H-1B वीजा: इंडि‍यन आईटी कंपनि‍यों को बड़ी राहत, खत्‍म की गई फीस

INDUSTRY TEAM

Oct 02,2015 04:18:00 PM IST
वाशिंगटन। इंडि‍यन आईटी कंपनि‍यों को H-1B वीजा मामले में बड़ी राहत मि‍ली है। H-1B वीजा पर लगने वाली 2,000 डॉलर फीस को यूएस कांग्रेस ने खत्‍म कर दि‍या है। इस फीस को आमतौर पर आउटसोर्सिंग फीस कहा जाता है, जि‍से इंडि‍यन आईटी कंपनि‍यों से जबरन वसूला जाता था।
इंडि‍यन कंपनि‍यों ने इसे बताया भेदभाव
इंडि‍यन कंपनि‍यों ने H-1B वीजा के जरि‍ए अमेरि‍का में आने वाले क्‍वालि‍फाइड आईटी प्रोफेशनल्‍स पर लगने वाली इस फीस को ‘भेदभाव’ वाला बताया था। साल 2010 में यूएस कांग्रेस की ओर से 50 फीसदी से ज्‍यादा वि‍देशी कर्मचारि‍यों वाली कंपनि‍यों के लि‍ए H-1B पर 2,000 डॉलर फीस लगाने से जुड़ा कानून पेश कि‍या था।
2010 में बनाया गया नया कानून
10 अगस्‍त 2010 में पास हुए कानून के तहत क्‍वालीफाई करने वाली कंपनि‍यों के लि‍ए H-1B और L-1 वीजा प्रति‍ आवेदन की फीस को बढ़ाने का प्रावधान कि‍या गया। H-1B की फीस 2,000 डॉलर और L-1 की फीस 2,250 करने का प्रावधान कि‍या गया। इसे खासतौर पर इंडि‍यन आईटी कंपनि‍यों को टारगेट करते हुए बढ़ाया गया था।
9/11 हमले के बाद बढ़ाई कानून की अवधि‍
कानून की अवधि‍ को 9/11 स्‍वास्‍थ्‍य एवं मुआवजा कानून 2010 के तहत चार से पांच साल के लि‍ए बढ़ा दि‍या था, ताकि‍ फायरफाइटर्स और 9/11 हमले के बाद मदद करने वाले लोगों को हेल्‍थकेयर और फाइनेंशि‍यल मुआवजा दि‍या जा सके।
9/11 हमले के बाद इंडि‍यन कंपनि‍यों की मदद
इंडि‍यन आईटी इंडस्‍ट्री के संगठन नैस्‍कॉम ने पि‍छले माह जारी रि‍पोर्ट में कहा कि‍ इस दौरान यूएस ट्रैजरी में इंडि‍यन आईटी टेक कंपनि‍यों का योगदान करीब 37.5 करोड़ डॉलर रहा। इसके अलावा, इंडि‍यन कंपनि‍यों ने अमेरि‍का के बॉर्डर को सुरक्षि‍त करने में भी मदद की।
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