बड़ा दांव /भारत के एक्शन से नहीं डरी चीनी कंपनी, 7 हजार करोड़ का बनाया प्लान  

  • चीन की बाइट डांस है टिक टॉक की पैरेंट कंपनी है
  • भारत में तीन साल में 100 करोड़ डॉलर के निवेश का किया ऐलान

moneybhaskar

Apr 19,2019 08:40:39 PM IST



नई दिल्ली. कोर्ट के आदेश पर गूगल और ऐपल ने भले ही अपने ऑनलाइन स्टोर से सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म टिक टॉक को हटा दिया। इसके बावजूद न तो इसे इस्तेमाल कर रहे लोगों पर खास फर्क पड़ा और न ही इसे चलाने वाली कंपनी ज्यादा परेशान है। चीन की इंटरनेट टेक्नोलॉजी कंपनी बाइट डांस इसकी पैरेंट कंपनी है। उसने घोषणा की कि अगले तीन साल में वह भारत में 100 करोड़ डॉलर (करीब 7,000 करोड़ रुपए) का निवेश करेगी।

दुनिया के वैल्युएबल स्टार्टअप में होती है गिनती

बाइट डांस की गिनती अभी दुनिया के सबसे कीमती स्टार्टअप में एक के तौर पर होती है। सॉफ्टबैंक, जनरल अटलांटिक, केकेआर और सिकोया इसके निवेशकों में शामिल हैं। बाइट डांस टिक टॉक के अलावा हेलो और विगो वीडियो जैसे ऐप भी भारत में ऑपरेट करती है।

भारत में जमा रही है पैठ

बाइट डांस की डायरेक्टर (इंटरनेशनल पब्लिक पॉलिसी) हेलेना लेर्श्च ने कहा, ‘कंपनी कई महीनों से कंटेंट मॉडरेशन पॉलिसी को मजबूत करने में लगी है। भारत में टिक टॉक को लेकर मौजूदा घटनाक्रम को लेकर हम निराश जरूर हैं, लेकिन यह उम्मीद भी है कि हम इस मसले को सुलझा लेंगे। हम अपने भारतीय यूजर्स के लिए प्रतिबद्ध हैं।’

nullकंटेंट पर नजर रखेंगे 25 फीसदी लोग हेलेना ने कहा कि कंपनी भारत में इस साल के अंत तक अपने कर्मचारियों की संख्या एक हजार तक पहुंचा लेगी। इनमें से 25 फीसदी यानी 250 लोग कंटेंट पर नजर रखेंगे। वे कंटेंट को मॉडरेट करेंगे और उसमें गलत सामग्री हुई तो उसे प्लेटफॉर्म से हटाएंगे। टिक टॉक के भारत में करीब 12 करोड़ यूजर हैं। यह युवाओं में काफी लोकप्रिय है। मद्रास हाईकोर्ट ने दिया था यह आदेश मद्रास हाईकोर्ट ने 3 अप्रैल के अपने आदेश में केंद्र सरकार को टिक टॉक पर बैन लगाने को कहा था। कोर्ट ने कहा था, मीडिया रिपोर्ट से जाहिर है कि इस प्लेटफॉर्म पर पोर्नोग्राफिक और अनुचित कंटेंट मुहैया कराए जा रहे हैं। सुप्रीम कोर्ट ने मद्रास हाईकोर्ट के आदेश पर रोक लगाने से इनकार कर दिया। इसके बाद गूगल और ऐपल जैसी बड़ी टेक कंपनियों ने अपने-अपने ऑनलाइन स्टोर से टिक टॉक को हटा दिया। हालांकि, जिन लोगों ने पहले से यह एप डाउनलोड कर रखा है वे अब भी इसका इस्तेमाल कर रहे हैं। साथ ही थर्ड पार्टी एपीके फाइल के जरिए इसे डाउनलोड भी किया जा रहा है। हेलेना ने कोर्ट के फैसले पर टिप्पणी करने से इनकार कर दिया। सुप्रीम कोर्ट में इस मामले पर अगली सुनवाई 22 अप्रैल को होनी है। मद्रास हाईकोर्ट में अगली सुनवाई 24 अप्रैल को होगी।मशीन और कर्मचारी मिलकर कंटेंट पर नजर रखेंगे हेलेना ने कहा कि उनकी कंपनी अपने प्लेटफॉर्म पर शेयर किए जा रहे कंटेंट को दो चरणों में परखेगी। पहले चरण में मशीन लर्निंग के जरिए कंटेंट को जांचा जाएगा। इसके बाद मॉडरेशन के लिए रखे गए कर्मचारी भी इसकी जांच करेंगे। अगर कुछ गलत पाया गया तो कंटेंट को अप्रूव नहीं किया जाएगा। उन्होंने कहा कि हाल ही में कम्यूनिटी गाइडलाइन पर खरा न उतरने के कारण 60 लाख से ज्यादा वीडियो को प्लेटफॉर्म से हटाया गया है।
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