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रुस की जिस राइफल ने दुनिया में मचाया तहलका, अब पीएम मोदी उसकी फैक्ट्री का करेंगे उद्धाटन

यह राइफल रूस की कमाई का है अहम जरिया

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नई दिल्ली. एके-47 जैसी खतरनाक बंदूक के निर्माता मिखाइल कलाश्निकोव ने किया था। इसका इस्तेमाल सोवियत सेना ने अपने ऑपरेशन में किया था। देखते ही देखते अगले 2 वर्षों में ही यह बंदूक पूरी दुनिया में मशहूर हो गई थी। तब से ही रूस ने एके-47 का निर्यात बाकी देशों में करना शुरू कर दिया, जो आज उनकी कमाई का अहम श्रोत है। अब भारत में पहली बार क्लाश्निकोव असॉल्ट राइफल बनने जा रही हैं।

 

पीएम मोदी फैक्ट्री का करेंगे उद्धाटन 

पीएम मोदी आज यानी 3 मार्च को यूपी के अमेठी में एके-47 बंदूक फैक्ट्री की आधारशिला रखेंगे। ये फैक्ट्री रूस की एक कंपनी और ऑर्डिनेंस फैक्ट्री बोर्ड साथ मिलकर बनाएगी, जिसमें हर साल 7.47 लाख कलाश्निकोव राइफल बनाई जाएगी। इस फैक्ट्री के निर्माण पर 408.01 करोड़ रुपये की लागत आयी है। इस फैक्ट्री को सिविल वर्क के लिए 2014 में 48 करोड़ की रकम और जारी की गई। 

    एके-47 राइफल की खूबी 

    • एके-47 को दुनिया की पहली आधुनिक बंदूक माना जाता है. इस बंदूक का इस्तेमाल 1949 से ही किया जा रहा है।
    • एके-47 का नाम गिनिज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकार्ड में शामिल है, क्योकि ये दुनिया की सबसे ज्यादा उपयोग की जाने वाली राइफल है। आज करीब दुनिया के 50 देश इस राइफल का इस्तेमाल करते हैं। 
    • रुस दुनिया को केवल एके-47 की सप्लाई नहीं करता है, बल्कि 30 अन्य देसों को भी इसे बनाने का लाइसेंस मिला हुआ है। इसमें भारत, चीन, इजराइल जैसे देश शामिल हैं। 
    • इससे 300 से 800 मीटर तक निशाना साधा जा सकता है। इससे लोहे के दरवाजे को भेदा जा सकता है।

    एके47 से ग्रेनेड लांचर जोड़े सकते हैं

    • हाईटेक एके-47 राइफल पर एक ग्रेनेड लांचर भी जोड़ा जा सकता है। 
    • इस राइफल की लाइफ 6 हजार से 15 हजार राउंड तक होती है। इसकी एक मैगजीन में 30 राउंड होते हैं। 
    • एके-47 दुनिया की अकेली ऐसी राइफल है, जो किसी बी वातावरण में काम कर सकती है। मतलब पानी, रेत या मिट्टी में भी काम कर सकती है।  
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