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जवाब /BSNL-MTNL की ऊंची कर्मचारी लागत के कारण दिया जा रहा वीआरएस: सरकार

  • वोडाफोन के मुकाबले बीएसएनल की कर्मचारी कॉस्ट 12 गुना ज्यादा
  • अब तक 92 हजार से ज्यादा कर्मचारियों ने किया वीआरएस के लिए आवेदन

Moneybhaskar.com

Nov 28,2019 01:57:12 PM IST

नई दिल्ली। केंद्र सरकार ने सरकारी स्वामित्व वाली टेलीकॉम कंपनियों भारत संचार निगम लिमिटेड (बीएसएनएल) और महानगर टेलीफोन निगम लिमिटेड (एमटीएनएल) के लिए एक रिवाइवल प्लान तैयार किया है। इस प्लान के तहत कर्मचारियों को लिए वॉलेंटिरी रिटायरमेंट स्कीम (वीआरएस) लॉन्च की गई है। अब सरकार ने इस वॉलेंटिरी स्कीम को लॉन्च करने की वजह बताई है।

निजी कंपनियों के मुकाबले कर्मचारी लागत काफी ज्यादा

दूरसंचार मंत्री रविशंकर प्रसाद ने एक सवाल के जवाब में गुरुवार को राज्यसभा में कहा कि बीएसएनएल और एमटीएनएल देश के रणनीतिक एसेट्स हैं, यही कारण है कि इनको रिवाइव करने का फैसला किया है। केंद्रीय मंत्री ने बताया कि बीएसएनएल की कर्मचारी लागत कुल राजस्व में से 75.06 फीसदी है जबकि एमटीएनएल की 87.15 फीसदी है। वहीं निजी कंपनी एयरटेल की कर्मचारी लागत कुल 2.95 फीसदी, वोडाफोन की 5.59 फीसदी और रिलायंस जियो की 4.27 फीसदी है। यदि वोडाफोन से तुलना की जाए तो बीएसएनएल की कर्मचारी लागत 12 गुना से ज्यादा है। केंद्रीय मंत्री ने कहा कि कर्मचारी लागत के ज्यादा बोझ को वीआरएस के जरिए कम किया जा सकता है और हम कर्मचारियों को आकर्षक पैकेज देने जा रहे हैं। प्रसाद ने कहा कि यह सरकार और मेरी भी इच्छा है कि इन कंपनियों को रिवाइव किया जाए और इनको प्रोफेसनल बनाया जाए।

92 हजार से ज्यादा कर्मचारियों ने चुनी वीआरएस

इस सप्ताह सोमवार तक बीएसएनएल-एमटीएनल के 92 हजार से ज्यादा कर्मचारी वीआरएस के लिए आवेदन कर चुके हैं। दोनों कंपनियों के कर्मचारी 3 दिसंबर तक वीआरएस के लिए आवेदन कर सकते हैं। इन कर्मचारियों को 31 जनवरी 2020 से सेवानिवृत्त माना जाएगा। बीएसएनएल में करीब 1.50 लाख कर्मचारी हैं जबकि एमटीएनएल में करीब 14 हजार कर्मचारी हैं। जिन कर्मचारियों की उम्र 50 साल से ज्यादा हो गई है वे वीआरएस के लिए आवेदन कर सकते हैं।

दोनों कंपनियों के लिए 69 हजार करोड़ के पैकेज का ऐलान

केंद्र सरकार ने बीएसएनएल और एमटीएनएल के रिवाइवल की घोषणा की है। इसके तहत दोनों कंपनियों का विलय किया जाएगा। साथ ही दोनों कंपनियों की आर्थिक हालत सुधारने के लिए सरकार ने 69 हजार करोड़ के पैकेज का ऐलान किया है। इस योजना के तहत सरकार ने दोनों कंपनियों से संपत्तियों का मौद्रीकरण और कर्मचारियों को वीआरएस देने को कहा था। दोनों कंपनियां करीब 1 दशक से घाटे में चल रही हैं और दोनों कंपनियों पर करीब 40 हजार करोड़ रुपए का कर्ज बकाया है।

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