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हमने कोई डिफॉल्ट नहीं किया है- अडानी

प्रोजेक्ट के लिए कर्ज उठाना एक सामान्य बात है!

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नई दिल्ली. 'ये सूट-बूट की सरकार है, इस देश को अम्बानी और अडानी जैसे धनपति चला रहे हैं'-इस तरह के आरोप पिछले कुछ अर्से से राजनीतिक आबोहवा में हैं। ऐसे में खुद क्या सोचते हैं गौतम अडानी जो देश के दिग्गज कारोबारियों की फेहरिस्त में शीर्ष पर हैं। करीब 800 अरब रुपए की कुल रेवन्यू वाली कम्पनियों की अगुवाई करने वाले गौतम अडानी से भास्कर के मुकेश कौशिक ने विशेष इंटरव्यू में पहला सवाल यही किया कि बताइए, इस आरोप में कितनी सच्चाई है कि इस देश को अम्बानी और अडानी चला रहे हैं। पेश हैं पूरी बातचीत के मुख्य अंश: 

 

सबसे पहले कठिन सवाल। आपके कर्ज को लेकर कुछ लोगो ने चिंताजनक बयान दिए हैं?

गौतम अडानी: हमारे लगभग सभी प्रोजेक्ट बहुत बड़े पैमाने के हैं। इनके लिए कर्ज उठाना एक सामान्य बात है! विदेशों में भी इंफ्रास्ट्रक्चर सेक्टर ऐसे ही काम करता है! अडानी समूह के तीस साल में लोन रिपेमेंट की अच्छी साख को देखते हुए रेटिंग एजेंसीज ने हमें बढ़िया रैंकिंग दी है। हमने कोई डिफॉल्ट नहीं किया। यही वही है कि सिर्फ हमें अपने देश की ही नहीं बल्कि दूसरे देशों में भी आर्थिक संस्थाएँ हमारे प्रोजेक्ट्स को लोन देने में संकोच नहीं करती 

 

आम धारणा बन गई है, या बनाई गई है कि सरकार और देश को तो अडानी और अम्बानी चला रहे हैं। कितनी सच्चाई है इसमें?

गौतम अडानी:भारत विश्व का एक सबसे बड़ा और जटिल लोकतंत्र है और राजनीतिक स्वार्थ के लिए अनर्गल दोषारोपण करने वालो को गंभीरता से लेना नहीं चाहिए! अगले साल जब देश चुनाव के लिए जाएगा और ऐसे में मतदाताओं का ध्यान महत्वपूर्ण मुद्दों से भटकाने के कई प्रयास होंगे! इस विशाल और युवा जोश से भरपूर देश को एक मजबूत संविधान चलाता है जिसने विधायिका, कार्यपालिका एवं न्यायपालिका की अपनी भूमिका है। हमें इसका सम्मान करना चाहिए। इंडस्ट्रियल घरानो का काम है अपनी संस्थाओ से अपने ग्राहक, कर्मचारी और पड़ोसियों के हितो को ध्यान में रखते हुए कानून के दायरे में और नैतिकता से  काम करना। लिहाजा राजनीति से हमारा सम्बन्ध बस मतदान तक ही सीमित है। अडानी समूह एकदम न्यूट्रल इंस्टीट्यूशन है। यह हम हमेशा कहते हैं और इस रास्ते पर चलते आए हैं। हम 'ग्रोथ और गुडनैस' की नीति से देश के विकास में अपना योगदान देने में यकीन रखते हैं।   

 

सरकार का कहना है कि उसने ईज़ आॅफ डुइंग बिजनेस के लिए बहुत कदम उठाए हैं? एक उद्योगपति के नाते आपकी इस बारे में क्या विशेषज्ञ राय है? क्या देश में कारोबार करना पहले से काफी आसान हुआ है? हुआ है तो कितना और किस हद तक?

गौतम अडानी: सरकार ने 'इज़ ऑफ़ डूइंग बिजनेस' को बढ़ावा देने के लिए काफी कदम उठाए हैं। वर्ल्ड बैंक ने भी इस बात को माना है। वर्ल्ड बैंक 'इज़ ऑफ़ डूइंग बिजनेस' की सालाना सूची मे भारत ने 30 देशो को पीछे छोड़ते हुए अब तक का अपना शायद सबसे बहेतरीन प्रदर्शन किया। जीएसटी की सफल शुरुआत को इसकी मिसाल के तौर पर गिनाया जा सकता है। जीएसटी के चलते आज व्यापार और उद्योगों में ट्रांसपेरेंसी आयी है और असंगठित क्षेत्रो को भी मुख्यधारा में आने का मौका मिला है। जीएसटी की नयी निति होने के कारण शुरू मैं कुछ कठिनाइयां दिखी पर अब स्थिति सामान्य हो गयी है। इस पहल इन्वेस्टमेंट आएगा और आर्थिक विकास जोर पकड़ेगा। 


- मनमोहन सरकार के घटक दलों की धाराएं अलग—अलग थीं, मोदी सरकार में ऐसा नहीं,इससे फैसलों और उनके अमल में फर्क आना लाजमी है: गौतम अडानी


मनमोहन सिंह सरकार के दस साल और मोदी सरकार के कार्यकाल में आर्थिक वातावरण में कितना फर्क है? दोनों सरकारों की कार्यशैली में कितना अंतर है? 

गौतम अडानी:  अडानी समूह ने अपने करीब 30 साल की अवधि में केंद्र और राज्यों में अनेक दलों की सरकारों के साथ काफी करीब से काम किया। हम किन्ही दो सरकारों की तुलना आसानी से नहीं कर सकते।  हर सरकार कार्यकाल के दौरान दुनिया आर्थिक स्थिति या देश का राजनीतिक माहौल अलग होता है। लोगों की जरुरतें भी बदलती रहती हैं। मनमोहन सिंहजी की सरकार एक मिलीजुली सरकार थी। इस गठबंधन पार्टियां अलग— अलग धाराओं को प्रतिनिधित्व करती थी। हाल की नरेंद्र मोदी जी की सरकार में बीजेपी के पास पूर्ण बहुमत है और उनको समर्थन देने वाले लोग ज्यादातर पार्टियां एक ही तरह की पॉलिटिकल सोच में यकीन रखती हैं। इस स्थिति में निर्णय लेना और उस पर अमल करने की गति में विशेष फर्क पड़ता है।   


-बात देश के विकास की हो तो उद्यमियों और सरकार  को एकजुट होकर काम करना चाहिए: अडानी


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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ विदेशी प्रतिनिधि मंडल में सर्वाधिक यात्रा करने वाले कारोबारियों में से एक आप हैं, क्या कहेंगे?

इसमें कोई शक नहीं कि विदेशी निवेश और रोजगार सृजन के लिए प्रधानमंत्री जी के साथ जाने वाले प्रतिनिधिमंडलों में हमें कई बड़े उद्योगपतियों के साथ जाने का अवसर मिला। राष्ट्रहित के इस विशेष कार्य में योगदान दे पाने का हमें गर्व है। इस दौरान हमें दुनिया बड़ी और क्रिएटिव कम्पनियों के प्रतिनिधियों से मिलने का मौका मिला। उनसे हमें बहुत कुछ सीखने का भी अवसर मिला। सरकार किसी भी दल की हो, अडानी समूह को आप हर राज्य में होने वाले इन्वेस्ट सम्मेलनों में हिस्सेदारी करता पाएंगे। जब बात देश के विकास की हो तब उद्यमियों और सरकार को एकजुट होकर काम करते रहना चाहिए।
 

देश की प्रगति में आपके ग्रुप का क्या योगदान है?
गौतम अडानी: हमारे समूह के करीब 17,000 टेलेंटेड प्रोफेशनल्स को सीधे तोर पर और लाखो लोगो इनडायरेक्ट रोजगार दे रहा है। देश—विदेशकी रेटिंग एजेंसियों  और आर्थिक संस्थाओं ने हमारे ऑपरेशनल और फाइनेंसियल रिकॉर्ड की सराहना की है। हम लगातार कोशिश कर रहे हैं कि हम देश के आर्थिक और सामाजिक ढाँचे को मजबूत करें और पर्यावरण का ख्याल भी रखें। हमने किसानो की खून पसीने की मेहनत से उपजे हुए अनाज को सुरक्षति तरीके से संग्रह करके उसे सड़ने से बचाने के लिए अत्याधुनिक सुविधाए तैयार की है। हम हिमाचल प्रदेश के किसानो से अच्छे दाम में सेब खरीद कर, स्वस्थ तरीके से फार्मपिक नाम से पूरे भारत में सप्लाई करते हैं। अपने बंदरगाहगाहों के जरिए सामान को कम से कम समय और कीमत में बिना कोई और नुकसान पहुंचाए आयात और निर्यात को आसान बनाते है। हम पारम्परिक और नवीनतम ऊर्जा के सेक्टर में देश के सबसे बड़े उत्पादक है जिससे करोड़ों लोगों के जीवन में उजाला और खुशहाली आ रही है। 

 

ऑस्ट्रेलिया में आपकी परियोजनामे कैसी प्रगति हो रही है?
गौतम अडानी:ऑस्ट्रेलिया में हमारा बंदरगाह आॅपरेशनल है। हम वंहा सौर ऊर्जा, कोयला खनन और रेलवे लाइन जैसे सेक्टरों में निवेश कर रहे हैं। इनसे हज़ारो लोगो को रोजगार और करोड़ों लोगो को बिजली देंगे। हमें राज्य और केंद्र स्तर से 112 आधिकारिक और क़ानूनी अनुमति मिल चुकी हैं! हम कारमाइकल माईन की परियोजना को लेकर पूर्णरूप से प्रतिबद्ध है! 
 

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लेकिन विपक्ष ने ऊंचे दाम पर अायातित कोयले को मंगाने के संबंध में 29 हजार करोड़ रुपए के घोटाले का आरोप आप पर लगया है? इसमें कितनी सच्चाई है?

गौतम अडानी: पिछले कुछ सालो में जांच संस्थाओ ने कुछ 40 उद्योगगृह के कोयले के सौदों की तहकीकात शुरू की। अडानी समूह अपना कारोबार एकदम उचित रूप से चलाने में पुख्ता यकीन रखता है। हमने जांच पड़ताल में पूरा सहयोग दिया है। यह मामला अभी कोर्ट में है और किसी भी जिम्मेदार व्यक्ति ऐसे में कोई टिपण्णी देना उचित नहीं समझेगा। 

 

बीते चार वर्षों में आपने अपने व्यापार को कई क्षेत्रों जैसे पॉवर डिस्ट्रीब्यूशन आदि में बढ़ाया है, भविष्य में किन क्षेत्रों में और कदम बढ़ाने की योजना है?

गौतम अडानी: हाल ही में अडानी समूह ने मुंबई के कुछ बड़े हिस्सों में बिजली के वितरण का कार्य शुरू किया है। इसी तरह हम और भी हिस्सों में भी बिना कटौती की  किफायती बिजली पहुँचाना चाहते है। अभी ख़त्म हुई कम्पेटेटिव बिडिंग में हमने देश के कुछ 22 हिस्सों में गैस वितरण के लाइसेंस हासिल किए। हम जल्द ही इन क्षेत्रोमें पाइपलाइन लगाने की महत्वाकांक्षी परियोजना शुरु करने जा रहे हैं।  हम लाखो लोगो को एलपीजी सिलेंडर ढोने से राहत देने वाले हैं और लिक्विड ईंधन के बदले वातावरण को बिलकुल कम हानि पहुँचानी वाले सीएनजी को बढ़ावा देंगे! इस काम में हमें हज़ारो वर्करों और और प्लम्बरों की ज़रूरत पड़ेगी। इसके अलावा हम विश्वकी सबसे बड़ी सौर ऊर्जा की परियोजना तमिलनाडुमें चला रहे है और इस क्षेत्रमें विस्तार जारी  रखेंगे। 


आप इतना बड़ा कारोबार कर रहे हैं पर समाज के लिए क्या योगदान दे रहे हैं?
 गौतम अडानी: हम ये मानते है की देश के कल को बेहतर बनाने के लिए ज़रूरत है शिक्षा, स्वास्थय और रोजगार की। अडानी फाउंडेशन आज करीब एक दर्जन से भी ज्यादा राज्यों के गाँव और छोटे शहरों में सुपोषण, स्वस्थ्य और चिकित्सा, शिक्षा एवं एवं रोजगार तालीम जैसे क्षेत्रो में काफी बड़ा योगदान दे रहा है! स्वछाग्रह के तहत हमारा स्वच्छता अभियान कुछ 19 राज्यों में चल रहा है! अडानी फाउंडेशन के दूरदराज के इलाके के विद्यालय शहरों में चलने वाले निजी शिक्षा संस्थानों से कम नहीं है! हमने स्वास्थय सम्बन्धी पहल कुछ ऐसे क्षेत्र में की है जंहा पहले कोई भी डॉक्टर नहीं मिल पाते थे। 

 

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एफएमसीजी सेक्टर में आपकी क्या प्रगति रही? 

 गौतम अडानी:हमने सिंगापुर कंपनी विल्मर की हिस्सेदारी में देशकी सबसे भरोसेमंद तेल कंपनी बनायी जो फॉर्च्यून ब्रांड से जानी जाती है! इसके बाद हमने कई हैल्थ ब्रांड दीं। एफएमसीजी सेक्टर में हमारा लक्ष्य है किसान को अपनी उपज की योग्य कीमत मिले और ग्राहकों को वाजबी दाम में उत्तम गुणवत्ता मिले! हिमाचल प्रदेश में जबसे अडानी समूह ने सेब की खरीददारी शुरू की है तबसे किसानों के साथ लोकल व्यापारियों ने अपना व्यववहार सुधारा है।      

 

भारत ने सोलर एलायंस बनाया है। इस दिशा में आपके ग्रुप का क्या  योगदान है।

 गौतम अडानी: हालाँकि आज देश की ज्यादातर बिजली कोयले पर निर्भर है, सौर ऊर्जा भी काफी हद से बढ़ रही है! हमने कमुठी, तमिलनाडु में विश्व के सबसे बड़ा सौर ऊर्जा प्रोजेक्ट लगाया है और मुंद्रा, गुजरात में सौर पेनल बनानेका भारत का सबसे बड़ा कारखाना स्थापित किया है! भारत ने आंतरराष्ट्रीय सोलर एलायंस को जो भी वचन दिए है उसे पूरा करने में हम अपना पूरा योगदान देने के लिए प्रतिबद्ध है! 

 

आपने 2015 डिफेंस सेक्टर में कदम रखा। क्या प्रगति हुई है उस दिशा में? 

 गौतम अडानी: देश की ऊर्जा और खुराककी सुरक्षा के बाद हमने भारत की सरहदी सुरक्षा के लिए भी ठोस कदम उठाये है! जब सरकार ने निजी कम्पनियों को देश की सुरक्षा के के काम शामिल होने का आह्वाहन किया है तो हम उसमे भी अपना योगदान देने के लिए हाथ बढ़ाया। हमारे ट्रांसपेरेंट और प्रोग्रेसिव काम को देखते हुए दुनिया कुछ नामी कम्पनियों ने टैक्नोलॉजी कौशल में योगदान देने के लिए कदम बढ़ाए। आने वाले दिनों में हम हैदराबाद में बन रहे अपने कारखाने से कुछ उपकरणों प्रोडक्शन शुरु करेंगे। हमें क्रिटिकल प्रोजेक्ट्स का करीब तीन दशक का अनुभव है जो रक्षा क्षेत्र में खासा काम आएगा।

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