तकनीक /अगस्त से शुरू होगा मोबाइल ट्रैकिंग सिस्टम, आसानी से मिल जाएंगे चोरी हुए फोन 

  • IMEI नंबर बदल देने या सिम कार्ड निकाल देने पर भी ट्रैक हो सकेगा चोरी हुआ फोन
  • महाराष्ट्र में इस प्रोजेक्ट का सफल ट्रायल किया गया था।
  • अब इसे राष्ट्रीय स्तर पर लागू करने की तैयारी चल रही है।

 

Moneybhaskar.com

Jul 07,2019 05:50:40 PM IST

नई दिल्ली. जल्द ही आप अपने खोए हुए फोन को ढूंढ पाएंगे। सरकार ऐसी तकनीक लॉन्च करने जा रही है, जो देशभर में ऑपरेट हो रहे चोरी के फोन को ट्रैक कर सकेगी। इस ट्रैकिंग सिस्टम की खास बात यह होगी कि फोन से सिम कार्ड निकाल देने या IMEI नंबर बदल देने के बाद भी फोन को ट्रैक किया जा सकेगा। इस तकनीक को Centre for Development of Telematics (C-DoT) ने तैयार किया है और इसे अगस्त में लॉन्च किए जाने की उम्मीद है।

15 करोड़ रुपए में तैयार हुआ CEIR

टेलीकॉम विभाग ने जुलाई, 2017 में C-DoT को मोबाइल ट्रैकिंग प्रोजेक्ट 'सेंट्रल इक्विपमेंट आइडेंटिटी रजिस्टर (CEIR)’ सौंपा था। इसका उद्देश्य था मोबाइल फोन की चोरी और नकली फोन के धंधे को रोकना। सरकार ने देश में CEIR सेट-अप करने के लिए 15 करोड़ रुपए आवंटित करने का प्रस्ताव दिया था।


ऐसे काम करेगी तकनीक

CEIR सिस्टम चोरी किए गए या गुम हुए फोन पर मौजूद सभी तरह की सेवाओं को ब्लॉक कर देगा। फिर चाहे सिम कार्ड हटा दिया जाए या फोन का IMEI नंबर बदल दिया जाए। यह सभी मोबाइल ऑपरेटर्स के IMEI डाटाबेस को कनेक्ट करेगा। यह सभी नेटवर्क ऑपरेटर्स के लिए सेंट्रल सिस्टम की तरह काम करेगा, जहां वे ब्लैक लिस्ट किए हुए मोबाइल टर्मिनल को शेयर कर सकेंगे ताकि किसी भी नेटवर्क में ब्लैकलिस्ट की गई डिवाइस दूसरे नेटवर्क में काम न करे, फिर चाहे सिम कार्ड क्यों न बदल दिया जाए।

जुलाई में शुरू किया था ट्रायल

डीओटी ने CEIR प्रोजेक्ट की शुरुआत 2017 में की थी। महाराष्ट्र में इसका ट्रायल किया गया था। ट्रायल में यह प्रोजेक्ट सफल रहा। इसके बाद अब इसको राष्ट्रीय स्तर पर लागू करने की तैयारी चल रही है। इस प्रोजेक्ट से जुड़े डीओटी के एक अधिकारी के अनुसार, मोबाइल चोरी से न केवल आर्थिक नुकसान होता है बल्कि यह किसी व्यक्ति के निजी जीवन और राष्ट्र की सुरक्षा के लिए भी खतरा पैदा कर सकता है। अधिकारी के अनुसार, डीओटी के लिए इस समय बाजार में नकली मोबाइल फोन की उपलब्धता एक बड़ा मुद्दा है। नकली आईएमईआई नंबर के साथ चलने वाले मोबाइल फोन हमारे आसपास एक्टिव रहते हैं और हम इनकी पहचान नहीं कर पाते हैं।


चोरी रोकने में मिलेगी मदद

मंत्रालय के अधिकारी का कहना है कि इस प्रोजेक्ट को शुरू करने का असली मकसद मोबाइल फोन की चोरी को हतोत्साहित करना है। अधिकारी का कहना है कि आईएमईआई नंबर को ब्लैकलिस्ट करने के बाद मोबाइल काम करने लायक नहीं रहेगा। इस डाटाबेस की मदद से सुरक्षा एजेंसियां चोरी हुए मोबाइल को आसानी से ढूंढ़ सकेंगी। अधिकारी का कहना है कि हम यह भी सुनिश्चित करेंगे कि सरकार की ओर से इस डाटाबेस का गलत इस्तेमाल ना किया जाए।

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