भारत में हर 10 में से 7 लोगों का होता डाटा चोरी, ये है बड़ी वजह

  • व्यक्तिगत सुरक्षा को खतरा और निजता को लेकर समस्या पैदा हो सकती है

Money Bhaskar

Apr 12,2019 04:07:00 PM IST

नई दिल्ली। भारत में पुराने मोबाइल व अन्य कोई संग्रहण उपकरण (स्टोरेज डिवाइसेस) बदलने पर 10 में सात लोगों को डाटा चोरी का खतरा और निजता को लेकर चिंता बनी रहती है। यह बात हालिया एक रिपोर्ट में सामने आई है। डाटा की सुरक्षा मामले की विशेषज्ञ कंपनी स्टेलर इन्फॉर्मेशन टेक्नोलोजी प्राइवेट लिमिटेड की रिपोर्ट में सावधान करते हुए कहा गया है कि डिवाइस में बचा हुआ डेटा आसानी से गलत हाथों में पड़ सकता है और इससे पहचान की चोरी, वित्तीय धोखाधड़ी, व्यक्तिगत सुरक्षा को खतरा और निजता को लेकर समस्या पैदा हो सकती है।

डाटा चोरी से कारोबार को खतरा पैदा हो सकता है


पुराने इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस पर स्टेलर द्वारा किए गए अध्ययन में कहा गया है कि डाटा चोरी से कारोबार को खतरा पैदा हो सकता है और वित्तीय रिपोर्ट, व्यापारिक समझौते, बौद्धिक संपदा, कारोबारी आसूचना और किसी के नाम से जुड़ी व्यापारिक गोपनीयता जैसी महत्वपूर्ण सूचनाओं का दुरुपयोग हो सकता है। स्टेलर के सह-संस्थापक और निदेशक (घरेलू व्यवसाय) मनोज धींगरा ने कहा, "ग्राहकों में जानकारी का काफी अभाव होने से साइबर अपराध बढ़ने का खतरा हो सकता है। पुराने आईटी सामान हटाते समय सुरक्षा के तौर पर लोगों को व संगठनों को डेटा संतुष्टि प्रक्रिया को अपनाना अत्यावश्यक है।"

रिपोर्ट में डिवाइस बेचते समय डाटा को मिटाने की सुरक्षित विधि का उपयोग करने की सलाह


देश में स्टेलर की प्रयोगशाला में अध्ययन के दौरान इस्तेमाल किए गए 300 पुराने डिवाइस को शामिल किया गया, जिनमें हार्ड ड्राइव, मेमोरी कार्ड, मोबाइल फोन शामिल थे। विश्लेषण से पता चला कि 71 फीसदी डिवाइस में निजी डाटा, व्यक्तिगत पहचान के विवरण और संवेदनशील व्यावसायिक सूचनाएं होती हैं। रिपोर्ट में पुराने डिवाइस बेचते समय डाटा को मिटाने की सुरक्षित विधि का उपयोग करने की सलाह दी गई है।

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