समस्या /चीन के सस्ते रोबोट से भारत में बढ़ रही है बेरोजगारी

  • रोबोट के सस्ता होने से भारत की मझोली कंपनियां भी रोबोट लगाने में हो गई हैं सक्षम

Moneybhaskar.com

Oct 18,2019 01:54:05 PM IST

नई दिल्ली. चीन के सस्ते रोबोट के कारण भारत में मझोले आकार की कंपनियां भी फैक्टरियों में रोबोट लगाने में सक्षम हो गई हैं। लेकिन इसका साइड इफेक्ट यह हो रहा है कि वे कर्मचारियों की छंटनी कर रही हैं। करीब एक दशक पहले वियना की कंपनी विनरबर्गर ने एशिया में कारोबारी विस्तार करने का फैसला किया। विनरबर्गर दुनिया की सबसे बड़ी ईंट निर्माता कंपनी है। उसने प्लांट लगाने के लिए चीन की अपेक्षा भारत का चुना। उसने बेंगलुरु के पास 250 करोड़ रुपए में प्लांट लगाया। विनरबर्गर इंडिया के बिल्डिंग ब्लॉक प्लांट से खोखली ईंट के 70,000 ब्लॉक का उत्पादन हो रहा है, जो छह लाख पारंपरिक ईंटों के बराबर होती है। इस प्लांट की खासियत यह है कि इसमें बहुत कर्मचारी काम करते हैं। पूरा प्लांट रोबोट से चलता है। यह उदाहरण यह बताता है कि किस तरह से भारतीय कंपनियों में मशीनों का दबदबा बढ़ता जा रहा है। मशीनों के इस बढ़ते उपयोग से भारत में बेरोजगारी की समस्या और भी विकट होती जा रही है।

तीन दशक में कीमत घट कर आधी रह गई, 2025 तक 65 फीसदी और घटेगी कीमत

बिजनेस लाइन की एक रिपोर्ट के मुताबिक मैकिंसे की 2017 की एक रिपोर्ट बताती है कि गत तीन दशकों में औद्योगिक रोबोट की कीमत घटकर आधी रह गई है। एक अन्य कंपनी एआरके इनवेस्ट की एक रिपोर्ट बताती है कि 2025 तक कीमत में 65 फीसदी और गिरावट आ सकती है। कीमत में गिरावट का पूरा श्रेय चीन को जाता है। पारिश्रमिक में बढ़ोतरी के ट्रेंड से निजात पाने के लिए चीन ने अपनी मैन्यूफैक्चरिंग गतिविधियों को रोबोट से लैस करना शुरू किया। इससे रोबोट के विकास के काम को विस्तार मिला। आज चीन में हर साल करीब ढाई लाख रोबोट बन रहे हैं। जल्द ही इसमें चार गुने की बढ़ोतरी होने की उम्मीद है। चीन में रोबोट की बढ़ती मांग को देखते हुए जापान की कंपनी फैनक ने भी चीन में एक प्लांट लगा रही है, जो सिर्फ चीन के बाजार के लिए साल में 10 लाख रोबोट बनाएगी। चीन में रोबोट के बढ़ते उपयोग से कीमतों में आ रही गिरावट के कारण अब वहां के सस्ते रोबोट भारत की मझोली कंपनियों में भी आने लगे हैं।

क्या रोबोट इंस्टॉल करने का गणित

आज करीब 10 किलोग्राम वजन उठाने वाला एक रोबोट 25 लाख रुपए में आता है। इसे स्थापित करने में 25 लाख रुपए और खर्च हो जाते हैं। लेकिन 5-6 साल में यह रोबोट पूरा निवेश वापस कर देता है। इसे देखते हुए 100 करोड़ रुपए कमाने वाली एक मझोली कंपनी 50 लाख रुपए रोबोट पर खर्च कर सकती है।

अत्यधिक तेजी से बढ़ रहा है रोबोट का भारतीय बाजार

वर्ष 2012 से 2017 के बीच रोबोट का भारतीय बाजार हर साल 18 फीसदी की दर से बढ़ा। 2017 में इसमें 30 फीसदी का उछाल आया और 3,412 औद्योगिक रोबोट बिके। औद्योगिक रोबोट आज सस्ते भी होते जा रहे हैं और वे अधिक सक्षम और सुरक्षित भी होते जा रहे हैं। अभी भारत में हर 10,000 कर्मचारियों पर तीन रोबोट काम कर रहे हैं। जबकि दुनिया में यह औसत 74 है। दुनिया के सबसे अधिक रोबोटाइज्ड देश दक्षिण कोरिया में यह औसत 631 है।

तात्कालिक रूप से बढ़ रही है बेरोजगारी

रिपोर्ट के मुताबिक लंबे समय में रोबोट से रोजगार नहीं छिनेंगे, बल्कि रोजगार के रूप बदल जाएंगे। सैद्धांतिक तौर पर रोबोट से प्रतिस्पर्धा बढ़ती है। इससे कारोबार बढ़ता है। इससे अर्थव्यवस्था की संपत्ति बढ़ती है। इससे अंतत: रोजगार भी बढ़ता है। लेकिन यह असर लंबे समय में दिखता है। शुरू में तो बेरोजगारी में बढ़ोतरी दिखाई पड़ती है। यह चिंता का विषय है। पूर्व राजस्व सचिव एमआर शिवरमण का कहना है कि यह अनुमान लगा लिया जाना चाहिए कि रोबोट के कारण बेरोजगारी में कितनी बढ़ोतरी हो रही है और उसके अनुरूप रोबोट पर टैक्स लगाया जाना चाहिए। कई विशेषज्ञ सामाजिक सुरक्षा तंत्र को मजबूत करने की भी वकालत करते हैं।

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