मैन्युफैक्चरिंग /प्लास्टिक बैग पर बैन लगने से जूट बैग की बढ़ी मांग, जूट इंडस्ट्री को मिला बूस्ट

  • न सिर्फ सरकार बल्कि टेस्को और मुजी जैसे ग्लोबल रिटेलर्स भी जूट के थैलों की डिमांड कर रहे हैं
  • जूट बैग मैन्युफैक्चरिंग यूनिट्स को सरकार से अपील करनी पड़ रही है कि जूट बैग के और ऑर्डर न दें

Moneybhaskar.com

Nov 04,2019 04:32:31 PM IST

नई दिल्ली. पर्यावरण को बचाने के लिए भारत ही नहीं पूरी दुनिया प्लास्टिक के इस्तेमाल पर पाबंदी लगा रही है। इसका फायदा गोल्ड फाइबर कहे जाने वाले जूट को मिल रहा है। जूट मिलों को बड़ी मात्रा में ऑर्डर मिल रहे हैं। न सिर्फ सरकार बल्कि टेस्को और मुजी जैसे ग्लोबल रिटेलर्स भी जूट के थैलों की डिमांड कर रहे हैं। हालात यह है कि जूट बैग बनाने वाली यूनिट्स को सरकार से अपील करनी पड़ी है कि जूट बैग के और ऑर्डर न दें।

क्षमता से ज्यादा मिल रहे हैं ऑर्डर

बिजनेस स्टैंडर्ड की खबर के मुताबिक, बिरला कॉरपोरेशन की यूनिट बिरला जूट मिल्स 20 लाख जूट थैलों का ऑर्डर पूरा करने के लिए अपनी क्षमता बढ़ाने पर काम कर रही है। बिरला जूट मिल्स के असिसटेंट वाइस प्रेसिडेंट आदित्य शर्मा ने बताया, 'हमने पिछले साल यह यूनिट शुरू की है और हमारी क्षमता महीने में 1,50,000 बैग बनाने की है। दो महीने के अंदर हम नए स्थान पर इतनी ही क्षमता वाली एक और यूनिट शुरू करने जा रहे हैं।' बिरला जूट मिल्स के पास पहले से काम का इतना दबाव हो गया है कि उसने सरकार से कहा है कि और ऑर्डर न दें।

बढ़ रहा जूट उत्पादों का निर्यात

बड़ी जूट मिल्स में से एक ग्लोस्टर ने हाल ही में कोलकाता के पास 70 एकड़ जमीन खरीदी है, जहां पर कंपनी 200 करोड़ रुपए में अपनी तरह की एकलौती जूट मैन्युफैक्चरिंग यूनिट सेट करेगी। इसकी क्षमता रोजाना 100 टन जूट को प्रोसेस करने की होगी। जूट बैग मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में ग्रोथ के पीछे शॉपिंग बैग्स की बढ़ती मांग प्रमुख वजह है। 2013-14 में जूट बैग्स का निर्यात 3 करोड़ से बढ़कर वित्त वर्ष 2019 में 5.6 करोड़ रुपए हो गया है।

घरेलू तौर पर भी बढ़ी मांग

भारतीय जूट मिल्स असोसिएशन के पूर्व चेयरमैन और जूट मिल के मालिक संजय कजारिया ने बताया कि जूट बैग्स की बढ़ती डिमांड के चलते कुल जूट उत्पादन क्षमता में 15 फीसदी की बढ़ोतरी की जा रही है। सिंगल यूज प्लास्टिक पर बैन जूट की मांग बढ़ने के पीछे सबसे बड़े कारणों में शामिल है। आठ जूट मिलों की वाले कोलकाता आधारित सारदा ग्रुप के मालिक घनश्याम सारदा ने बताया कि सिर्फ विदेश में ही नहीं, बल्कि घरेलू तौर पर भी रिटेलर्स और दुकानदार जूट बैगों की तरफ मुड़ रहे हैं। कस्टमर्स भी रियूजेबल बैग्स का इस्तेमाल कर रहे हैं।

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