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एजीआर /ऑयल इंडिया को 48.5 हजार करोड़ रुपए का नोटिस

  • नोटिस को टीडीसैट में चुनौती देगी सरकारी कंपनी

Moneybhaskar.com

Jan 20,2020 08:29:12 PM IST

नई दिल्ली. दूरसंचार विभाग (डीओटी) ने सरकारी कंपनी ऑयल इंडिया को एडजस्टेड ग्रॉस रिवेन्यू (एजीआर) बकाए के रूप में 48,457 करोड़ रुपए का नोटिस भेजा है। सरकारी कंपनी से इस राशि का भुगतान 23 जनवरी तक करने के लिए कहा गया है। एक सूत्र ने कहा कि ऑयल इंडिया को नोटिस भेज दिया गया है। यह करीब 48,500 करोड़ रुपए का है। नोटिस के कारण कंपनी के शेयर बीएसई पर सोमवार को 4.66 फीसदी गिरकर 149.40 रुपए पर बंद हुए। ऑयल इंडिया के सीएमडी सुशील चंद्र मिर ने एक कार्यक्रम में कहा कि हमें 23 जनवरी तक भुगतान करने के लिए एक नोटिस मिला है। हम इसे टीडीसैट में चुनौती देना चाहते हैं।

ऑयल इंडिया को एजीआर नोटिस क्यों

ऑयल इंडिया, एनएचएआई, भारतीय रेल और पावर ग्रिड कॉरपोरेशन जैसी कई सरकारी कंपनियां और सरकारी निकाय आईपी और आईएसपी लाइसेंस के तहत डीओटी के नेटवर्क पर ऑप्टिक फाइबर का उपयोग करते हैं। सुप्रीम कोर्ट के आदेश के मुताबिक बकाए की गणना सिर्फ संचार संबंधी सेवाओं से नहीं बल्कि पैरेंट कंपनी की कुल आय के आधार पर की जाएगी। इससे पहले एक अन्य सरकारी कंपनी गेल को भी आईपी-1 और आईपी-2 लाइसेंस और आईएसपी लाइसेंस के लिए एजीआर के तहत 1.72 लाख करोड़ रुपए का नोटिस भेजा गया था। सरकारी उर्वरक कंपनी जीएनएफसी को भी 2005-06 से 2018-19 तक की अवधि के लिए वी-सैट व आईएसपी लाइसेंस के एवज में 15,019 करोड़ रुपए अतिरिक्त भुगतान करने के लिए एक नोटिस भेजा गया था।

कोर्ट ने एजीआर बकाए की गणना में गैर टेलीकॉम आय को भी शामिल करने का दिया है आदेश

एजीआर बकाया और ब्याज के भुगतान में राहत के लिए टेलीकॉम कंपनियां भारती एयरटेल, वोडाफोन आईडिया और टाटा टेलीसर्विसेज सुप्रीम कोर्ट में क्यूरेटिव पिटीशन दाखिल करने वाले हैं। इससे पहले सुप्रीम कोर्ट ने 17 जनवरी को इन कंपनियों की समीक्षा याचिका को खारिज कर दिया था। कंपनियों ने सुप्रीम कोर्ट के आदेश के विरुद्ध समीक्षा याचिका लगाई थी। कोर्ट ने इन कंपनियों को करीब एक लाख करोड़ रुपए के एजीआर का भुगतान करने का आदेश दिया था। सुप्रीम कोर्ट ने 24 अक्टूबर के आदेश में कहा था कि जो कंपनियां सरकारी स्पेक्ट्रम का उपयोग करती हैं, उनकी गैर टेलीकॉम आय को भी बकाए की गणना में शामिल किया जाएगा। डीओटी ने पिछले 15 साल में संबंधित कंपनियों की कुल आय को देखते हुए बकाया तय किया है।

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