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मोदी सरकार ने पेपर इंडस्ट्री को किया खुश, ओपन ट्रेड पॉलिसी पर बिना पूछे नहीं लेगी फैसला 

कारोबारियों की खुशी के लिए मोदी सरकार दे रही है तोहफे 

Modi Govt assure paper industry: No open trade without consent

New assurance to industry of Modi govt

तीन राज्यों में विधानसभा चुनाव हारने के बाद और इस साल आम चुनाव को देखते हुए मोदी सरकार कारोबारियों को खुश करने के लिए लगातार कोई न कोई घोषणा कर रही है। शुक्रवार को सरकार ने पेपर इंडस्ट्री से जुड़े कारोबारियों को खुश किया। केन्द्रीय वाणिज्य, उद्योग एवं नागर विमानन मंत्री सुरेश प्रभु ने देश के पेपर उद्योग को मुक्त व्यापार संधियों (एफटीए) के कारण प्रभावित हो रहे हित पर ध्यान देने का आश्वासन देते हुये शुक्रवार को यहां कहा कि घरेलू उद्योगों की कीमत पर कोई भी समझौता नहीं किया जायेगा। 

नई दिल्ली. तीन राज्यों में विधानसभा चुनाव हारने के बाद और इस साल आम चुनाव को देखते हुए मोदी सरकार कारोबारियों को खुश करने के लिए लगातार कोई न कोई घोषणा कर रही है। शुक्रवार को सरकार ने पेपर इंडस्ट्री से जुड़े कारोबारियों को खुश किया। केन्द्रीय वाणिज्य, उद्योग एवं नागर विमानन मंत्री सुरेश प्रभु ने देश के पेपर उद्योग को मुक्त व्यापार संधियों (एफटीए) के कारण प्रभावित हो रहे हित पर ध्यान देने का आश्वासन देते हुये शुक्रवार को यहां कहा कि घरेलू उद्योगों की कीमत पर कोई भी समझौता नहीं किया जायेगा। 

 

डोमेस्टिक मैन्युफैक्चरिंग पर फोकस 

प्रभु ने यहां इंडियन पेपर मैन्यूफैक्चरर्स एसोसिएशन (आईपीएमए) के 19वें वार्षिक सम्मेलन को संबोधित करते हुये कहा कि पेपर इंडस्ट्री देश के महत्वपूर्ण उद्योगों में से है। इस क्षेत्र में डोमेस्टिक मैन्युफैक्चरिंग बढ़ाने के लिए सरकार हरसंभव प्रयास कर रही है। अन्य देशों के साथ व्यापार समझौतों में भी यह ध्यान रखा जाएगा कि घरेलू उद्योगों के हित प्रभावित नहीं हो। 

 

कारोबारियों से सलाह लेगी सरकार 
उन्होंने कहा कि सरकार घरेलू स्तर पर कागज विनिर्माण सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध है। किसी अन्य देश से मुक्त व्यापार समझौता (एफटीए) करने से पहले इस उद्योग से जुड़े लोगों से विमर्श किया जाएगा। डोमेस्टिक मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ावा देना उनकी व्यापार नीति की प्राथमिकताओं में है। उन्होंने पेपर उद्योग की चुनौतियों का उल्लेख करते हुये कहा कि सरकार खुद कागज उद्योग के बड़े ग्राहकों में से एक है। इसलिए वह इस उद्योग की मुश्किलों को समझते हैं। 

 

बढ़ रही है कागज की खपत 
आईपीएमए के अध्यक्ष सौरभ बांगड़ ने कहा कि पेपर उपभोग के मामले में भारत सबसे तेजी से बढ़ता हुआ बाजार है। पिछले 10 साल में यहां कागज की खपत करीब दोगुनी हो गई है। वर्ष 2007-08 में कागज की खपत 90 लाख टन थी, जो 2017-18 में बढ़कर 1.7 करोड़ टन पपर पहुंच गई। वर्ष 2019-20 तक खपत दो करोड़ टन होने का अनुमान है। 

 

पेड़ों का नहीं हो रहा है इस्तेमाल 
आईपीएमए के नये निर्वाचित अध्यक्ष ए एस मेहता ने कहा कि कागज निर्माण में पेड़ों का इस्तेमाल होने के भ्रम को तोड़ा गया है और यहां कागज उद्योग वन आधारित नहीं, बल्कि कृषि आधारित है। किसानों द्वारा खेतों में उगाए गए विशेष पेड़ों से कागज उद्योग के लिए कच्चा माल मिलता है। उद्योग की जरूरत के लिए करीब नौ लाख हेक्टेयर का वानिकीकरण किया गया है। उद्योग की जरूरत का 90 फीसदी कच्चा माल उद्योग प्रायोजित वानिकीकरण से मिलता है। इससे करीब पांच लाख किसानों को रोजगार मिला है। 
 

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