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जिस विमान के विंग्स पर खड़ी हो सकती हैं 70 कारें, उसका उत्पादन होने जा रहा है बंद, आखिरी डिलीवरी 2021 में

3100 करोड़ रुपए है एक विमान की कीमत, बड़ा आकार ही इसे ले डूबा

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नई दिल्ली.

दुनिया के सबसे बड़े यात्री विमान ए380 (A380) का उत्पादन बंद होने जा रहा है। यूरोपियन कंपनी Airbus अब सिर्फ 17 ऐसे विमान बनाएगी। इसमें से 14 एमिरेट्स एयरलाइन (Emirates Airlines) के लिए और 3 जापान की एएनए एयरलाइन (ANA Airlines) के लिए। आखिरी विमान की डिलीवरी 2021 में होगी। एमिरेट्स इसकी सबसे बड़ी ग्राहक है। उसके पास करीब 110 ए380 विमान हैं। उसने 53 विमानों के ऑर्डर दिए थे, लेकिन कुछ दिन पहले उसने ऑर्डर संख्या घटाकर 14 कर दी। इसी के बाद एयरबस ने यह निर्णय लिया कि अब प्लेन का उत्पादन बंद किया जाना चाहिए। एमिरेट्स से पहले ऑस्ट्रेलिया की कैंटास एयरलाइन (Qantas ) भी ए380 के ऑर्डर रद्द कर चुकी है।

 

एक विमान की कीमत 3,100 करोड़ रुपए

ए380 में बिजनेस और इकोनॉमी क्लास मिलाकर 544 लोगों के बैठने लायक जगह होती है। पूरा इकोनॉमी क्लास होने पर करीब 800 यात्री बैठ सकते हैं। अब तक 234 विमान बिके हैं। 2021 तक 17 और बिकेंगे। 2007 में पहली उड़ान। 12 साल बाद ही बंद करने का फैसला लिेया गया है।

 

 

3,500 लोगों की नौकरी पर खतरा

एयरबस के सीईओ टॉम एंडर्स ने कहा, ‘यह फैसला पीड़ादायक है। हमने इसमें काफी निवेश किया था। लेकिन हमें भी हकीकत को समझना होगा।’ उत्पादन बंद होने से एयरबस में 3,000-3,500 लोगों की नौकरी जा सकती है। हालांकि जब तक यह विमान विभिन्न एयरलाइंस के बेड़े में जब रहेगा, कंपनी तब तक उनकी सर्विसिंग करती रहेगी। एमिरेट्स ने कहा कि ए380 विमान 2030 के दशक तक उसके बेड़े में रहेंगे।

 

 

जिसने लोकप्रियता दिलाई, वही बड़ा आकार ले डूबा

ए380 का उत्पादन बंद होने के चार प्रमुख कारण हैं। इसमें इसका बड़ा आकार भी शामिल हैं।

-नए विमान ज्यादा सक्षम और सस्ते हैं। एमिरेट्स ने ए380 के ऑर्डर रद्द कर ए350 और ए330 नियो विमान लेने का फैसला किया है। ए350 की कीमत ए380 से करीब 30% कम है।

-नए विमान हल्के होते हैं। इसलिए इनमें ईंधन की खपत कम होती है। एयरलाइंस के कुल खर्च का 35-40% हिस्सा ईंधन पर ही जाता है।

-ए380 बड़े एयरपोर्ट पर ही उतर सकते हैं। सीटें भरी होने पर ही एयरलाइन को फायदा होता है। छोटे विमान कहीं भी उतारे जा सकते हैं।

-ए380 ने 2007 में पहली उड़ान भरी थी। उसके बाद ही पूरी दुनिया आर्थिक मंदी की चपेट में आ गई। इससे बिक्री कम हो गई।

 

 

कभी यूरोप की आर्थिक शक्ति का प्रतीक था, अब ब्रेक्जिट का प्रतीक

एक समय ए380 को यूरोपियन यूनियन का प्रतीक माना जाता था। विमान के अलग-अलग हिस्से ब्रिटेन, फ्रांस, जर्मनी और स्पेन में बनते हैं। ब्रिटेन के पूर्व प्रधानमंत्री टोनी ब्लेयर ने इसे यूरोप की आर्थिक शक्ति का प्रतीक बताया था। अब इसका बंद होना भी यूरोजोन के बिखरने (ब्रेक्जिट) का प्रतीक माना जा रहा है।

डैने इतने बड़े कि उन पर 70 कारें खड़ी की जा सकती हैं

ए380 का उत्पादन 2005 में शुरू हुआ और 2007 में पहली उड़ान भरी। इसके डैने (विंग्स) इतने बड़े हैं कि उन पर 70 कारें खड़ी की जा सकती हैं। तब 4 इंजन वाले इस विमान को बहुत सराहा गया था। माना गया था कि इससे एयरपोर्ट पर विमानों की भीड़ कम होगी। एयरलाइंस को लगा इससे उनका ऑपरेशनल खर्च कम होगा और मुनाफा बढ़ेगा। एयरबस ने ऐसे 1,200 विमान बेचने का अनुमान जताया था। लेकिन अब तक यह 234 विमान ही बेच पाई है। और 17 विमानों की डिलीवरी का मतलब है कि कुल मिलाकर सिर्फ 251 ए380 बनेंगे। जिन एयरपोर्ट पर इसकी सर्विस शुरू होनी थी, वहां ढांचे में भी कुछ बदलाव करने पड़े थे।

 

 

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