एजीआर विवाद /नॉन-टेलीकॉम सरकारी कंपनियों पर समयसीमा लागू होगी या नहीं, डॉट कर रहा विचार

  • 15 दूरसंचार कंपनियों पर है 1.47 लाख करोड़ रुपए की देनदारी
  • फैसले के बाद गैर-दूरसंचार कंपनियों पर भी निकला 2.4 लाख करोड़ रुपए का बकाया

Moneybhaskar.com

Jan 19,2020 06:49:00 PM IST

नई दिल्ली. दूरसंचार विभाग इस मुद्दे पर गौर कर रहा है कि क्या दूरसंचार कंपनियों पर सांविधिक बकाए के भुगतान के लिए तय 23 जनवरी की समयसीमा गैर-दूरसंचार सार्वजनिक उपक्रमों पर भी लागू होती है। गौरतलब है कि समायोजित सकल राजस्व (एजीआर) को लेकर उच्चतम न्यायालय में चले विवाद में सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियां (पीएसयू) मूल पक्ष नहीं थीं।

पब्लिक सेक्टर कंपनियों को भी चुकाना पड़ सकता है बकाया

उच्चतम न्यायालय के अक्टूबर में दिए गए आदेश के बाद सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों से भी सांविधिक बकाया चुकाने को कहा गया है। लेकिन इसमें बड़ा सवाल यही है कि क्या 23 जनवरी की समयसीमा कानूनी रूप से सार्वजनिक क्षेत्र की उन कंपनियों पर भी लागू होती है जो सीधे इस विवाद में पक्ष नहीं थीं। हालांकि, दूरसंचार विभाग में यही राय बन रही है कि न्यायालय द्वारा तय समयसीमा सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों पर लागू नहीं होगी, लेकिन स्पष्टता के लिए इसकी कानूनी समीक्षा की जा रही है।

15 दूरसंचार कंपनियों पर 1.47 लाख करोड़ रुपए की देनदारी

एजेंसी के मुताबिक, पिछले साल अक्टूबर में आए उच्चतम न्यायालय के आदेश के बाद दूरसंचार विभाग ने जो अनुमान लगाया है कि उसके अनुसार 15 दूरसंचार कंपनियों पर कुल देनदारी 1.47 लाख करोड़ रुपए की बनती है। इसमें जुर्माना और ब्याज भी शामिल है। दूरसंचार क्षेत्र की कंपनियों पर यह अतिरिक्त देनदारी उच्चतम न्यायालय के फैसले के बाद आई है। उच्चतम न्यायालय ने इस मामले में सरकार की उस दलील को सही ठहराया है कि दूरसंचार कंपनियों की गैर- दूरसंचार कारोबार से होने वाली आय भी उनके सालाना समायाजित सकल राजस्व का हिस्सा है। दूरसंचार कंपनियों को अपनी राजस्व आय से लाइसेंस और स्पेक्ट्रम शुल्क का सरकार को भुगतान करना होता है।

गैर-दूरसंचार कंपनियों पर 2.4 लाख करोड़ रुपए की देनदारी

इस फैसले के बाद गैर-दूरसंचार क्षेत्र की कंपनियों पर भी 2.4 लाख करोड़ रुपए की देनदारी बनती है। इनमें गेल इंडिया लिमिटेड, विद्युत पारेषण क्षेत्र की पावर ग्रिड आदि भी शामिल हैं। इन कंपनियों ने ऑप्टिक फाइबर केबल पर ब्रांडबैंड चलाने के लिए लाईसेंस लिया हुआ है। गेल की देशभर में फैली पाइपलाइन के साथ और पावर ग्रिड की पारेषण लाइनों के साथ यह केबल चलती है। उच्चतम न्यायालय का फैसला आने के बाद दूरसंचार विभाग ने गेल इंडिया से 1.72 लाख करोड़ रुपए का सांविधिक बकाया मांगा है। ठीक ऐसे ही पावरग्रिड पर 21 हजार करोड़ रुपए और आयल इंडिया पर 40 हजार करोड़ रुपए की देनदारी बनती है।

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