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मनरेगा जैसी मास्टरस्ट्रोक साबित हो सकती है कांग्रेस की न्यूनतम आय योजना

चरणबद्ध तरीके से लागू होगी योजना, नहीं पड़ेगा अर्थव्यवस्था पर बोझः विशेषज्ञ  

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सौरभ कुमार वर्मा 

नई दिल्ली. कांग्रेस (Congress) ने लोकसभा चुनाव जीतने पर मनरेगा की तर्ज पर न्याय योजना लागू करने का ऐलान किया है। योजना के तहत देश के करीब 5 करोड़ गरीब परिवारों को सालाना 72 हजार रुपए (6 हजार रुपए प्रति माह) दिए जाएंगे। इसे चुनाव पूर्व कांग्रेस का मास्टर स्ट्रोक माना जा रहा है। हालांकि भाजपा इसे चुनावी प्रोपेगेंडा बताकर खारिज कर रहा है। लेकिन आर्थिक विशेषज्ञ एम. के. वेणु की मानें तो यह योजना पूरी तरह से जमीन पर लागू की जा सकती है। हालांकि योजना मनरेगा की तरह सफल रहेगी या नहीं, इसका जवाब उसके क्रियान्वयन पर भी निर्भर करेगा। 

 

कई चरणों में लागू हो योजना 

कांग्रेस की योजना से अर्थव्यवस्था पर 3.60 लाख करोड़ रुपए का बोझ पड़ने के सवाल पर वेणु बताते हैं कि योजना को चरणबद्ध तरीके से अगले 5 साल में लागू किया जाएगा। ऐसे में सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) पर इसका बहुत ज्यादा फर्क नहीं पड़ेगा। पहले साल पूरे 5 करोड़ गरीब परिवार को फायदा नहीं दिया जाएगा। मतलब पहले साल 40 से 50 लाख अति गरीब परिवारों को योजना का फायदा दिया जाएगा, जो कि एक पायलट प्रोजेक्ट की तरह होगा। अगले साल इन 50 लाख परिवारों के साथ 50 लाख नए परिवारों को योजना का फायदा मिलेगा। हर साल पुराने परिवारों की संख्या में नए परिवार जुड़ते चले जाएंगे। इस लिहाज से तीसरे साल 3 करोड़ और अगले दो साल में पूरे 5 करोड़ लोगों तक फायदा पहुंचाया जाएगा। शुरुआत में उन परिवारों को चुना जाएगा जाे बहुत ज्यादा गरीब हैं, इसके बाद हर साल कम गरीब परिवारों को योजना में शामिल किया जाएगा। 

 

अर्थव्यवस्था पर नहीं पड़ेगा बोझ 

वेणु ने मनी भास्कर को बताया कि योजना को इस तरह से लागू करने से अर्थव्यवस्था पर पहले साल ही 3.60 लाख करोड़ खर्च नहीं आएगा। उन्होंने बताया कि 3.60 लाख करोड़ रुपए देश की कुल जीडीपी का 2 प्रतिशत हिस्सा होता है। ऐसे में पहले ही साल वित्तीय घाटा 2 फीसदी तक नहीं बढ़ाया जा सकता है। अगर ऐसा होता है, तो शेयर मार्केट तबाह हो जाएगा। योजना से अर्थव्यवस्था पर पडने वाले 2 प्रतिशत वित्तीय घाटे को 5 साल तक लेकर जाया जाएगा। इससे पहले साल अर्थव्यवस्था 0.2 फीसदी का बोझ पड़ेगा, जबकि दूसरे साल 0.3 फीसदी और तीसरे साल भी 0.30 फीसदी बोझ पड़ सकता है।

    5 साल में अर्थव्यवस्था 100 से हो जाएगी 175

    अगर मान लिया जाए कि अगले पांच साल में देश की नॉमिनल जीडीपी 11 फीसदी के हिसाब (7 फीसदी वास्तिवक जीडीपी और 4 फीसदी इंफ्लेशन)  से बढ़ेगी, तो जीडीपी में करीब 75 फीसदी की बढ़ोत्तरी होगी। सीधे शब्दों में कहें, तो मान लीजिए आज जीडीपी 100 है, ऐसे में इस योजना से जीडीपी पर 2 रुपए खर्च आएगा। लेकिन जीडीपी में होने वाले 11 फीसदी इजाफे के हिसाब से 5 साल बाद जीडीपी 175 हो जाएगी। ऐसे में वित्तीय घाटा आधे से कम रह जाएगा। कांग्रेस ने संकेत दिया है कि अन्य वेलफेयर स्कीम्स को इसमें जोड़ा जा सकता है। इससे भी वित्तीय घाटे को कंट्रोल किया जा सकेगा। साथ ही कुछ चीजों में सब्सिडी को कम किया जा सकता है।

     

    सभी गरीबों को मिलेगा फायदा

    कांग्रेस की ओर से गरीबी हटाने की दिशा में मनरेगा के बाद फेज-2 के तौर पेश की जाने वाली मिनिमम इनकम गांरटी योजना एक बड़ा ऐलान मानी जा रही है। पीएम मोदी ने भले ही आज से दो साल पहले यूनिवर्सल बेसिक इनकम स्कीम का संकेत दिया हो, लेकिन इस मामले में बाजी मारी राहुल गांधी ने। माना जा रहा है कि कांग्रेस की इस योजना का असर काफी व्यापक होगा। ग्रामीण इलाकों से लेकर शहरी गरीब इस योजना के जद में आएंगे। 

     

     

    ऐसे लागू होगी योजना 

    1. योजना के तहत 20 फीसदी सबसे गरीब परिवरों को हर साल 72 हजार रुपए दिए जाएंगे। 
    2. यह रकम सीधे खाते में जाएगी। ऐसे गरीब परिवार जिनकी प्रति माह मिनिमम सैलरी 12 हजार रुपए से कम है। उन्हें योजना का लाभ मिलेगा। 
    3. मिनिमम इनकम की सीमा (12 हजार रुपए) और गरीब की कमाई का अंतर मिलेगा। यानी अगर किसी की आय 6 हजार रुपए है, तो उसे योजना के जरिए 6 हजार रुपए ही मिलेंगे।
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