EPFO के इस बयान से प्राइवेट कर्मचारियों की खुशी पर फिर सकता है पानी

EPFO Fund crises: सुप्रीम कोर्ट ने हाल में EPFO की याचिका को खारिज करके नौकरीपेश करने वालों को बड़ी राहत थी। कोर्ट के फैसले से प्राइवेट कर्मचारियों को रिटायरमेंट के बाद मिलने वाली पेंशन में कई सौ गुना बढ़ गई।

Money Bhaskar

Apr 04,2019 01:48:00 PM IST

नई दिल्ली. सुप्रीम कोर्ट ने हाल में EPFO की याचिका को खारिज करके नौकरीपेश करने वालों को बड़ी राहत थी। कोर्ट के फैसले से प्राइवेट कर्मचारियों को रिटायरमेंट के बाद मिलने वाली पेंशन में कई सौ गुना बढ़ गई। सुप्रीम कोर्ट ने केरल हाईकोर्ट ने फैसले को बरकरार रखते हुए रिटायर हुए सभी कर्मचारियों को उनकी पूरी सैलरी के हिसाब से पेंशन देने का आदेश दिया था। जबकि, वर्तमान में EPFO 15,000 रुपए वेतन की सीमा के साथ योगदान की गणना करता है।

EPFO के लिए कोर्ट का फैसला लागू करना मुश्किल

मतलब अगर कोई कर्मचारी 33 साल तक सेवा करता है और वह 50 हजार रुपए की सैलरी पर रिटायर होता है तो उसे अभी 5180 रुपए प्रतिमाह की पेंशन मिलती है। सुप्रीम कोर्ट के नए ऑर्डर के बाद इस कर्मचारी को 25 हजार रुपए प्रति माह की पेंशन मिलेगी। लेकिन कोर्ट के फैसले के चंद दिनों बाद ईपीएफओ की ओर से आए बयान ने प्राइवेट कर्मचारियों की खुशी पर पानी फेरने का काम किया है। दरअसल सुप्रीम कोर्ट के आदेश का पालन करना एंप्लॉईज प्रॉविडेंट फंड ऑर्गनाइजेशन (EPFO) के लिए काफी मुश्किल है।

पेंशनधारों को पेंशन देने के लिए नहीं है फंड

एनबीटी की खबर के मुताबिक EPFO के ट्रस्टी बृजेश उपाध्याय का मानना है कि ज्यादा पेंशन देने के लिए ज्यादा फंड की जरूरत है। फंड होगा तभी ज्यादा पेंशन दे पाएंगे। उन्होंने कहा कि सरकारी मदद के बिना हम सुप्रीम कोर्ट के आदेश का पालन नहीं कर सकते हैं। सरकार ने मदद नहीं की तो एक दिन ऐसी स्थिति होगी कि EPFO के पास अपने पेंशनधारकों को पेंशन देने के लिए फंड नहीं होगा।

सरकारी सब्सिडी के बिना कोर्ट का फैसला लागू करना संभव नहीं

सुप्रीम कोर्ट ने प्राइवेट सेक्टर के कर्मचारियों की पेंशन में भारी वृद्धि का रास्ता साफ कर दिया है। सुप्रीम कोर्ट ने केरल हाईकोर्ट के उस फैसले को जारी रखा है, जिसमें EPFO से कहा गया था कि वह सभी कर्मचारियों को उनकी पूरी सैलरी के हिसाब से पेंशन दे। बृजेश ने कहा कि लगता है कि सरकार ने इस मामले में अपना पक्ष सही तरीके से सुप्रीम कोर्ट के समक्ष नहीं रखा। कहीं न कहीं चूक हुई है। सरकार को EPFO की वित्तीय स्थिति को सही तरीके से सुप्रीम कोर्ट के सामने रखना चाहिए था। यह भी बताना चाहिए कि न्यूनतम पेंशन 1,000 रुपये देने में ही EPFO को मुश्किल हो रही है। इसके लिए सरकार 1,200 करोड़ रुपये की सब्सिडी दे रही है।

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