अर्थव्यवस्था /मैन्यूफैक्चरिंग सेक्टर में 20 माह में पहली बार वेतनभोगी कर्मचारियों की छंटनी

  • पीएमआई सर्वेक्षण के मुताबिक नवंबर में मैन्यूफ‌ैक्चरिंग सेक्टर में मामूली तेजी रही
  • मार्च 2018 के बाद पहली बार कर्मचारियों की संख्या घटी है

Moneybhaskar.com

Dec 02,2019 06:42:39 PM IST

नई दिल्ली. प्रतिस्पर्धा के दबाव और अस्थिर बाजार परिस्थितियों के बीच नए ठेकों और उत्पादन में सुस्त बढ़ोतरी के बीच नवंबर में मैन्यूफैक्चरिंग सेक्टर में मामूली बढ़ोतरी दर्ज की गई। इस बीच सुस्त बिक्री के कारण कंपनियों ने नई भर्ती नहीं की, उल्टे 20 महीने में पहली बार उन्होंने वेतनभोगी कर्मचारियों की छंटनी कर दी। मार्च 2018 के बाद पहली बार कर्मचारियों की संख्या में गिरावट दर्ज की गई है। यह बात सोमवार को जारी मासिक पीएमआई सर्वेक्षण में कही गई है। अक्टूबर में मैन्यूफैक्चरिंग सेक्टर का सूचकांक दो साल के निचले स्तर 50.6 पर रहा था, जो नवंबर में बढ़कर 51.2 पर पहुँच गया। सूचकांक का 50 से ऊपर होना वृद्धि को और 50 से कम रहना गिरावट को दर्शाता है, जबकि इसका 50 पर रहना स्थिरता का परिचायक है।

मांग में गिरावट के कारण सुस्ती की गिरफ्त में है मैन्यूफैक्चरिंग सेक्टर

आईएचएस मार्किट की प्रधान अर्थशास्त्री पॉलियाना डी लीमा ने कहा कि नवंबर में मैन्यूफैक्चरिंग सेक्टर की गतिविधियों में हालांकि बढ़ोतरी दर्ज की गई है। लेकिन नए ऑर्डर, उत्पादन और निर्यात में बढ़ोतरी की रफ्तार 2019 की शुरुआत में दर्ज की गई रफ्तार से काफी कम है। रफ्तार में यह सुस्ती मुख्यत: मांग में गिरावट के कारण दर्ज की गई है।

सेवानिवृत्त कर्मचारियों की जगह नहीं हुई नई बहाली

सर्वेक्षण रिपोर्ट में कहा गया है कि मार्च 2018 में पहली बार कर्मचारियों की संख्या में गिरावट दर्ज की गई है। कई कंपनियों ने कहा कि मौजूदा कर्मचारी ही काम-काज को निपटा रहे हैं। कुछ अन्य कंपनियों ने कहा कि सेवानिवृत्त हो चुके कर्मचारियों की जगह नई बहाली नहीं की गई है। कुछ कंपनियों ने कहा कि उन्होंने अंशकालिक कांट्रैक्ट का नवीनीकरण नहीं किया है। रिपोर्ट के मुताबिक नवंबर में कारोबारी माहौल में सुधार दर्ज किया गया। हालांकि फ्यूचर आउटपुट इंडेक्स औसत से काफी नीचे है। इसका कारण यह है कि कई कंपनियां अर्थव्यवस्था की स्थिति को लेकर चिंतित हैं। महंगाई के मोर्चे पर नवंबर में इनपुट लागत और उत्पादन कीमत दोनों में मामूली बढ़ोतरी दर्ज की गई।

आरबीआई की मुख्य ब्याज दर घटने की उम्मीद

लीमा ने कहा कि आंकड़े बताते हैं कि मैन्यूफैक्चरिंग सेक्टर में महंगाई का दबाव नहीं है। इसके साथ ही विकास दर कम रहने के कारण यह उम्मीद है कि भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) मौद्रिक नीति में नरमी का रुख बनाए रखेगा और अपनी मौद्रिक नीति समीक्षा में मुख्य ब्याज दर में फिर कटौती करेगा। आरबीआई अपनी मौद्रिक नीति समीक्षा की घोषणा पांच दिसंबर को करेबा और बाजार को उम्मीद है कि वह लगातार छठी बार अपनी मुख्य ब्याज दरों में कटौती करेगा। क्योंकि विकास दर छह साल से अधिक के निचले स्तर पर पहुंच गई है। चालू वित्त वर्ष की दूसरी तिमाही में विकास दर और घटकर 4.5 फीसदी दर्ज की गई, जो पहली तिमाही में पांच फीसदी थी।

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