न्यू ट्रेंड /टिकटॉक पर पॉपुलर होने के लिए ट्रेनिंग क्लास का सहारा, 10 हजार रुपए तक होती है फीस

money bhaskar

May 15,2019 05:35:03 PM IST

नई दिल्ली. मद्रास हाईकोर्ट का बैन हटने के बाद फिर से शुरू हुए चीन के वीडियो एप टिक टॉक में लोगों को रिझाने के लिए अब ट्रेनिंग क्लास और वर्कशॉप का नया ट्रेंड सामने आया है। इसमें लोगों को वीडियो बनाने का हुनर सिखाया जाता है। ऐसे वीडियो बनाने की ट्रेनिंग दी जाती है कि जिससे यूजर्स सोशल मीडिया में फेमस हो जाए। हाल ही में ऐसा ट्रेनिंग शॉप दिल्ली में खुला है। इसमें हर हफ्ते ट्रेनिंग दी जाती है। यूजर्स से प्रति माह 7 हजार से 10 हजार के बीच फीस ली जाती है। सिर्फ एक महीने पहले शुरू इस क्लास में हर सेशन के लिए 10 यूजर्स ने अपने नाम लिखाए हैं।

क्लास में सिखाया जाता है वीडियो वायरल कैसे होगा?

क्लास में यूजर्स को टिकटॉक वीडियो बनाने और उन्हें एडिट करने के टिप्स बताए जाते हैं। उन्हें यह भी बताया जाता है कि किस तरह अपने वीडियो को सोशल मीडिया पर पोस्ट करना चाहिए, जिससे वह वायरल हो जाए। वायरल होने से मतलब वीडियो की ज्यादा लोगों तक पहुंच से है। दिल्ली स्थित फोटोग्राफी स्टूडियो सेलिब्रिटी फेस के एक प्रतिनिधि ने अंग्रेजी अखबार ईटी को बताया कि उनकी क्लास में थ्योरी और प्रैक्टिकल दोनों ही होते हैं। उन्होंने बताया कि आप टिकटॉक पर जो वीडियो बनाते हैं, उनमें से 90 फीसदी वायरल नहीं होते हैं। इन क्लास में आपको बताया जाता है कि वीडियो वायरल कैसे होगा? इस तरह के क्लास में अपना नाम लिखाने वाले स्टूडेंट्स को अपने पसंदीदा टिक टॉक स्टार के साथ पोर्टफोलियो शूट कराने का भी मौका दिया जाता है। इससे उनके प्रोफाइल को ज्यादा लोगों का अंटेशन मिलता है।

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टिकटॉक का क्रेज सिर चढ़कर बोल रहा है

सेलेब्रिटी फेस इस तरह के फोटो शूट का आयोजन जयपुर, दिल्ली, भोपाल, गुवाहाटी, कोलकाता और अहमदाबाद जैसे शहरों में करती है। इस कंपनी की वेबसाइट के मुताबिक, पूरे दिन चलने वाले ऐसे कार्यक्रम में 500 यूजर्स को हिस्सा लेने का मौका मिलता है। सोशल मीडिया एक्सपर्ट कार्तिक श्रीनिवासन ने कहा कि टिकटॉक का क्रेज टियर 2 और टियर 3 शहरों में सिर चढ़कर बोल रहा है। इन शहरों के यूजर्स ने ऑनलाइन पॉपुलिरिटी का स्वाद नहीं चखा होता है। ये लोग ऐसे होते हैं, जिन्होंने ट्विटर और लिंक्डइन का ज्यादा इस्तेमाल नहीं किया होता है।

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फोटोग्राफी और कोरियाग्राफी भी बताती है कंपनियां

कार्तिक के मुताबिक टिकटॉक के इस्तेमाल में दक्ष लोगों से उन्हें यह सीखने का मौका मिलता है कि वे कैसे उनके जैसा बन सकते हैं? यह पूरी तरह से मुग्ध कर देने वाला एहसास है। इस तरह के क्लास और प्रमोशनल एक्टिविटीज का आयोजन करने के अलावा शहर में यूजर्स के एक जगह मिलने के कार्यक्रम भी रखे जाते हैं। एक्टर और सोशल मीडिया के इस्तेमाल में विशेषज्ञता रखने वाले पारस तोमर ने कहा कि कार्यक्रम आयोजित करने वाली कंपनियां भी उन्हें फोटोग्राफी और कोरियोग्राफी शूट करने के लिए कहती हैं। तोमर के टिकटॉक पर 15 लाख फॉलोवर्स हैं। उन्होंने कहा कि छोटे शहरों में टिकटॉक के इन्फ्लूवर्स की ज्यादा पूछ है। इसकी वजह यह है कि ट्विटर और लिंक्डइन के बजाय टिकटॉक के फैन हमसे ज्यादा जुड़ा हुआ महसूस करते हैं।

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