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    फॉक्‍सकॉन, लावा समेत मोबाइल कंपनि‍यों ने घटाया प्रोडक्‍शन, वर्कर्स की छंटनी शुरू

     
    नई दि‍ल्‍ली। देश में अचानक 500 रुपए और 1000 रुपए के नोटों को बंद कि‍ए जाने से मोबाइल हैंडसेट मैन्‍युफैक्‍चरर्स को झटका लगा है। इसकी वजह से सरकार के मेक इन इंडि‍या प्रोजेक्‍ट को भी नुकसान हो रहा है। मोबाइल फोन की सेल 50 फीसदी कम होने की वजह से दुनि‍या की सबसे बड़ी कॉन्‍ट्रैक्‍ट मैन्‍युफैक्‍चरर फॉक्‍सकॉन ने 20 फीसदी कर्मचारि‍यों को पेड लीव पर भेज दि‍या है। कंपनी के भारत में 8,000 फैक्‍ट्री वर्कर्स हैं। इसके अलावा, डोमेस्‍टि‍क मोबाइल कंपनि‍यां जैसे लावा, इंटैक्‍स और कार्बन भी अपना प्रोडक्‍शन और वर्कर्स की संख्‍या में कटौती कर रहे हैं।
     
    तेजी से घटी मोबाइल फोन की सेल
     
    सरकार की ओर से पुराने नोटों को बंद कि‍ए जाने के बाद मोबाइल फोन इंडस्‍ट्री को तगड़ा झटका लगा है। यहां ज्‍यादातर मोबाइल फोन 5,000 रुपए से कम कीमत वाले हैं और अधि‍कांश ट्रांजैक्‍शन कैश के जरि‍ए होता है। कंज्‍यूमर पर्चेज पावर तेजी से कम हुई है। नोट बंदी के बाद मोबाइल फोन की मासि‍ल सेल 200 करोड़ रुपए तक कम हुई है।
     
    वर्कफोर्स को कम कर रही हैं कंपनि‍यां
     
    लावा, कार्बन समेत दूसरी डोमेस्‍टि‍क कंपनि‍यां 10 फीसदी से 40 फीसदी तक अपने वर्कफोर्स को बैठाने या उन्‍हें बाहर नि‍कालने की प्‍लानिंग कर रहे हैं। कंज्‍यूमर्स के साथ रि‍टेल चैनल्‍स में इन्‍वेंटरी बढ़ रही है जि‍सकी वजह से प्रोडक्‍शन को घटाया गया है। लोगों ने 8 नवंबर के बाद से लोगों ने कैश में खरीदारी को टाल दि‍या है।
     
    सूत्रों के मुताबि‍क, लावा अपने प्‍लांट को बंद कर रही है। कंपनी के पास करीब 5,000 कर्मचारी हैं। लावा के अलावा दूसरी कंपनि‍यां भी ऐसा कदम उठा सकती हैं। एक्‍सपर्टस का कहना है कि‍ फॉक्‍सकॉन जो कि‍ चीन के शाओमी, ओपो और जि‍योनी के अलावा इनफोकस और नोकि‍या के साथ-साथ लावा, इंटेक्‍स, कार्बन और माइक्रोमैक्‍स के लि‍ए डि‍वाइस बनाती है। भारत में इनके करीब 50 फीसदी हैंडसेट असेंबल होते हैं।  
     
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