मनी भास्कर खास /नई औद्योगिक नीति में छोटे उद्यमियों के लिए विशेष सुविधा, एक सप्ताह में शुरू कर सकेंगे उत्पादन

  • रोजगारपरक निर्यात क्षेत्र को निर्यात पर नहीं बल्कि उत्पादन के आधार पर मिलेगी सब्सिडी
  • नई औद्योगिक नीति का पूरा फोकस एमएसएमई व निर्यात पर
  • नई सरकार के गठन के तुरंत बाद घोषणा हो सकती है नई नीति की

Money Bhaskar

May 22,2019 02:27:52 PM IST

मनी भास्कर। नई दिल्ली.

नई औद्योगिक नीति में सरकार छोटे उद्यमियों को प्लग एंड प्ले सुविधा देने जा रही है। इसके तहत छोटे उद्यमी एक सप्ताह में उत्पादन आरंभ कर सकेंगे। नई औद्योगिक नीति में सरकार रोजगारपरक निर्यात क्षेत्र को उनके उत्पादन के आधार पर सब्सिडी देने का भी प्रावधान ला रही है। उत्पादन के आधार पर निर्यातकों को सब्सिडी देने से विश्व व्यापार संगठन (डब्ल्यूटीओ) भी आपत्ति नहीं कर पाएगा। अभी निर्यातकों को निर्यात के आधार पर सब्सिडी देने पर डब्ल्यूटीओ लगातार आपत्ति दर्ज करा रहा है। नई औद्योगिक नीति अगले महीने यानी कि नई सरकार के गठन होते ही घोषित की जा सकती है। पिछले सप्ताह वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय में नई औद्योगिक नीति को लेकर अंतिम चर्चा की गई।

मैन्युफैक्चरिंग को प्रोत्साहित करना नई औद्योगिक नीति का प्रमुख लक्ष्य है

वाणिज्य मंत्रालय सूत्रों के मुताबिक मैन्युफैक्चरिंग को प्रोत्साहित करने के लिए सरकार नए उद्यमियों को प्लग एंड प्ले सुविधा देगी। अभी नई यूनिट आरंभ करने में 2 से 5 साल का समय लग जाता है। प्लग एंड प्ले सुविधा के तहत अगर किसी उद्यमी के पास ऑर्डर हैं तो वह एक सप्ताह में उत्पादन आरंभ कर सकेगा। प्लेग एंड प्ले के तहत उत्पादन आरंभ करने सारी सुविधाएं पहले से तैयार रहेंगी। मशीनें भी किराए पर मिल जाएंगी। उद्यमी अपने उत्पादन के मुताबिक मशीन किराए पर लेकर उत्पादन कर सकेंगे। मंत्रालय सूत्रों के मुताबिक प्लग एंड प्ले मॉडल के तहत इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार करने का काम निजी व सार्वजनिक दोनों ही क्षेत्र करेंगे। एक ही जगह पर हर प्रकार के आइटम के उत्पादन की सुविधा होगी।

छोटे उद्यमियों को मिलेगा लाभ

फेडरेशन ऑफ इंडियन स्मॉल मीडियम इंटरप्राइजेज (फिस्मे) के वरिष्ठ पदाधिकारी देबाशीष ने बताया कि मैन्युफैक्चरिंग आरंभ करने से पहले विभिन्न प्रकार के झंझटों से बचने के लिए पिछले कई सालों से नई यूनिट काफी कम संख्या में लग रही है। उन्होंने बताया कि प्लग एंड प्ले मॉडल चीन में काफी सफल रहा है और भारत के छोटे उद्यमियों को भी इससे काफी लाभ मिलेगा।

रोजगारपरक निर्यात पर फोकस

नई औद्योगिक नीति में छोटे उद्यमियों के साथ रोजगारपरक निर्यात में बढ़ोतरी के प्रावधान किए गए हैं। सूत्रों के मुताबिक लेदर, टेक्सटाइल, जेम्स ज्वैलरी, इंजीनियरिंग गुड्स जैसे रोजगारपरक निर्यात क्षेत्र को अब उत्पादन स्तर पर ही विभिन्न प्रकार के इंसेंटिव दिए जाएंगे। इसके अलावा क्लस्टर स्तर पर भी निर्यातकों को इंसेंटिव दिए जा सकते हैं। उदाहरण के लिए भदोही में कार्पेट का क्लस्टर है या तिरुपुर में गारमेंट का क्लस्टर है तो वहां से होने वाले निर्यात पर नहीं बल्कि उस क्लस्टर को ही इंसेंटिव दे दिया जाएगा। फेडरेशन ऑफ इंडियन एक्सपोर्ट आर्गेनाइजेशंस (फियो) के महानिदेशक व सीईओ अजय सहाय ने बताया कि सरकार के इस कदम से निर्यात की वैश्विक प्रतिस्पर्धा क्षमता बढ़ेगी और निर्यात को अप्रत्यक्ष तौर पर इंसेंटिव भी मिलते रहेंगे। वाणिज्य मंत्रालय के मुताबिक 1991 की औद्योगिक नीति में औद्योगिक लाइसेंसिंग व विदेशी निवेश को मुख्य थीम के रूप में रखा गया था। नई औद्योगिक नीति में एसएमई व निर्यात प्रोत्साहन को मुख्य थीम के रूप में शामिल किया गया है।

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