दो-टूक /फेसबुक ने दिया मुकेश अंबानी को जवाब, कहा- डाटा कोई तेल नहीं है, जिसे देश में जमा किया जाए

  • फेसबुक ने कहा, डाटा की तुलना तेल से नहीं, पानी से की जाए
  • लोगों को यह तय करने का अधिकार देना चाहिए कि उनके डाटा का क्या होगा

Moneybhaskar.com

Sep 12,2019 08:15:22 PM IST

नई दिल्ली. देश के सबसे अमीर व्यक्ति मुकेश अंबानी की देश के अंदर डाटा स्टोर करने की योजना के जवाब में फेसबुक ने कहा है कि डाटा कोई नया तेल नहीं है। भारत जैसे देशों को इसे अपनी सीमाओं के अंदर जमा करने के बजाय इसके मुक्त प्रवाह की अनुमति देनी चाहिए। फेसबुक के ग्लोबल अफेयर्स एंड कम्युनिकेशंस के वाइस प्रेसिडेंट निक क्लेग के मुताबिक, देश की सुरक्षा के लिए डाटा शेयरिंग बेहद जरूरी है क्योंकि अपराध और आतंकवाद को खत्म करने के उद्देश्य से शुरू किए गए ग्लोबल डाटा-शेयरिंग उपायों से भारत को दूर रखा गया है।

अंबानी ने तेल से की थी डाटा की तुलना

हाल ही में रिलायंस इंडस्ट्री के चेयरमैन मुकेश अंबानी ने कहा था कि डाटा नया तेल है। उन्होंने भारतीय यूजर्स का डाटा ग्लोबल कॉरपोरेशंस द्वारा अपने अधिकार में लेने की बजाय देश के अंदर ही स्टोर करने का प्रस्ताव रखा था। इसके जवाब में निक ने कहा कि भारत और दुनिया में कई लोगों को लगता है कि डाटा कोई नया तेल है और जैसे तेल के भंडार को राष्ट्रीय सीमाओं में रखने से देश में आर्थिक समृद्धि बढ़ती है, वैसे ही डाटा को भी घर में स्टोर करने से फायदा होगा। लेकिन उनका ऐसा सोचना गलत है।

डाटा का मूल्य इसके मुक्त प्रवाह से आएगा

निक ने कहा कि डाटा तेल नहीं है। डाटा ऐसी कोई सीमित कमॉडिटी नहीं है जिसपर एकाधिकार किया जा सके, व्यापार किया जा सके, जिसे जमीन से निकालकर कारों और फैक्ट्रियों में जलाया जाए। अगर आपको डाटा की किसी लिक्विड से तुलना करनी ही है तो पानी से कीजिए। ग्लोबल इंटरनेट एक विशाल और सीमा-विहीन समुद्र जैसा है। डाटा का मूल्य इसे जमा करके रखने या किसी सीमित वस्तु के जैसे इसका व्यापार करने से नहीं आती, बल्कि इसके मुक्त प्रवाह से होने वाले इनोवेशन से आएगा। इस डाटा से जो ऐल्गोरिद्म और सेवाएं और इंटेलीजेंस तैयार किया जाएगा, उससे इस डाटा का मूल्य सामने आएगा।

लोगों को मिले तय करने का मौका

उन्होंने कहा कि इस इनोवेशन में क्षमता है कि भारत में बड़ी दौलत ला सके। और यह इनोवेशन ही आने वाले दशकों में भारत को ग्लोबल इंटरनेट में सबसे आगे रखेगा। उन्होंने कहा कि भारत को इंटरनेट के लिए नया टेम्प्लेट तैयार करना चाहिए जो लोगों को यह तय करने का अधिकार दे कि उनके डाटा का क्या होगा। ऐसा टेम्प्लेट जो कॉम्पटीशन और इनोवेशन को बढ़ावा दे और जो सभी के लिए खुला हो और हर किसी की पहुंच में हो।

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