विश्वविद्यालय के खाली 5000 पदों पर तत्काल प्रभाव से होगी भर्ती, प्रकाश जावडेकर ने दिए संकेत

Teachers vacancies in University: विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) ने विश्वविद्यालयों में खाली 5000 पदों को भरने की प्रक्रिया में तेजी दिखाते हुए सभी कॉलेजों को निर्देश जारी किया है। साथ ही साफ किया है कि आरक्षण रोस्टर का निर्धारण पहले की तरह विश्वविद्यालय या कालेजों को ही यूनिट मानकर किया जाएगा।

Money Bhaskar

Mar 10,2019 03:42:00 PM IST

नई दिल्ली. विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) ने विश्वविद्यालयों में खाली 5000 पदों को भरने की प्रक्रिया में तेजी दिखाते हुए सभी कॉलेजों को निर्देश जारी किया है। साथ ही साफ किया है कि आरक्षण रोस्टर का निर्धारण पहले की तरह विश्वविद्यालय या कालेजों को ही यूनिट मानकर किया जाएगा। इनमें कोई बदलाव नहीं होगा। सरकार की ओर यह अध्यादेश बीते गुरूवार को लाया गया था। जो राष्ट्रपति के हस्ताक्षर के बाद अगले दिन ही प्रभावी हो गया था।

इस वजह से रुकी थी भर्ती प्रक्रिया

खाली पदों पर भर्ती को लेकर विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) ने इसे लेकर सभी विवि और कालेजों को निर्देश जारी किया है। कुछ कॉलेजों ने पिछले दिनों इनमें से कुछ संस्थानों ने इन्हें भरने की प्रक्रिया शुरू भी की थी, लेकिन आरक्षण रोस्टर को लेकर उपजे विवाद के चलते सरकार ने इस पर रोक लगा दी थी। विश्वविद्यालय में आरक्षण रोस्टर को लेकर यह विवाद उस समय खड़ा हुआ, जब इलाहाबाद हाईकोर्ट ने अपने एक फैसले में विवि की जगह विभाग को यूनिट मानकर आरक्षण रोस्टर तैयार करने का निर्देश दिया। फैसले का विरोध करने वालों का कहना था कि कोर्ट के इस फैसले से एससी-एसटी और ओबीसी को विश्वविद्यालयों में सही प्रतिनिधित्व नहीं मिल पाएगा।

डेढ़ साल से रुकी पड़ी हैं भर्ती

विश्वविद्यालय में भर्ती की यह प्रक्रिया पिछले करीब डेढ साल से रुकी पड़ी हुई है। इलाहाबाद हाईकोर्ट के फैसले के बाद पैदा हुई इस स्थिति से निपटने के लिए सरकार ने हाईकोर्ट के फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी, लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार की याचिका को खारिज करते हुए इलाहाबाद हाईकोर्ट के फैसले को सही ठहराया। आखिरकार सरकार को इसे लेकर अध्यादेश लाना पड़ा, क्योंकि उसके पुनर्विचार याचिका खारिज हो जाने के बाद उसके पास कोई विकल्प बचा नहीं था।

शैक्षणिक कामकाज प्रभावित होने के चलते सरकार अध्यादेश लेकर आई

यूजीसी ने यह जल्दबाजी अध्यादेश को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती देने के बाद दिखाई है। उसका मानना है कि यदि इनमें ज्यादा देरी की गई तो यह मामला फंस सकता है। ऐसे में बगैर समय गंवाए वह खाली पदों को भर्ती का काम पूरा कर लेना चाहती है। उसकी इस तेजी के पीछे एक और बडी वजह जो है, वह यह है कि इसके चलते विश्वविद्यालय में पढ़ाई का काम प्रभावित हो रहा है।

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