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    इलेक्‍ट्रॉनिक मैन्‍युफैक्‍चरिंग को प्रमोट करने के लिए 10 हजार करोड़ का इन्‍सेटिव देगी सरकार, कैबिनेट का फैसला

    नई दिल्‍ली. केंद्रीय कैबिनेट ने इलेक्‍ट्रॉनिक सेक्‍टर में मैन्‍युफैक्‍चरिंग को प्रमोट करने के लिए मॉडिफाइड स्‍पेशल इन्‍सेंटिव पैकेज स्‍कीम (एम-एसआईपीएस) में संशोधन को मंजूरी दे दी है। इसके तहत सरकार 10 हजार करोड़ रुपए का इन्‍सेंटिव देगी। यह स्‍कीम 18 मार्च 2017 तक के लिए होगी। पीएम नरेंद्र मोदी की अध्‍यक्षता में बुधवार को हुई कैबिनेट मीटिंग में यह फैसला हुआ। इस फैसले से देश के इलेक्‍ट्रॉनिक सिस्‍टम डिजाइन एंड मैन्‍युफैक्‍चरिंग सेक्‍टर में इन्‍वेस्‍टमेंट बढ़ाने के साथ-साथ बड़े पैमाने पर जॉब्‍स पैदा करने और इम्‍पोर्ट पर निर्भरता कम करने में मदद मिलेगी। सरकार ने 2020 तक इलेक्‍ट्रॉनिक्‍स में ‘नेट जीरो इम्‍पोर्ट’ का लक्ष्‍य रखा है।
     
     
    - कैबिनेट के फैसले के बाद कानून मंत्री रविशंकर प्रसाद ने बताया कि इलेक्‍ट्रॉनिक सेक्‍टर में मैन्‍युफैक्‍चरिंग को प्रमोट करने के लिए इन्‍सेंटिव स्‍कीम को मार्च 2018 तक के लिए कर दिया गया है।
    - प्रसाद ने बताया कि अबतक इस स्‍कीम के तहत 243 अप्‍लीकेशन मिल चुके हैं। इनमें से 75 अप्‍लीकेशन को मंजूरी मिल चुकी है और इनमें 17,997 करोड़ रुपए का इन्‍वेस्‍टमेंट प्रपोजल है।
    - इस स्‍कीम के तहत सभी राज्‍य और जिले कवर किए गए हैं। उन्‍हें इलेक्‍ट्रॉनिक मैन्‍युफैक्‍चरिंग में इन्‍वेस्‍टमेंट आकर्षित करने के लिए अवसर उपलब्‍ध कराया जाएगा।
     
     
    स्‍कीम में क्‍या हुए हैं संशोधन-  
    - एम-एसआईपीएस स्‍कीम के तहत अप्‍लीकेशन 31 मार्च 2018 या 10 हजार करोड़ रुपए के इन्‍सेंटिव कमिटमेंट तक (जो भी पहले हो) स्‍वीकार किए जाएंगे। 10 हजार करोड़ रुपए के इन्‍सेंटिव कमिटमेंट के मामले में आगे के फाइनेंशियल कमिटमेंट के लिए रिव्‍यू किगा जाएगा। 
    - नए अप्रूवल के लिए स्‍कीम के तहत इन्‍सेंटिव प्रोजेक्‍ट मंजूर होने की तारीख तक उपलब्‍ध होगा। न कि अप्‍लीकेशन प्राप्‍त होने की तारीख तक।
    - प्रोजेक्‍ट की मंजूरी की तारीख से 5 साल तक किए गए इन्‍वेस्‍टमेंट के लिए इन्‍सेंटिव उपलब्‍ध होगा।
    - कम्‍प्‍लीट अप्‍लीकेशन जमा करने के 120 दिन के भीतर आम तौर पर पात्र अप्‍लीकेंट्स को अप्रूवल मिल जाएगा।
    - स्‍कीम के तहत इन्‍सेंटिव लेने वाली यूनिट को कम से कम तीन साल के लिए कॉमर्शियल प्रोडक्‍टशन जारी रखने की अंडरटेकिंग देनी होगी।
    - प्रोजेक्‍ट के अप्रूवल की सिफारिश करने वाली अप्रैजल कमिटी के अध्‍यक्ष सेक्रेटरी, मिनिस्‍ट्री ऑफ इलेक्‍ट्रॉनिक्‍स एंड आईटी होंगे।
    - 6850 करोड़ रुपए से अधिक के मेगा प्रोजेक्‍ट के मामले को कैबिनेट सेक्रेटरी की अध्‍यक्षता में नीति आयोग के सीईओ, सेक्रेटरी- एक्‍सपेंडिचर और सेक्रेटरी- मिनिस्‍ट्री ऑफ इलेक्‍ट्रॉनिक्‍स एंड आईटी वाली एक अलग कमिटी देखेगी। 
     
     
    जुलाई 2012 में अप्रूव हुई थी स्‍कीम
    - कैबिनेट ने जुलाई 2012 में इलेक्‍ट्रॉनिक सिस्‍टम डिजाइन एंड मैन्‍युफैक्‍चरिंग सेक्‍टर में बड़े पैमाने पर मैन्‍युफैक्‍चरिंग को प्रमोट करने के लिए एम-एसआईपीएस को मंजूरी दीथी।
    - इस स्‍कीम में कैपिटल एक्‍सपेंडिचर पर सब्सिडी उपलब्‍ध कराई जाती है। इसके तहत सेज में इन्‍वेस्‍टमेंट के लिए 20 फीसदी और नॉन सेज में 25 फीसदी सब्सिडी का प्रावधान था।
    - इस स्‍कीम को अधिक आकर्षक और प्रक्रियाओं को आसान बनाने के लिए इसमें अगस्‍त 2015 में संशोधन किया गया।  
    - इस स्‍कीम के तहत 1.26 लाख करोड़ रुपए का इन्‍वेस्‍टमेंट प्रपोजल आया है। इसमें 17,997 करोड़ रुपए के प्रपोजल अप्रूव हो चुका है।
    - सरकार का कहना है कि एम-एसआईपीएस का इलेक्‍ट्रॉनिक सेक्‍टर में इन्‍वेस्‍टमेंट का पॉजिटिव इम्‍पैक्‍ट होगा।  
     
     

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