प्रस्ताव /भारत में तेल बेच सकेंगी विदेशी कंपनियां, सरकार दे सकती है बड़ी राहत

  • तेल मंत्रालय खत्म कर सकता है दो दशक पुराने नियम को
     

Moneybhaskar.com

Aug 07,2019 01:39:11 PM IST

नई दिल्ली. जल्द ही सऊदी अरब की अरामको के अलावा टोटल और ट्रैफिग्युरा जैसी कई विदेशी कंपनियां और सुपरमार्केट चेन्स भी भारत में तेल बेच सकेंगी। केंद्र सरकार इस मामले में बड़ा बदलाव करने जा रही है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, तेल मंत्रालय इस संबंध में तकरीबन दो दशक पुराने एक नियम को खत्म करने के बारे में विचार कर रहा है। जल्द ही इसका प्रस्ताव भी पेश किया जाएगा।

क्या कहता है यह नियम

इस नियम के मुताबिक, देश में सिर्फ वही कंपनियां पेट्रोल, डीजल और हवाई जहाज के ईंधन की मार्केटिंग कर सकती हैं, जिन्होंने तेल की खोज, उसके उत्पादन, उसकी रिफाइनिंग, पाइपलाइन या टर्मिनल लगाने के लिए देश में 2000 करोड़ रुपए निवेश किए हों या जिन्होंने इतनी रकम निवेश करने का प्रस्ताव दिया हो। इस नियम को बदलने के प्रस्ताव पर तेल मंत्रालय विचार कर रहा है। इसके लिए वित्त मंत्रालय, वाणिज्य मंत्रालय और कानून मंत्रालय से भी सलाह ली जा रही है।

सरकारी समिति की सिफारिशों पर भी दिया जा रहा ध्यान

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, तेल मंत्रालय ने इस प्रस्ताव में एक सरकारी समिति की सिफारिशों को भी शामिल किया है। इस समिति को ट्रांसपोर्ट फ्यूल मार्केटिंग का लाइसेंस देने की 2002 की गाइडलाइंस की समीक्षा करने के लिए मार्च में गठित किया गया था। समिति ने मई के अंत में अपनी रिपोर्ट सौंपी थी, जिसमें समिति ने सुझाव दिया था कि देश में तेल बेचने के लिए कंपनियों पर लगाई गई मिनिमम इन्वेस्टमेंट शर्त को हटा दिया जाए। इसकी जगह पर किसी कंपनी को लाइसेंस देने के लिए मिनिमम नेटवर्थ की शर्त जोड़ने की बात कही थी। समिति ने ऑयल सेलिंग मार्केट को नॉन-ऑयल कंपनियों के लिए खोलने, पेट्रोल पंप लगाने के लिए टाइमलाइन बनाने और इसका पालन नहीं करने वालों पर जुर्माना लगाने का भी सुझाव दिया था।

कंपनियों के लिए बाधा रहा है यह नियम

न्यूनतम निवेश का नियम भारत में तेजी से बढ़ते फ्यूल मार्केट में उतरने की चाहत रखने वाली विदेशी कंपनियों के लिए बड़ा बैरियर रहा है। ऐसे में सऊदी की अरामको, फ्रांस की टोटल और ऑयल ट्रेडर ट्रैफिग्युरा को लाइसेंस रूल में बदलाव का तुरंत फायदा हो सकता है। पेट्रोल, डीजल और जेट फ्यूल की डिमांड 2018-19 में क्रमश: 8 फीसदी, 3 और 9 फीसदी बढ़ी थी। ऐसे में इन कंपनियों के पास भारतीय तेज बाजार में उतरकर अपनी जगह बनाने का बेहतर मौका है।

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