बढ़ेगा कवरेज /अब गायब नहीं होगा आपके स्मार्टफोन का नेटवर्क, बिजली के टावरों पर बनेंगे मोबाइल स्टेशन

Moneybhaskar.com

Jun 17,2019 02:32:05 PM IST

नई दिल्ली। ग्रामीण क्षेत्रों खासकर दूरदराज के क्षेत्रों में मोबाइल नेटवर्क की समस्या झेल रहे लोगों के लिए यह खुशखबरी है। अब उनके स्मार्टफोन का नेटवर्क गायब नहीं होगी। सेंट्रल इलेक्ट्रिसिटी रेगुलेटरी कमीशन (सीईआरसी) ने पावर ग्रिड को अपने टावरों को टेलीकॉम कंपनियों को बेस ट्रांस रिसीवर स्टेशन (बीटीएस) स्थापित करने की अनुमति दे दी है।

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पावर ग्रिड की आमदनी भी बढ़ेगी

सीईआरसी ने हाल ही में दिए अपने फैसले में कहा है कि देश में ग्रामीण इलाकों में टेलीकॉम कवरेज में बढ़ोतरी होगी, साथ ही पावर ग्रिड की आमदनी में भी बढ़ोतरी होगी। बिजली के टावरों के इस्तेमाल से होने वाली आय का एक हिस्सा वितरण कंपनियों को मिलेगा, इससे कंपनियों को उपभोक्ताओं पर पड़ने वाले बोझ में कमी आएगी। सीईआरसी ने कहा कि यह याचिका अधिनियम के प्रस्तावों के विपरीत नहीं है, इसलिए हम याचिकाकर्ता को यह व्यवसाय करने की अनुमति दे रहे हैं। आपको बता दें कि पावर ग्रिड ने बिजली वितरण के ढांचे का इस्तेमाल दूरसंचार के उद्देश्य से इस्तेमाल करने के लिए सीईआरसी से अनुमति मांगी थी।

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बिजली और टेलीकॉम कंपनियों में बंटेगा लाभ

सीईआरसी की ओर से इसके लिए रेवेन्यू शेयरिंग मॉडल भी तय कर दिया गया है। सीईआरसी ने कहा है कि सभी प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष खर्चों को काटने के बाद टेलीकॉम और बिजली कंपनियां कुल राजस्व का 50-50 फीसदी हिस्सेदारी शेयर करेंगी। हालांकि, एक साल पूरा होने के बाद इसकी समीक्षा की जाएगी। पावर ग्रिड के पास करीब 1.5 लाख हाईवोल्टेड ट्रांसमिशन टावर हैं जो मोबाइल टावर एंटीना या बीटीएस स्थापित करने के लायक हैं। यह ट्रांसमिशन लाइन टावर पूरे देश में फैले हैं जो सुदूर और ग्रामीण क्षेत्रों से होकर गुजरती हैं।

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डीजल जनरेटर से भी मिलेगी मुक्ति

ग्रामीण क्षेत्रों में बिजली की उपलब्धता नहीं होने के कारण टेलीकॉम कंपनियों को डीजल के जनरेटर पर निर्भर रहना पड़ता है। इससे ऑपरेशनल लागत बढ़ती है और कार्बन का अधिक उत्सर्जन होता है। पावर ग्रिड के टावरों पर 99.5 फीसदी से ज्यादा बिजली की उपलब्धता रहती है। ऐसे में इन पर स्थापित किए जाने वाले मोबाइल टावर या बीटीएस स्टेशन के लिए डीजल जनरेटर की आवश्यकता भी नहीं रहेगा। इसके अलावा मोबाइल ऑपरेटर्स को जमीन की लीज, टावर का निर्माण समेत कई अन्य समस्याओं का भी सामना करना पड़ता है। इस फैसले के बाद टेलीकॉम ऑपरेटर्स को यह समस्याएं भी नहीं होंगी। बीटीएस स्टेशन जमीन से 7 से 8 मीटर ऊपर स्थापित किए जाएंगे, ताकि बाढ़ आदि जैसी आपदा में उन पर कोई प्रभाव ना पड़े।

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