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स्ट्रैटजी / चीन की दीवार को तोड़ने की तैयारी में फेसबुक, अरबों का कारोबार हो रहा है प्रभावित

2009 से चीन में प्रतिबंधित है फेसबुक

Facebook looking for alternative routes to enter China
  • मार्क जुकरबर्ग की कंपनी चीन में दाखिल होने के लिए नए रास्ते तलाश रही है।
  • 2009 से अब तक चीन में ऑपरेट करने की कंपनी की कोशिशें नाकाम रहीं।
  • चीन में ऑपरेट करने से फेसबुक को आर्थिक फायदा होगा। 

नई दिल्ली.

दुनियाभर में लोगों को जोड़ने वाली सोशल नेटवर्किंग साइट फेसबुक पर चीन में बैन लगा है। यहां पर फेसबुक बाकी देशों की तरह ऑपरेट करने को स्वतंत्र नहीं है। यही वजह है कि फेसबुक इस दीवार को तोड़कर चीन के अंदर घुसने की काेशिशों में है। मार्क जुकरबर्ग की कंपनी चीन में एंट्री पाने के लिए नए रास्ते तलाश रही है। इसके तहत फेसबुक चीन की लोकल टेक कंपनियों में हिस्सेदारी खरीद रही है।

 

2009 से फेसबुक बैन है चीन में

फेसबुक दुनिया की सबसे लोकप्रिय सोशल नेटवर्किंग साइट है, लेकिन इसके आधिपत्य को चीन चुनौती दे रहा है। 2009 में चीन के शिनजियांग प्रांत में दंगे होने के बाद फेसबुक को देश में ब्लॉक कर दिया गया। तब से अब तक कंपनी ने चीन में दाखिल होने की जितनी कोशिशें की, सब नाकाम रहीं। हालांकि कंपनी उन एजेंट्स से रेवेन्यू हासिल करती है, जो चीनी विज्ञापनदाताओं के विज्ञापन फेसबुक के प्लेटफॉर्म पर लाते हैं। कंपनी कई बार चीन में ऐसा प्लेटफॉर्म लॉन्च करने की बात भी कर चुकी है, जो चीनी नियमों और कानूनों के दायरे में रहे। लेकिन हर बार अमेरिकी नेताओं ने फेसबुक के इस आइडिया की आलोचना की है।

 

ऐसे चीन में दाखिल हो सकता है फेसबुक

फेसबुक Yahoo की तर्ज पर चीन में दाखिल होने की काेशिश कर सकता है। याहू के सह-संस्थापक Jerry Yang ने 2005 में चीन की सबसे बड़ी ई-कॉमर्स कंपनी Alibaba में एक अरब डॉलर का निवेश करके 40 फीसदी हिस्सेदारी खरीदी थी। हालांकि इसके बाद भी याहू के प्रमुख ब्रांड को 2017 में Verizon Communications पद 4.5 अरब डॉलर में खरीद लिया था। हालांकि अलीबाबा में इन्वेस्टमेंट करना Yang के लिए फायदेमंद साबित हुआ। फेसबुक भी चीन की कई कंपनियों में इसी तरह से हिस्सेदारी खरीदने पर विचार कर रहा है।

 

ग्रोथ बनाए रखना हो रहा है मुश्किल

फिलहाल फेसबुक जिन देशों में ऑपरेट कर रहा है, वहीं पर अपनी ग्रोथ बनाए रखना उसके लिए मुश्किल हो रहा है। नॉर्थ अमेरिका और यूरोप के प्रमुख आर्थिक क्षेत्रों में नियामक प्रणाली काफी सख्त हैं। अगर फेसबुक आगे और भी कंपनियों का अधिग्रहण करता है, तो उसे सख्त निगरानी से गुजरना होगा। हालांकि चीन में दाखिल होने का मतलब होगा, 140 करोड़ लोगों के मार्केट में अपनी जगह बनाना। इससे फेसबुक को आर्थिक फायदा भी होगा। फिर भले ही इसके लिए कंपनी को छोटी-छोटी कंपनियों का अधिग्रहण करके चीन में दाखिल क्यों न होना पड़े।

 

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