बुरा दौर /अनिल अंबानी की RCom की दिवालिया प्रक्रिया शुरू, ग्रुप की कंपनियों ने 11 साल में गवाएं 2,11,432 करोड़ रुपए

Money Bhaskar

May 10,2019 06:06:08 PM IST

नई दिल्ली। अनिल धीरूभाई अंबानी ग्रुप (एडीएआर) के मुखिया अनिल अंबानी की प्रमुख कंपनी रिलायंस कम्युनिकेशन (RCom) की दिवालिया प्रक्रिया शुरू हो गई है। नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल (NCLT) ने गुरुवार को आरकॉम की दिवालिया प्रक्रिया को मंजूरी दे दी है। इसके साथ ही एनसीएलटी ने कंपनी के निदेशक मंडल को भंग करते हुए उसके संचालन के लिए पेशेवरों के एक समूह की नियुक्ति कर दी है। एनसीएलटी ने 31 बैंकों के समूह को कर्जदाताओं की समिति बनाने को भी मजूरी दे दी है। अब इस मामले की सुनवाई 30 मई को होगी। 2005 में बंटवारे के बाद अनिल अंबानी के स्वामित्व में आई आरकॉम इस समय पूरी तरह से बंद पड़ी है। मनी भास्कर अपनी खास रिपोर्ट में बता रहा है कि आरकॉम कैसे 17 साल के सफर में अर्श से फर्श पर पहुंच गई।

2002 में हुआ रिलायंस कम्युनिकेशन का गठन

2002 में रिलायंस इंडस्ट्रीज के मुखिया धीरूभाई अंबानी के निधन के बाद मुकेश अंबानी चेयरमैन और अनिल अंबानी एमडी बनते हैं। धीरूभाई अंबानी के सम्मान में रिलायंस ग्रुप रिलायंस कम्युनिकेशन (तब रिलायंस इंफोकॉम) के माध्यम से टेलीकॉम सेक्टर में प्रवेश करता है। तब कंपनी ने 500 रुपए में मोबाइल की सुविधा प्रदान करके इस सेक्टर की तस्वीर बदल दी थी। देखते ही देखते टेलीकॉम सेक्टर में कंपनी का दबदबा बढ़ता चला गया। 2008 में कंपनी की मार्केट कैप 1,65,917 करोड़ रुपए पर पहुंच गया। टेलीकॉम सेक्टर में प्रतियोगिता बढ़ने पर आरकॉम ने भी सस्ती कॉल दर, आकर्षक ऑफर्स की रणनीति अपनाई लेकिन यह इसके लिए घाटे का सौदा रहा और कंपनी लगातार डूबती चली गई। अब हालात यह हैं कि इस समय आरकॉम का मार्केट कैप 10 मई 2019 को घटकर 652 करोड़ रुपए पर आ गया है।

ज्यादा कर्ज ने बिगाड़ा खेल

जानकारों के अनुसार, मुकेश अंबानी और अनिल अंबानी में बंटवारे के समय आरकॉम अनिल अंबानी के हिस्से आई थी। 2010 में आरकॉम एडीएजी ग्रुप की प्रमुख कंपनियों में शुमार होती थी। उस समय टेलीकॉम सेक्टर में आरकॉम की 17 फीसदी हिस्सेदारी थी। इस दौरान कंपनी ने विस्तार के लिए बाजार से कर्ज लेना शुरू किया। लेकिन सही मैनेजमेंट नहीं हो पाने के कारण कंपनी पर कर्ज बढ़ता चला गया। वित्त वर्ष 2010 में आरकॉम पर 25 हजार करोड़ रुपए का कर्ज था जो बढ़कर 2019 में 48000 करोड़ रुपए पर पहुंच गया है। 10 मई 2019 को आरकॉम के शेयर 2.36 रुपए प्रति शेयर पर कारोबार कर रहे हैं।

अनिल अंबानी ग्रुप की कंपनियों ने 11 साल में गवाएं 2,11,432 करोड़ रुपए

2005 में बंटवारे के बाद अनिल अंबानी को रिलायंस इंफोकॉम (अब रिलायंस कम्युनिकेशन), रिलायंस एनर्जी और रिलायंस कैपिटल मिली थीं। उस समय रिलायंस कम्युनिकेशन एडीएजी ग्रुप की सबसे बड़ी कंपनियों में शुमार थी। मार्च 2006 में फोर्ब्स ने अनिल अंबानी को 1 लाख करोड़ से अधिक की संपत्ति के साथ भारत का तीसरा सबसे अमीर व्यक्ति बताया था। मार्च 2008 में एडीएजी ग्रुप की सभी कंपनियों का मार्केट कैप 2,36,354 करोड़ रुपए था। इसके बाद से एडीएजी ग्रुप की कंपनियों का ढलान शुरू हुआ। मार्च 2009 में ही एडीएजी ग्रुप की कंपनियों का मार्केट कैप घटकर 80,938 हजार करोड़ रुपए पर आ गया। इसके बाद अगले साल मार्च 2019 में थोड़ी तेजी आई और मार्केट कैप बढ़कर 1,14,049 करोड़ रुपए पर पहुंच गया। लेकिन इसके बाद कंपनी का मार्केट कैप लगातार गिरता चला गया और 22 फरवरी 2019 को सभी कंपनियों का मार्केट कैप घटकर 24,922 करोड़ रुपए पर रह गया है। इस प्रकार मार्च 2008 से 22 फरवरी 2019 तक करीब 11 साल में अनिल अंबानी की कंपनियों को करीब 2,11,432 करोड़ रुपए का नुकसान हुआ है।

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