिक्वेस्ट वाले लहजे में बात करना

घर और ऑफिस में अपने साथ वालों से ऑर्डर देने के लहजे में बात नहीं करनी चाहिए। जैसे अगर आपको पानी चाहिए तो यह नहीं बोलना चाहिए कि मुझे पानी दे दो। सही लहजा होगा- क्या आप मुझे पानी दे देंगे? 'क्या' में बात करने से सामने वाले को लगता है कि उससे पूछा जा रहा है न कि आर्डर दिया जा रहा है। जैसे क्या मुझे फाइल पकड़ा देंगे, क्या मेरा यह काम कर देंगे?

 

  • प्रशंसा करना

डॉ. राजीव ने बताया कि लोगों से रिश्ते बनाए रखने के लिए उनकी प्रशंसा करते रहना चाहिए। हालांकि यह प्रशंसा सही बात पर होनी चाहिए और इसमें चापलूसी का भाव नहीं होना चाहिए। ऐसा करने से प्रशंसा पाने वाले का मनोबल बढ़ता है। लिहाजा किसी ने आपका कोई काम किया है सा आप किसी से कोई काम कराना चाहते हैं तो प्रशंसा करने में कोई गुरेज नहीं करना चाहिए।

 

अगर आप इस तरह के और भी टिप्स जानना चाहते हैं, तो डॉ. राजीव की किताब Speak to anyone easily पढ़ सकते हैं। 

 
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