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33 साल बाद सेना को मिली देशी बोफोर्स तोप, रात में भी दुश्मनों पर बरपाएगी कहर, नहीं होगा मौसम का असर, जानिए इसकी खासियत

13 सेकेंड में 3 गोले दागने वाली इस गन को इस खास लोकेशन पर तैनात किया जाएगा।

Native bofors gun for Army

Native bofors gun for Army: सेना को जबलपुर की गन कैरेज फैक्टरी (जीसीएफ) में निर्मित पहली आर्टलरी गन 'धनुष' सोमवार को सेना के सौंप दी गईं। इसे ‘देसी’ बोफोर्स भी कहा जा रहा है। आर्टिलरी गन का वजन 13 टन है।

नई दिल्ली. सेना को जबलपुर की गन कैरेज फैक्टरी (जीसीएफ) में निर्मित पहली आर्टलरी गन 'धनुष' सोमवार को सेना के सौंप दी गईं। इसे ‘देसी’ बोफोर्स भी कहा जा रहा है। आर्टिलरी गन का वजन 13 टन है। यह 155 एमएम बैरल से 38 किमी दूरी तक निशाना साधन में सक्षम है। इससे 46.5 किलोग्राम का गोला फायर किया जा सकता है। 55 एम एम गन की कीमत 18 करोड़ रुपए है। 

 

13 सेकेंड में तीन फायर करने में सक्षम

भारत में आज से करीब 33 साल पहले 1986 में राजीव गांधी की सरकार ने स्वीडन से 285 मिलियन डॉलर में बोफोर्स तोप खरीदने का सौदा किया था, जो काफी विवादित रहा था। हालांकि भारत ने विवाद को पीछे छोड़कर स्वदेशी बोफोर्स बना ली है। इस तोप का पूरा सिस्टम 1980 में मिली बोफोर्स सिस्टम पर आधारित है। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, यह 13 सेकंड में तीन फायर कर सकती है। फायर करने के बाद गन अपनी पोजिशन चेंज कर करती है। यह रात के समय भी लक्ष्य पर निशाना साध सकती है। भारतीय सेना ने कुल 414 गन की मांग की है।

 

इस लोकेशन पर की जाएगी तैनात 

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, 38 किलोमीटर दूरी तक निशाना साधने वाली इस एकमात्र तोप की तैनाती पाकिस्तान और चीन से लगी सरहद पर की जाएगी। गन का संचालन पूरी तरह ऑटोमेटिक है। मतलब गन खुद गोले भरकर वार करने में सक्षम है। इस गन पर किसी भी मौसम का कोई असर नहीं होता है। इसे किसी भी स्थान पर तैनात की जा सकती है। यह गन माइनस तीन डिग्री से 70 डिग्री तक तापमान सहन कर सकती है। 
 

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