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मनी भास्कर खास /मुंबई से लेकर दिल्ली-एनसीआर में बनेंगे ज्वैलर्स पार्क

  • आधुनिक सुविधाओं से लैस होगा पार्क, निकलेंगी हजारों नई नौकरियां

Moneybhaskar.com

Oct 28,2019 03:48:26 PM IST

नई दिल्ली। जेम्स व ज्वेलरी निर्यात को बढ़ावा देने के लिए मुंबई समेत देश के कई शहरों में ज्वेलरी पार्क खोलने की तैयारी है। इन पार्क में कई सौ ज्वेलरी यूनिट होंगी। ज्वैलर्स की सुविधा के लिए पार्क में कई आधुनिक मशीन लगाई जाएंगी ताकि ज्वेलरी निर्माण की लागत कम हो सके और भारतीय ज्वैलरी अंतरराष्ट्रीय बाजार में प्रतिस्पर्धा कर सके। इस प्रकार का सबसे पहला पार्क मुंबई में बनेगा। फिर दिल्ली-एनसीआर एवं बंगलुरू जैसे शहरों में बनाने की योजना है।


25 लाख नई नौकरियों के सृजन का है लक्ष्य

जेम्स एंड ज्वेलरी एक्सपोर्ट प्रमोशन काउंसिल के चेयरमैन पी.के. अग्रवाल ने मनी भास्कर को बताया कि जेम्स व ज्वेलरी के निर्यात को 2025 तक 75 अरब डॉलर तक ले जाने का लक्ष्य रखा गया है। ताकि इस क्षेत्र में 25 लाख नई नौकरियों का सृजन हो सके। इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए काउंसिल सरकार के सहयोग से कई योजनाएं बना रही है। ज्वैलरी पार्क का निर्माण भी उन्हीं योजनाओं में से एक हैं। उन्होंने बताया कि मुंबई में जो पार्क बनाए जाएंगे, वहां 2000 यूनिट लगाने की योजना है। वैसे ही, दिल्ली के कूंचा महाजनी सर्राफा बाजार को ज्वैलरी पार्क के रूप में विकसित किया जा सकता है। इन पार्क में ज्वेलरी डिजायन से लेकर इसकी शुद्धता जांच एवं अन्य कई प्रकार की आधुनिक मशीन होगी ताकि ज्वेलरी के काम की लागत को कम किया जा सके। ज्वेलरी पार्क के खुलने के बाद निर्यात में 6-8 अरब डॉलर की बढ़ोतरी की उम्मीद की जा रही है। निर्यात में इजाफा के लिए नए-नए क्लस्टर खोलने की भी तैयारी चल रही है।

चालू वित्त वर्ष में ज्वैलरी निर्यात में गिरावट की आशंका

अग्रवाल ने बताया कि अमेरिका एवं अन्य देशों से ज्वेलरी मांग में बढ़ोतरी की उम्मीद की जा रही है, लेकिन चालू वित्त वर्ष 2019-20 में जेम्स व ज्वैलरी निर्यात में 5-7 फीसदी की गिरावट हो सकती है। उन्होंने बताया कि चालू वित्त वर्ष की पहली छमाही में जेम्स व ज्वेलरी निर्यात में पिछले वित्त वर्ष की समान अवधि के मुकाबले 7 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई है। चालू वित्त वर्ष की तीसरी तिमाही एवं आखिरी तिमाही में निर्यात बढ़ने की उम्मीद की जा रही है क्योंकि रफ हीरे के आयात में होने वाली गिरावट कम हो गई है। मतलब लोगों ने कच्चा माल मंगाना शुरू कर दिया है जो इस बात का संकेत है कि फिर से अंतरराष्ट्रीय मांग में तेजी आ रही है।

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