सरकार लोगों की सेहत और पर्यावरण के साथ कर रही समझौता, भारत में अब भी मिल रही नए कोल संयंत्रो को मंज़ूरी, रिपोर्ट

New coal block approval: भारत समेत दुनियाभर में साल 2018 में निर्माणाधीन कोयला आधारित पावर प्लांट के विकास में कमी आई है। ग्रीन पीस की रिपोर्ट के मुताबिक पिछले साल नए बने कोल पावर प्लांट में 20% (53% पीछले तीन साल में) गिरावट आयी है,

Money Bhaskar

Mar 29,2019 04:50:00 PM IST

नई दिल्ली. भारत समेत दुनियाभर में साल 2018 में निर्माणाधीन कोयला आधारित पावर प्लांट के विकास में कमी आई है। ग्रीन पीस की रिपोर्ट के मुताबिक पिछले साल नए बने कोल पावर प्लांट में 20% (53% पीछले तीन साल में) गिरावट आयी है, वहीं नए बनने वाले प्लांट में 39% (पिछले तीन साल में 84%) कमी हुई है और निर्माण से पहले वाले प्लांट में 24% (69% पीछले तीन साल में) की गिरावट दर्ज की गयी है।

सोलर ऊर्जा कोल उर्जा से सस्ती

भारत और चीन में, जहाँ 2005 से अबतक 85% नए प्लांट लगे हैं। वहीं नए कोल प्लांट में रिकोर्ड कमी हुई है लेकिन फिर भी नए प्लांट प्रस्तावित हैं और उनकी मंज़ूरी दी जा रही है। साल 2018 में, भारत ने कोल पावर से अधिक अक्षय ऊर्जा की क्षमता को बढ़ाया है।17.6 गिगावाट ऊर्जा उत्पादन क्षमता में से 74% अक्षय ऊर्जा तकनीक से उत्पादित किया गया है। इसमें ज़्यादातर हिस्सा सोलर ऊर्जा है जो लगातार महंगे होते जा रहे कोयला आधारित बिजली से सस्ता है। सोलर पर आयात कर और जीएसटी के बावजूद यह तेजी से बढ़ रहा है। ग्रीनपीस इंडिया के विश्लेषण में सामने आया है कि 65% कोयला आधारित बिजली अक्षय ऊर्जा से ज़्यादा महंगा हो गया है।

यूपी और बिहार में मिली मंजूरी

भारत सरकार के अनुसार, 40 गिगावट कोयला प्लांट आर्थिक रूप से घाटे का सौदा बन चुके हैं। साल 2018 में सिर्फ़ तीन गिगावाट नयी क्षमता वाले कोल प्लांट को मंज़ूरी दी गयी जबकि 2010 में यह 39 गिगावट था। अधिक्षमता और अक्षय ऊर्जा के सस्ते होते जाने के कारण कोयला आधारित संयंत्रों में निवेश घाटे का सौदा बन चुका है।ग्रीनपीस इंडिया की पुजारिनी सेन ने कहा कि “थर्मल प्लांटों के अनुकूल बाज़ार न होने के बावजूद सरकारें नए थर्मल प्लाटों में पैसे खर्च रही हैं।” सेन ने कहा, "इसी वर्ष फरवरी में आर्थिक मामलों की कैबिनेट कमेटी द्वारा खुर्ज़ा (यूपी) और बक्सर (बिहार) में दो पॉवर प्लांटों के लिए 11,089 करोड़ और 10,439 करोड़ रुपए आवंटित किए गए हैं। जब समूचा थर्मल ऊर्जा क्षेत्र गंभीर आर्थिक चुनौतियों का सामना कर रहा है, नए प्लांट बनाने की घोषणाएं जनता के पैसों की बर्बादी से ज्यादा कुछ नहीं है"।

स्वास्थ्य को दरकिनार कर थर्मल पावर प्लांट को दी जा रही मंजूरी

उत्तर प्रदेश की पर्यावरण संस्था क्लाइमेट एजेंडा से जुड़े रवि शेखर कहते हैं, "यह बहुत ही दुर्भाग्यपूर्ण है कि राज्य में प्रदूषण से हो रही गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं को दरकिनार करते हुए सरकार थर्मल पावर प्लांट को मंजूरी दे रही है. खुर्जा थर्मल पॉवर प्लांट या कोई भी अन्य थर्मल पावर प्लांट लगाने में आने वाला खर्च अक्षय ऊर्जा संसाधनों की तुलना में दो गुना अधिक होगा। इसीलिए यह बेहतर होगा कि सरकार अक्षय ऊर्जा संसाधनों पर ज्यादा ध्यान दे और देशभर में राष्ट्रीय स्वच्छ वायु योजना लागू करवाने के लिए प्रतिबद्धता दिखाए ।"

X
COMMENT

Money Bhaskar में आपका स्वागत है |

दिनभर की बड़ी खबरें जानने के लिए Allow करे..

Disclaimer:- Money Bhaskar has taken full care in researching and producing content for the portal. However, views expressed here are that of individual analysts. Money Bhaskar does not take responsibility for any gain or loss made on recommendations of analysts. Please consult your financial advisers before investing.