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दिल्ली के सिग्नेचर ब्रिज के नाम दर्ज हुआ एक अनोखा रिकार्ड

दिवाली से पहले दिल्लीवासियों को मिला तोहफा

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नई दिल्ली. दिल्लीवासियों का सिग्नेचर ब्रिज सपना लंबे इंतजार के बाद आखिरकार खत्म हो गया। दिवाली से पहले दिल्ली के सीएम अरविंदर केजरीवाल ने दिल्लीवासियों को सिग्नेचर ब्रिज का तोहफा दे दिया। ब्रिज का केजरीवाल ने रविवार को उद्धाटन किया। इसके साथ ही इस ब्रिज के नाम एक अनोखा रिकार्ड जुड़ गया। यह ब्रिज देश की राजधानी के इतिहास में सबसे ज्यादा देरी से बनाया जाने वाला प्रोजक्ट बन गया है। इसे बनाने में 14 वर्षों का लंबा वक्त लगा।  

 

निर्माण में देरी की वजह से बढ़ी लागत

ब्रिज के निर्माण से लेकर उसके बनने के दौरान विवाद और अनियमिताओं की भरमार रही। इसे बनाने का प्रक्रिया 2004 में शुरू हुई। लेकिन कई आरोपों और विवाद की वजह से ब्रिज को बनाने में देरी होती रही। अब ब्रिज 14 साल  के लंबे वक्त के बाद बनकर तैयार हुआ। इस 67 मीटर लंबे ब्रिज की लागत बढ़कर 1518.37 करोड़ रुपए हो गई। इस प्रोजेक्ट को पूरा करने के लि विजिनेंस डिपार्टमेंट को जिम्मेदारी लेनी पड़ी। साथ ही दिल्ली हाईकोर्ट ने प्रोजेक्ट की निगरानी की। 

 

निर्माण के साथ ही शुरु हो गया था विवाद

ब्रिज बनाने को लेकर 2003 में पीएम अटल बिहारी वाजपेयी ने चर्चा की और वर्ष 2014 में इसे 265 करोड़ रुपए की लागत से बनाने की योजना तैयार की गई। लेकिन 2004 में सत्ता परिवर्तन के साथ दिल्ली की मुख्यमंत्री और केन्द्र सरकार में तालमेल की कमी की वजह से ब्रिज का बजट बढ़कर 400 करोड़ रुपए हो गया। इसके बाद वर्ष 2009 में सांसद जेपी अग्रवाल और मुख्यमंत्री शीला दीक्षित की आपसी कलह की वजह से ब्रिज का कार्य अधर में लटका रहा। इसके बाद वर्ष 2014 में इस ब्रिज के कार्य को दोबाारा शुरु किया गया। हालांकि अब इसका बजट बढ़कर 1100 करोड़ रुपए हो गया था। 

 

आगे पढ़ें-उद्धाटन के साथ भी जुड़ गया विवाद 

 

उद्धाटन के साथ भी जुड़ गया विवाद 

ब्रिज के उद्धाटन के साथ भी विवाद जुड़ गया, जब दिल्ली के सांसद मनोज तिवारी बिना निमंत्रण के उद्धाटन स्थल पर पहुंच गए। तिवारी के मुताबिक वो उत्तर पूर्वी दिल्ली के सांसद होने के नाते वहां पहुंचे थे। उन्होंने आरोप लगाया कि उनके साथ बदतमीजी की गई। साथ ही धक्कामुक्कीभी हुई। 

 

आगे पढ़ें-दिल्लीवासियों को क्या होगा फायदा

 

आवागमन होगा आसान 
ब्रिज के निर्माण से उत्तर पूर्वी दिल्ली और वजीरादाबाद के बीच आवागमन में आसानी होगी। दिल्ली के इस सिग्नेचर ब्रिज की ऊंचाई कुतुबमीनार से भी दोगुनी है। ब्रिज के सबसे ऊपरी हिस्से में 22 मीटर ऊंचा ग्लास का एक बॉक्स बनाया गया है। बॉक्स के अंदर से लोग बाहर का नजारा देख सकेंगे। इसके लिए चार एलिवेटर लगाए गए हैं। 

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